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Report: भारत की जलवायु नीति का दिख रहा असर, रिपोर्ट में दावा- 2030 तक चार अरब टन कम हो जाएगा कार्बन उत्सर्जन
Thu, 07 Nov 2024 06:11 PM IST
बशु जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: बशु जैन
Updated Thu, 07 Nov 2024 06:11 PM IST
सार
ऊर्जा, पर्यावरण और जल काउंसिल (सीईईडब्ल्यू) ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि भारत की नीतियों के चलते 2015 से 2020 के बीच ऊर्जा, आवासीय और परिवहन क्षेत्र में 44 करोड़ टन कार्बन उत्सर्जन कम हुआ है।
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कार्बन उत्सर्जन (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : freepik.com
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विस्तार
भारत की मौजूदा जलवायु नीति असर दिखाने लगी है। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस नीति के चलते 2020 से 2030 तक भारत चार अरब टन कार्बन का उत्सर्जन कम करेगा। साथ ही कोयला आधारित बिजली उत्पादन 24 फीसदी तक कम हो जाएगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्लासगो में कॉप 26 के दौरान भारत ने यह प्रतिबद्धता जताई थी कि वह 2030 तक एक अरब टन कार्बन उत्सर्जन कम कर देगा।
दिल्ली की एक स्वतंत्र थिंक टैंक ऊर्जा, पर्यावरण और जल काउंसिल (सीईईडब्ल्यू) ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि भारत की नीतियों के चलते 2015 से 2020 के बीच ऊर्जा, आवासीय और परिवहन क्षेत्र में 44 करोड़ टन कार्बन उत्सर्जन कम हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अकेले ऊर्जा क्षेत्र में ही नवीकरणीय ऊर्जा नीति को बढ़ावा दिए जाने के चलते कोयला आधारित बिजली उत्पादन में 2030 तक 24 फीसदी गिरावट आएगी। यह 80 गीगावाट के उन कोयला आधारित पावर प्लांट के बराबर है, जो बढ़ती बिजली की मांग को पूरा करने के लिए बनाए जाते हैं। मौजूदा समय में भारत में 71 फीसदी बिजली कोयले से बनती है।
वहीं रणनीतिक समर्थन और प्रतिस्पर्धी निविदाओं के सहयोग से भारत के ऊर्जा मिश्रण में संयुक्त सौर और पवन ऊर्जा की हिस्सेदारी 2030 तक 26 प्रतिशत और 2050 तक 43 प्रतिशत तक बढ़ने का अनुमान है। जो 2015 में केवल तीन प्रतिशत तक सीमित थी। इस बदलाव से कोयले पर निर्भरता कम होगी। जिससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके बावजूद 2070 तक जीरो कार्बन उत्सर्जन के लिए प्रभावी कार्रवाई करनी होगी।
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सीईईडब्ल्यू के सीईओ अरुणाभ घोष ने कहा कि भारत ने पिछले दशक में जलवायु के क्षेत्र में जबरदस्त नेतृत्व का प्रदर्शन किया है। इसमें नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार से लेकर नीतियों के माध्यम से ऊर्जा दक्षता और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को आगे बढ़ाना शामिल है। इससे न केवल ऊर्जा मिश्रण में विविधता आई है और ऊर्जा सुरक्षा दोगुनी हो गई है, बल्कि नए बाजार भी खुले हैं और कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में भी उल्लेखनीय कमी आई है।
