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पीएम मोदी ने जिस आदिवासी पति-पत्नी की प्रशंसा की, पंचायत ने उसे गांव से निकाला
Sat, 23 Nov 2019 05:46 AM IST
संजीव कुमार झा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Sat, 23 Nov 2019 05:46 AM IST
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी(फाइल फोटो)
- फोटो : Twitter
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ दिन पहले अपने मन की बात कार्यक्रम में केरल के एक आदिवासी बुजुर्ग दंपती के कामों की प्रशंसा की थी लेकिन अब उसे उसके समुदाय ने गांव से बाहर निकलने का फरमान सुना दिया है। समुदाय ने इस दंपती पर गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि इसने एक ऐसी पुस्तक लिखने में मदद की जिससे उस समुदाय की छवि खराब हुई है।
इस महीने की शुरुआत में गांव में एक बैठक हुई और पंचायत ने पीवी चिन्नाथम्पी और मणियम्मा को एडमालकुट्टी गांव से बाहर जाने का फरमान सुना दिया। दरअसल, विवाद लेखक पीके मुरलीधरन की किताब ‘एडमालकुड्डी: ओरुम, पोरुलुम’ को लेकर हुआ, जो उन्होंने 2014 में लिखी थी। चिन्नाथम्पी ने इस किताब को लिखने में मुरलीधरन की सहायता की थी।
दंपती गुरुवार को इस मामले को लेकर शिक्षक-लेखक पी के मुरलीधरन के साथ एसीसी/एसटी कल्याण राज्य मंत्री एके बालन से मुलाकात की और मदद की गुहार लगाई। मंत्री ने दंपती को हरसंभव मदद करने का भरोसा दिया। मुरलीधरन ने बताया कि मंत्री ने देवीकुलम के विधायक एस राजेंद्रन से बात करेंगे। फिलहाल वे अपने गांव नहीं जा सकते। दंपती मुरलीधरन के दोस्त के घर में रह रहे हैं।
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मुरलीधरन ने बताया कि ‘एडमालकुड्डी: ओरुम, पोरुलुम’ नामक पुस्तक 2014 में लिखी थी लेकिन अभी तक इसे लेकर किसी को भी समस्या नहीं थी। मैं आदिवासियों के लिए चलाए जा रहे कल्याणकारी योजनाओं में हो रहे भ्रष्टाचार और उनके उत्पीड़न को लेकर आवाज उठाता रहा हूं। मुझे लगता है कि इस दंपती को बाहर निकालने के पीछे कुछ लोग साजिश कर रहे हैं।
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इस महीने की शुरुआत में गांव में एक बैठक हुई और पंचायत ने पीवी चिन्नाथम्पी और मणियम्मा को एडमालकुट्टी गांव से बाहर जाने का फरमान सुना दिया। दरअसल, विवाद लेखक पीके मुरलीधरन की किताब ‘एडमालकुड्डी: ओरुम, पोरुलुम’ को लेकर हुआ, जो उन्होंने 2014 में लिखी थी। चिन्नाथम्पी ने इस किताब को लिखने में मुरलीधरन की सहायता की थी।
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दंपती गुरुवार को इस मामले को लेकर शिक्षक-लेखक पी के मुरलीधरन के साथ एसीसी/एसटी कल्याण राज्य मंत्री एके बालन से मुलाकात की और मदद की गुहार लगाई। मंत्री ने दंपती को हरसंभव मदद करने का भरोसा दिया। मुरलीधरन ने बताया कि मंत्री ने देवीकुलम के विधायक एस राजेंद्रन से बात करेंगे। फिलहाल वे अपने गांव नहीं जा सकते। दंपती मुरलीधरन के दोस्त के घर में रह रहे हैं।
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पीएम मोदी ने लाइब्रेरी को लेकर की थी प्रशंसा
दंपती लेखक मुरलीधरन की मदद से गांव में एक लाइब्रेरी बनाई थी। इसे लेकर मोदी ने इस साल जून में अपने मन की बात कार्यक्रम में प्रशंसा की थी। मुरलीधरन और चिन्नाथम्पी ने सबसे पहले एक चाय की दुकान में लाइब्रेरी खोली थी। 2017 में उन्होंने पुस्तकों को निकट के एक प्राथमिक विद्यालय में पहुंचा दिया।मुरलीधरन ने बताया कि ‘एडमालकुड्डी: ओरुम, पोरुलुम’ नामक पुस्तक 2014 में लिखी थी लेकिन अभी तक इसे लेकर किसी को भी समस्या नहीं थी। मैं आदिवासियों के लिए चलाए जा रहे कल्याणकारी योजनाओं में हो रहे भ्रष्टाचार और उनके उत्पीड़न को लेकर आवाज उठाता रहा हूं। मुझे लगता है कि इस दंपती को बाहर निकालने के पीछे कुछ लोग साजिश कर रहे हैं।