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कोर्ट ने कहा कि जो व्यक्ति पैसा वापस चाहता है, उसे वापस किया जाए
ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 28 Jul 2016 02:09 AM IST
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Supreme Court hearing on Saturday
- फोटो : Getty Images
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सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन(एनबीसीसी) को नोएडा एक्सप्रेस-वे स्थित रियल इस्टेट डवलपर्स की एमराल्ड कोर्ट सोसायटी के दो टावरों का निरीक्षण कर यह बताने के लिए कहा है कि क्या इनका निर्माण नियमों के अनुरूप किया गया है या नहीं? साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि जो खरीदार पैसा वापस चाहता हो उसे वापस करना होगा।
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न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति रोर्हिंग्टन एफ नरीमन की पीठ ने एनबीसीसी को एमराल्ड कोर्ट सोसायटी का निरीक्षण कर चार हफ्ते के भीतर रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा है। एनबीसीसी यह निरीक्षण करेगा कि क्या निर्माण नियमों के तहत हुआ है या नहीं। एनबीसीसी यह भी देखेगा कि क्या वहां नियम के तहत हरित क्षेत्र है। क्या एमराल्ड कोर्ट की दो टावरों के बीच उतनी दूरी है, जितना नियम के तहत होना चाहिए। शीर्ष अदालत अब छह सितंबर को इस मामले पर सुनवाई करेगी।
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सुनवाई के दौरान दो खरीदारों की ओर से कहा गया है कि उन्हें फ्लैट नहीं चाहिए, उन्हें पैसा वापस किया जाए। हालांकि 40 खरीदारों की ओर से कहा गया कि उन्हें फ्लैट चाहिए। इस पर पीठ ने सुपरटेक को नोटिस जारी किया है। पीठ ने टिप्पणी की कि जो खरीदार अपना पैसा वापस लेना चाहता हो तो उसे पैसा वापस लौटाया जाना चाहिए।
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पीठ ने कहा कि ऐसे लोग मामले में क्यों उलझे रहें। सुपरटेक की ओर से कहा गया कि इन दोनों टावरों का निर्माण नियमों के अनुरूप हुआ है। उन दो टावरों के बीच की दूरी नौ मीटर है जो नियम केअनुरूप है। पिछली सुनवाई में सुपरटेक की ओर से कहा गया था कि करीब 150 खरीदारों को पैसे वापस लौटाए जा चुके हैं।
मालूम कि अप्रैल 2014 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एमराल्ड कोर्ट सोसायटी केदो टावरों को अवैध बताते हुए ढहाने का निर्देश दिया था। साथ ही फ्लैट खरीदने वालों को 14 फीसदी ब्याज केसाथ रकम वापस करने का निर्देश दिया गया था।
हाईकोर्ट केइस फैसले को नोएडा अथॉॅरिटी, सुपरटेक आदि की ओर से सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी, जिस पर सुप्रीम कोर्ट टावरों को गिराने के आदेश पर रोक लगाते हुए यथास्थिति बहाल रखने का आदेश दिया था। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने सुपरटेक से कहा था कि पहले वह पांच करोड़ रुपये जमा करें, तब इस मामले की सुनवाई होगी।