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शरिया अदालतों की मांग पर भड़का विहिप, कहा, भंग हो आल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड

Fri, 13 Jul 2018 12:14 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 13 Jul 2018 12:14 AM IST
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The VHP said the demand of Sharia courts, dissolved All India Muslim Personal Law Board

देश में हर जिले में शरिया अदालतें (दारुल कजा) खोलने की ऑल इंडिया मुस्लिम लॉ बोर्ड की मांग पर सियासत शुरू हो गई है। भाजपा के बाद अब विश्व हिन्दू परिषद ने भी मुस्लिम बोर्ड की इस मांग को मुस्लिम महिलाओं के साथ देश के लिए भी घातक बताते हुए आल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को बर्खास्त करने की मांग की है।

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विश्व हिन्दू परिषद के केन्द्रीय संयुक्त महामंत्री डा. सुरेन्द्र जैन ने कहा कि देश में शरिया अदालतें बनाने की मांग करना समानांतर न्याय व्यवस्था बनाने का षडयंत्र है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की देश के हर जिले में शरिया अदालतें स्थापित करने के फैसले न केवल मुस्लिम महिलाओं बल्कि सम्पूर्ण देश के लिए घातक साबित होगा। 
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उन्होंने कहा कि यह आल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड का देश में कोई वैधानिक अस्तित्व ही नहीं है, तो वह किस हैसियत से गैर कानूनी शरिया अदालतें बनाने की बात कर रहा है। जैन ने मांग की है कि मुस्लिम समाज को पिछड़ा बनाए रखने वाले इस कट्टरपंथी असंवैधानिक संगठन को ही भंग कर दिया जाए।

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हलाला, बहु विवाह को लेकर साधा निशाना

The VHP said the demand of Sharia courts, dissolved All India Muslim Personal Law Board

जैन के मुताबिक, विहिप का मानना है कि शरिया अदालतों के जरिए देश के मुल्ला मौलवी तीन तलाक को अवैध घोषित करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को विफल कर देंगे। हलाला, बहु विवाह का मामला भी सुप्रीम कोर्ट के सामने है, जिसका कोई भी सभ्य-समाज समर्थन नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि पर्सनल ला बोर्ड का यह नया पैंतरा सुप्रीम कोर्ट के संभावित फैसलों को विफल करने का एक षड्यंत्र है। 

वहीं जैन का यह भी मत है कि शरिया अदालतें के जरिए मुस्लिम बहुल इलाकों में हिंदू लड़कियों का जबरन धर्मांतरण कर उनके निकाह को वैधानिक रूप देने का भी कुप्रयास किया जाएगा। जैन ने आरोप लगाया कि पर्सनल लॉ बोर्ड इनको मध्यस्थता का केंद्र बता कर अपनी इस घिनौनी करतूत पर पर्दा डालना चाहता है। उन्होंने नाइजीरिया, सूडान का जिक्र करते हुए कहा कि इन देशों में शरिया अदालतों का फैसला थोपने के कारण ही तो वहां गृह युद्ध जैसी परिस्थितियां पैदा हुई हैं। उन्होंने पूछा कि क्या पर्सनल लॉ बोर्ड भारत में भी यही स्थिति लाना चाहता है?

साथ ही, उन्होंने कांग्रेस और वामदलों पर निशाना साधते हुए कहा कि खापों का विरोध करने वाले आज शरिया अदालतों के पक्ष में खड़े हैं। उन्होंने कहा कि मुल्ला, मौलवी तो बिना शरिया अदालतों के ही रोजाना महिलाओं व मानवता के विरोध में फतवे जारी करते हैं। ऐसे में शरिया अदालतों का दर्जा मिलने पर उनके अत्याचारों की गंभीरता को आसानी से समझा जा सकता है।

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