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'असली मुद्दा महिला आरक्षण नहीं परिसीमन था': जयराम रमेश ने सरकार की नीयत पर उठाए सवाल, कहा- सरकार पर भरोसा नहीं
Mon, 20 Apr 2026 11:43 AM IST
Riya Dubey
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Riya Dubey
Updated Mon, 20 Apr 2026 11:43 AM IST
सार
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने संसद के विशेष सत्र को लोकतंत्र, संविधान और संघीय ढांचे की जीत बताया। उन्होंने कहा कि असली मुद्दा महिला आरक्षण नहीं, बल्कि परिसीमन था। रमेश ने महिला आरक्षण बिल को देर से लागू करने पर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए और कहा कि लोकसभा सीटों व राज्यों की हिस्सेदारी पर बिल में स्पष्टता नहीं है।
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कांग्रेस सांसद जयराम रमेश
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र को लोकतंत्र, संविधान और संघीय ढांचे की जीत बताया। उन्होंने कहा कि इस सत्र में बुलडोजर राजनीति और परिसीमन की राजनीति को हार का सामना करना पड़ा। जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि असली मुद्दा महिला आरक्षण नहीं, बल्कि परिसीमन था।
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सरकार को इतनी जल्दबाजी क्यों थी?
उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम 22 सितंबर 2023 को सर्वसम्मति से पारित हुआ था, लेकिन इसे लागू नहीं किया गया। अब 16 अप्रैल की रात अचानक इसे अधिसूचित किया गया। उन्होंने सवाल किया कि सरकार को इतनी जल्दबाजी क्यों थी और इसके पीछे क्या मंशा है।
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सरकार की नीयत पर उठाए सवाल
जयराम रमेश ने कहा कि लोकसभा की मौजूदा सदस्य संख्या 543 है, लेकिन संवैधानिक विधेयक में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि राज्यों की हिस्सेदारी अनुपातिक रूप से बढ़ाई जाएगी। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री ने सदन में यह बात कही, लेकिन बिल में इसका कोई उल्लेख नहीं है। ऐसे में सरकार की नीयत पर भरोसा करना मुश्किल है।
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जातिगत जनगणना को लेकर कंद्र पर उठाए सवाल
कांग्रेस नेता ने जातिगत जनगणना को लेकर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार यह स्पष्ट नहीं कर रही कि जाति जनगणना कैसे कराई जाएगी। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि असम और जम्मू-कश्मीर में जिस तरह परिसीमन किया गया, वह चिंताजनक है और भरोसा नहीं जगाता। उन्होंने पूछा कि सरकार जाति जनगणना से आखिर क्यों भाग रही है।महिलाएं मूर्ख नहीं है
रमेश ने महिला आरक्षण विधेयक को लेकर प्रधानमंत्री के बयान पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि महिलाएं मूर्ख नहीं हैं, वे सब कुछ समझती हैं। उन्होंने कहा कि आज पंचायतों और नगर निगमों में 15 लाख महिला प्रतिनिधि हैं और यह भाजपा की वजह से नहीं, बल्कि कांग्रेस की नीतियों का परिणाम है।रमेश ने क्या मांग की?
उन्होंने कहा कि कांग्रेस लंबे समय से महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने के पक्ष में रही है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि वर्ष 2029 से महिलाओं के लिए आरक्षण लागू किया जाए और इसमें ओबीसी व आदिवासी महिलाओं को भी शामिल किया जाए। कांग्रेस नेता ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि महिला आरक्षण का मुद्दा महिलाओं के अधिकारों से ज्यादा भाजपा के सत्ता में बने रहने और राजनीतिक संरक्षण का विषय बन गया है।
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