रिपोर्ट के मुताबिक परिवहन क्षेत्र में 2030 तक इलेक्ट्रिक दोपहिया और चार पहिया वाहनों की बिक्री क्रमशः 19 प्रतिशत और 11 प्रतिशत हो सकती है। इससे इस दशक में तेल और गैस की मांग में 13 प्रतिशत की कमी आ सकती है। वहीं 2050 तक दोनों इलेक्ट्रिक वाहनों की श्रेणियों के लिए ये आंकड़े 65 प्रतिशत के पार जाने की उम्मीद है। इससे तेल और गैस की मांग में 55 प्रतिशत की कमी आएगी।
एयर कंडीशन से बिजली की खपत बढ़ेगी
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के घरों में एयर कंडीशनिंग से संबंधित बिजली की खपत 2020 और 2030 के बीच दोगुनी हो जाएगी। इसके 2050 तक लगभग 10 गुना तक बढ़ने का अनुमान है। इसका कारण अधिक गर्मी के साथ ही लोगों की बढ़ती आय होगी। इसके अलावा बिजली की कीमतें भी कम होंगीं।
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दिल्ली की एक स्वतंत्र थिंक टैंक ऊर्जा, पर्यावरण और जल काउंसिल (सीईईडब्ल्यू) ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि भारत की नीतियों के चलते 2015 से 2020 के बीच ऊर्जा, आवासीय और परिवहन क्षेत्र में 44 करोड़ टन कार्बन उत्सर्जन कम हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अकेले ऊर्जा क्षेत्र में ही नवीकरणीय ऊर्जा नीति को बढ़ावा दिए जाने के चलते कोयला आधारित बिजली उत्पादन में 2030 तक 24 फीसदी गिरावट आएगी। यह 80 गीगावाट के उन कोयला आधारित पावर प्लांट के बराबर है, जो बढ़ती बिजली की मांग को पूरा करने के लिए बनाए जाते हैं। मौजूदा समय में भारत में 71 फीसदी बिजली कोयले से बनती है।
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वहीं रणनीतिक समर्थन और प्रतिस्पर्धी निविदाओं के सहयोग से भारत के ऊर्जा मिश्रण में संयुक्त सौर और पवन ऊर्जा की हिस्सेदारी 2030 तक 26 प्रतिशत और 2050 तक 43 प्रतिशत तक बढ़ने का अनुमान है। जो 2015 में केवल तीन प्रतिशत तक सीमित थी। इस बदलाव से कोयले पर निर्भरता कम होगी। जिससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके बावजूद 2070 तक जीरो कार्बन उत्सर्जन के लिए प्रभावी कार्रवाई करनी होगी।
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सीईईडब्ल्यू के सीईओ अरुणाभ घोष ने कहा कि भारत ने पिछले दशक में जलवायु के क्षेत्र में जबरदस्त नेतृत्व का प्रदर्शन किया है। इसमें नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार से लेकर नीतियों के माध्यम से ऊर्जा दक्षता और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को आगे बढ़ाना शामिल है। इससे न केवल ऊर्जा मिश्रण में विविधता आई है और ऊर्जा सुरक्षा दोगुनी हो गई है, बल्कि नए बाजार भी खुले हैं और कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में भी उल्लेखनीय कमी आई है।
रिपोर्ट के मुताबिक परिवहन क्षेत्र में 2030 तक इलेक्ट्रिक दोपहिया और चार पहिया वाहनों की बिक्री क्रमशः 19 प्रतिशत और 11 प्रतिशत हो सकती है। इससे इस दशक में तेल और गैस की मांग में 13 प्रतिशत की कमी आ सकती है। वहीं 2050 तक दोनों इलेक्ट्रिक वाहनों की श्रेणियों के लिए ये आंकड़े 65 प्रतिशत के पार जाने की उम्मीद है। इससे तेल और गैस की मांग में 55 प्रतिशत की कमी आएगी।
एयर कंडीशन से बिजली की खपत बढ़ेगी
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के घरों में एयर कंडीशनिंग से संबंधित बिजली की खपत 2020 और 2030 के बीच दोगुनी हो जाएगी। इसके 2050 तक लगभग 10 गुना तक बढ़ने का अनुमान है। इसका कारण अधिक गर्मी के साथ ही लोगों की बढ़ती आय होगी। इसके अलावा बिजली की कीमतें भी कम होंगीं।