कश्मीर के हाल पर संसद में बवाल, विपक्षी दलों ने पीएम से की चुप्पी तोड़ने की अपील
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घाटी में पिछले कुछ दिनों से जारी हिंसक घटनाओं के बाद वहां 31 दिनों से कर्फ्यू लगा है। विपक्षी दलों ने कश्मीर में प्रदर्शनकारियों पर पेलेट गन के इस्तेमाल पर रोक लगाने, अफ्प्सा वापस लेने तथा रिहाइशी इलाकों से सेना की तैनाती वापस लेने की भी मांग की।
इस मसले के समाधान के लिए फौरन सर्वदलीय बैठक बुलाने की भी मांग की गई। राज्यसभा के उपसभापति पी जे कुरियन ने हालात की गंभीरता भांपते हुए सरकार से मंगलवार तक सदन में कश्मीर पर चर्चा कराने का निर्देश दिया है।
सदन में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने शून्यकाल शुरू होते ही कश्मीर के हालात का मुद्दा उठाया। आजाद ने कहा, ‘हिंदुस्तान का ताज जल रहा है, पर उसकी गर्मी दिल्ली तक नहीं पहुंचती।’ आजाद ने घाटी में मृतकों, घायलों और हिंसक घटनाओं का आंकड़ा पेश करते हुए कहा कि कश्मीर के लोग जानना चाहते हैं कि प्रधानमंत्री चुप क्यों हैं।
देश का कोई ऐसा हिस्सा नहीं है जहां इतने दिनों तक कर्फ्यू लगा हो। उन्होंने कहा, ‘इससे वहां की शासन-व्यवस्था बिगड़ गई है, शिक्षण संस्थान बंद हैं और प्रधानमंत्री मूकदर्शक हालात को बिगड़ते देख रहे हैं।
पिलेट गनहम चाहते हैं कि सरकार जगे। वहां के हालात को नजरअंदाज न करें और इससे उबरने के लिए राजनीतिक प्रक्रिया तेज करे।’ विपक्ष के गंभीर तेवर को देखते हुए नरेंद्र मोदी ने गृहमंत्री राजनाथ सिंह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत दोभाल के साथ आगे की नीति पर बैठक की।
पिलेट गन और अफ्प्सा पर तत्काल रोक लगे
माकपा सांसद सीताराम येचुरी ने आजाद का साथ देते हुए फौरन सभी पार्टियों की बैठक बुलाने की मांग की। भाकपा के डी राजा ने हालात को सामान्य करने के लिए पिलेट गन और अफ्प्सा पर तत्काल रोक लगाई जानी चाहिए।
येचुरी ने कहा कि महीने भर पहले हिंसा की शुरुआत होते ही गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने उनसे बात की थी। उन्होंने उसी वक्त सर्वदलीय बैठक बुलाने की सलाह दी थी। येचुरी ने भीड़ पर पिलेट गन के इस्तेमाल पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि सरकार ने कश्मीर की ताजा समस्या को अनदेखा किया है।
जेडीयू सांसद शरद यादव ने कहा कि कश्मीर पर केंद्र सरकार की चुप्पी कष्टकारी है। उन्होंने प्रधानमंत्री से इस मुद्दे पर बयान देने की मांग की। विपक्ष के हमले के जवाब में संसदीय कार्य राज्यमंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि सदन में कश्मीर पर एक बार चर्चा हो चुकी है।
अगर विपक्ष फिर चर्चा कराना चाहती है तो सरकार को कोई एतराज नहीं होगा। इस बैठक के बाद जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती और राजनाथ सिंह ने गृह मंत्रालय में वहां के हालात पर करीब दो घंटे बातचीत की। हिजबुल मुजाहिद्दीन आतंकी बुरहान बानी के मारे जाने के नाम पर फैली हिंसा के बाद महबूबा पहली बार दिल्ली में हैं।