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इंजीनियरिंग में सौ फीसदी रोजगार के लिए फिर से रिडिजाइन होंगे परंपरागत कोर्स

Thu, 25 Jul 2019 06:36 AM IST
संदीप भट्ट न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीमा शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीमा शर्मा Published by: संदीप भट्ट Updated Thu, 25 Jul 2019 06:36 AM IST
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the traditional course Will be redesigned for Hundred percent employment in engineering
सांकेतिक तस्वीर

केंद्र सरकार इंजीनियरिंग कॉलेजों में कैंपस प्लेसमेंट 52 से बढ़ाकर सौ फीसदी करने के लिए परंपरागत कोर्स को रिडिजाइन करेगी। इसके लिए सरकार ने वर्किंग ग्रुप गठित किया है, जो कंप्यूटर साइंस, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक, केमिकल और सिविल इंजीनियरिंग कोर्स को नए सिरे से तैयार करेगा। इस ग्रुप में एपल, गूगल, एसोचैम, नैसकॉम, आईआईटी के प्रतिनिधि शामिल हैं।  

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सरकार के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, इंजीनियरिंग में रोजगार बढ़ाने को अखिल भारतीय तकनीकी परिषद और आईआईटी ने पाठ्यक्रम, ट्रेनिंग समेत मार्केट डिमांड के आधार पर कोर्स को डिजाइन किया था।
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इसके चलते शैक्षणिक सत्र 2018-19 में कैंपस प्लेसमेंट पिछले सत्र के मुकाबले सात फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 52 फीसदी पर पहुंच गया था। हालांकि इसके बावजूद परंपरागत कोर्सों में युवाओं के लिए रोजगार के मौकों को बढ़ाने को इन्हें फिर से डिजाइन किया जा रहा है।    
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 गौरतलब है कि आईआईटी की कमेटी ने 2017 में केंद्र सरकार को परंपरागत रोजगार मुहैया न करने वाले कोर्स को खत्म करने का सुझाव दिया था। साथ इन कोर्स की सीट अन्य कोर्स में शिफ्ट करने की सिफारिश की थी। इसी के चलते इंजीनियरिंग कॉलेजों में ऐसे कोर्स में सीटों में कटौती भी की हैं।

आधुनिक तकनीक होगी शामिल 

वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, कोर्स को रिडिजाइन करने के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, इंटरनेट, क्लाउंड कंप्यूटिंग, एंबोडिड एसडब्ल्यू, डाटा एनालिस्ट, रोबोटिक साइंस, मार्केटिंग, मोबोलिटी जैसे कोर एरिया भी जोड़ने होंगे। क्योंकि भविष्य में साधारण इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वालों को रोजगार नहीं मिलेगा, बल्कि आधुनिक तकनीक को शामिल करना होगा।

वर्किंग ग्रुप की पहली बैठक 5 को 

वर्किंग ग्रुप की पहली बैठक 5 अगस्त को होगी। इस ग्रुप में वेनेट यूनिवर्सिटी, आईआईटी रायपुर, एपल आदि के प्रतिनिधि शामिल हैं। सरकार ने ग्रुप को परंपरांगत कोर्स समेत अन्य इंजीनियरिंग कोर्स को रिडिजाइन करने की संभावना पर पहली रिपोर्ट देने के लिए एक महीने का समय दिया है। 

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