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Undertrial Prisoners: तकनीक और सुविधाओं के बाद भी कम नहीं हो रही विचाराधीन कैदियों की संख्या
Wed, 14 Sep 2022 07:01 AM IST
Amit Mandal
एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली।
Published by: Amit Mandal
Updated Wed, 14 Sep 2022 07:01 AM IST
सार
रिपोर्ट के अनुसार 2019 में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा से युक्त जेलों की संख्या 808 थी, जबकि 2021 में ये आंकड़ा 1102 पहुंच गया। एक साल में करीब 84 प्रतिशत की बढ़ोतरी है।
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Tihar Jail
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आधुनिक सुविधाओं के बावजूद जेलों में विचाराधीन कैदियों की संख्या कम नहीं हो रहीं। इंडिया जस्टिस रिपोर्ट (आईजेआर) के अनुसार जेलों में वीडियो कांफ्रेंसिंग तकनीक के इस्तेमाल के बाद भी जेल में बंदी बने रहने की औसत समयसीमा में कोई कमी नहीं आई है। इन सुविधाओं के बाद भी ट्रायल की अवधि में कमी नहीं आई है।
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एक साल में करीब 84 प्रतिशत की बढ़ोतरी
रिपोर्ट के अनुसार 2019 में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा से युक्त जेलों की संख्या 808 थी, जबकि 2021 में ये आंकड़ा 1102 पहुंच गया। एक साल में करीब 84 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। देश के 13 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की 100 प्रतिशत, जबकि 4 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की आधे से कम जेलों में ये तकनीक मौजूद है। लक्षद्वीप की किसी भी जेल में ये सुविधा मौजूद नहीं है। देश की सभी 1,319 जेलों में कैदियों की संख्या दिसंबर 2020 में 4,88,511 थी, वहीं 2021 में बढ़कर 5,54,034 हो गई।
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इस दौरान कोविड-19 की दूसरी घातक लहर के बावजूद जेलों में कैदियों की कुल संख्या 118 से बढ़कर 130 प्रतिशत हो गई। देश में लगभग 10 में 8 कैदी ट्रायल खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं। इंडिया जस्टिस रिपोर्ट (आईजेआर) राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो द्वारा प्रकाशित किये जाने वाले आंकड़ों का सूक्ष्म अध्ययन करता है और उसके आधार अपना विश्लेषण देता है।
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जेलों में क्षमता से ज्यादा कैदी
आईजेआर ने बताया, 2020 में 54,287 (14.6 प्रतिशत) विचाराधीन कैदियों ने जेल में एक से दो साल का समय बिताया, जबकि 2021 में 56,233 (13.16 प्रतिशत) विचाराधीन कैदियों ने इतना ही समय जेल में बिताया। आईजेआर की वार्षिक रिपोर्ट को टाटा ट्रस्ट प्रकाशित करता है। ये उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के आधार पर न्याय प्रदान करने की राज्यों की क्षमता का आंकलन करती है। विश्लेषण के अनुसार, दिसंबर 2021 में देश के 36 राज्यो/केंद्र शासित प्रदेशों में से 19 में जेलों में क्षमता से 185 से 100.2 प्रतिशत अधिक कैदियों को रखा गया है। औसतन जेलों में कुल कैदियों की संख्या का 77 प्रतिशत विचाराधीन कैदियों का होता है और 2010 से इनकी संख्या दोगुनी हो चुकी है।
दिल्ली में हर 10 से 9 कैदी अंडरट्रायल
5 सालों से ज्यादा समय से जेलों में बंद विचाराधीन कैदियों की सबसे बड़ी संख्या उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में है। दिल्ली की जेलों में 91 प्रतिशत हिस्सा विचाराधीन कैदियों का है। यानि की जेल में बंद हर 10 में 9 कैदी अंडरट्रायल हैं। देश में हुए 24,033 अंडरट्रायल को पूरा होने में 3 से 5 वर्ष का समय लगा जबकि 11,490 में 5 साल से भी अधिक का समय लग गया। जेल में बंद कैदियों में ज्यादातर गरीब और अशिक्षित हैं, जबकि इनमें मुसलमानों, दलितों और आदिवासियों का बहुत बड़ा हिस्सा है।