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टॉप पर है उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री मोदी और शाह का मिशन 74

Tue, 07 Aug 2018 12:14 PM IST
शशिधर पाठक, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, नई दिल्ली Updated Tue, 07 Aug 2018 12:14 PM IST
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The top is UP Prime Minister Modi-Shah Mission 74
नरेंद्र माेदी के साथ अमित शाह
2014 के आम चुनाव में उत्तर प्रदेश में जमकर भगवा रंग चढ़ा। इतना कि 80 लोकसभा सीटों में से 73 भाजपा की झोली में आई थी। 2017 के विधानसभा चुनाव में यह और भी चोखा हो गया। लेकिन भाजपा के अंदरुनी सर्वे उसे डराने लगे हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पहले ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को सतर्क कर चुका है। इतना ही नहीं केन्द्र सरकार के चार साल के कामकाज की रिरपोर्ट पेश करने केदौरान अमित शाह ने भी माना था कि कुछ कमियां हैं। शाह के अनुसार अभी लोकसभा चुनाव में एक का समय है और तबतक वह इन चुनौतियों का समाधान कर लेंगे। प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा एक बार फिर इसी मिशनमोड में हैं।
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पांच से अधिक बार हो आए पीएम

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने लोकसभा चुनाव 2019 के लिए राज्य में 74 लोकसभा जीतने का लक्ष्य रखा है। इसे केन्द्र में रखकर भाजपा के प्रमुख रणनीतिकारों में एक सुनील बंसल लगातार कड़ी मेहनत कर रहे हैं। संगठनऔर सरकार के स्तर पर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और मुख्यमंत्री मोगी आदित्यनाथ कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। भाजपा अध्यक्ष खुद मिशन मोड पर हैं। वह उ.प्र. का दौरा करने का कोई भी अवसर नहीं छोड़ रहे हैं। जुलाई सेअब तक अमित शाह उ.प्र. का छह से अधिक दौरा कर चुके हैं। सूत्र बताते हैं कि 1000 से अधिक सोशल मीडिया वालेंटियर ने राज्य में सफलता के लिए मोर्चा संभाल लिया है। व्हाट्सएप ग्रुप और सोशल मीडिया के बेहतरइस्तेमाल की तैयारी चल रही है।
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भाजपा के आईटी सेल के प्रमुख सूत्र की माने तो भाजपा तीन स्तरों पर सोशल मीडिया की तैयारी कर रही है। पहला स्तर विपक्ष को सोशल मीडिया पर अपने प्रचार में उलझाना है। दूसरे स्तरपर विपक्ष के हर प्रयास को बेअसर और तीसरे स्तर में उसके(विपक्ष) प्रचार के ऊपर बढ़त बनाना है। पार्टी के विस्तारकों, पन्ना प्रमुखों, बूथ प्रमुखों को नए तरीके से तैयार किया जा रहा है। आरएसएस और उसके अनुषांगिकसंगठनों ने भी प्रचार-प्रसार के काम को तेज किया है। इतना ही नहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 50 दिन के भीतर छह से अधिक बार उ.प्र. जाकर राज्य की अहमित का संदेश देने की कोशिश की है।
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तोड़ रहे हैं परंपरा

उ.प्र. और राज्य में बनारस। बनारस यानी प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र। इसकी अहमियत बताने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी परंपरा को तोडऩे में भी नहीं हिचक रहे हैं। इसका एक उदाहरण 15 वां प्रवासी भारतीय दिवस काआयोजन है। तीन दिन का भरवंशियों का यह सम्मेलन हर साल 7-9 जनवरी को मनाया जाता रहा। इसकी परंपरा 2003 में अटल बिहारी वाजपेयी की एनडीए सरकार ने शुरू की थी। इसके पीछे थीम यह थी कि 9 जनवरी1915 को देश के पहले अप्रवासी भारतीय मोहनदास करमचंद गांधी(राष्ट्रपिता) दक्षिण अफ्रीका से मुंबई (भारत) आए थे। लेकिन इस बार यह आयोजन 21-23 जनवरी को बनारस में होगा।

14 वां प्रवासी भारतीय दिवस पिछलेसाल बेंग्लुरू में हुआ था और इसे अब तक 7-9 जनवरी को ही आयोजित किया गया। पहली बार इसका आयोजन 21-23 जनवरी को वाराणसी में होगा। इसके पीछे एक वजह प्रधानमंत्री द्वारा अपने संसदीय क्षेत्र के लोगों कोलगातार महत्व का एहसास कराना भी है। वैसे भी इस बार अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप गणतंत्र दिवस के मेहमान बनने वाले हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि 51 से अधिक देशों से प्रवासी भारतीय दिवस में भाग लेने वालेभरतवंशियों में इस बार राजपथ पर मौजूद रहने की भी ललक रहेगी।

The top is UP Prime Minister Modi-Shah Mission 74
पीएम मोदी, अमित शाह
पीएम और शाह लगातार करेंगे दौरा

बनारस में प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान सक्रिय रहने वाले सूत्र के अनुसार प्रधानमंत्री देव दीपावली के दिन भी बनारस आ सकते हैं। देवदीपावली का कार्यक्रम काफी भव्य स्तर पर होना तय है। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेन्द्रमोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह द्वारा हर महीने में एक बार किसी न किसी बहाने कार्यक्रम में शरीक होने के लिए उ.प्र. जाने की सूचना मिल रही है। एक वरिष्ठ केन्द्रीय मंत्री का कहना है कि उनके अलावा सभी से उ.प्र. समेत पूरे देश से जुड़ी योजनाओं का ब्यौरा मांगा गया था। उनके मंत्रालय ने अपनी योजना भेज दी है। सूत्र का कहना है कि उनसभी के लिए उ.प्र. महत्वपूर्ण है। उ.प्र. और खासकर बनारस, गोरखपुर, इलाहाबाद, सहारनपुर, आगरा मंडल में कार्यक्रम तेजी से लगाए जा रहे हैं।
 
क्यों है भाजपा के माथे पर बल

भाजपा के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार ने पांच साल पूरे कर लिए हैं। उ.प्र. और केन्द्र दोनों में भाजपा की सरकार है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की छवि में कोई खास गिरावट नहीं दर्ज नहीं हुई है, लेकिन उ.प्र. सरकार जनता के बीचडेढ़ साल बीतने के बाद भी अपना कोई इकबाल नहीं बना पा रही है। ऐसे में केन्द्र और राज्य सरकार के खिलाफ सरकार विरोधी लहर की संभावना लगातार बढ़ रही है।

दूसरा बड़ा कारण महागठबंधन है। उपचुनाव में भाजपा उ.प्र. से लगातार तीन लोकसभा सीट हार चुकी है। तीनों सीटों पर हार का कारण सपा और बसपा का हाथ मिलाना रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, बसपा प्रमुखमायावती और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव लगातार गठबंधन के संकेत दे रहे हैं। उ.प्र. में सपा, बसपा, रालोद और कांग्रेस के बीच में चुनाव पूर्व तालमेल होने की प्रबल संभावना है। ऐसे में प्रस्तावित लोकसभा चुनाव 2019 विकास के मुद्दे की बजाय जाति, वोट प्रतिशत के गणित पर होने की संभावना है। भारतीय राजनीति के चुनावी अनुभव हमेशा धर्म पर जाति को हाबी साबित करते रहे हैं। ऐसे में विकास, सुधार और न्यू इंडिया के जरिएबदलाव की बात करने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के माथे पर चिंता और चुनौती की लकीरें हैं।

हार बाजी जीत लेते हैं मोदी और शाह

कुशल रणनीति, अथक परिश्रम और राजनीति में हर विकल्प के प्रयोग का दरवाजा खुला रखकर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह हर बाजी जीत लेते हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को उनकी रणनीति पर पूरा भरोसा होता है। शाह इससमय 2019 के चक्रव्यूह को भेदने में सबसे ज्यादा व्यस्त हैं। अप्रैल 2018 से अब तक वह देश के सभी राज्यों का दौरा कर आए हैं। कुछ राज्यों उनका दौरा तीन से चार बार तक हुआ है। शाह लगातार तैयारियों की समीक्षा कररहे हैं। वह अपने राजनीतिक विरोधियों को पहले उत्तेजित करते हैं, फिर राजनीति की पिच पर छकाते हैं और अंत में पार्टी की तैयारियों के भरोसे राजनीतिक बाजी जीत लेते हैं। गुजरात विधानसभा चुनाव-2017 में भी भाजपालगातार चुनाव जीतने में सफल रही तो कर्नाटक में विपक्ष की तरफ से मिल रही चुनौतियों को काफी हद तक वह साधने में कामयाब रहे। 2014 के आम चुनाव के बाद 97 फीसदी राज्यों में हुए चुनाव में भाजपा या भाजपा केसहयोग से सरकार बनवाने में सफल रहे। 
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