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1990 के युद्ध में कुवैत से 1 लाख से ज्यादा भारतीयों को निकालने का सबसे बड़ा अभियान

Mon, 14 Aug 2017 11:14 AM IST
amarujala.com- Written by: हरेन्द्र सिंह मोरल
amarujala.com- Written by: हरेन्द्र सिंह मोरल Updated Mon, 14 Aug 2017 11:14 AM IST
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The Biggest campaign to remove more than 1 lakh Indians from Kuwait in the 1990 war
1990 में कुवैत का युद्ध

2 अगस्त 1990 को अचानक कुवैत में रह रहे भारतीयों को पता चला कि इराक ने इस मुल्क पर हमला कर दिया है। अपने देश से हजारों मील दूर इस खाड़ी मुल्क में रह रहे भारतीयों पर तो जैसे अचानक पहाड़ टूट गया। इराक से कुवैत की दूरी कुछ ज्यादा नहीं थी और उसकी हैसियत भी इतनी नहीं थी कि वह सद्दाम की सेना के सामने खड़े होने की हिम्मत कर सके।

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नतीजतन कुछ घंटों में ही कुवैत के सुरक्षाबल भाग खड़े हुए, और वहां के शासक रहे अमीर भी जनता को उनके हाल पर छोड़कर सुरक्षित ठिकानों की ओर निकल गए। शाम होते-होते कुवैत की सड़कों पर इराकी रिपब्लिकन गार्ड दिखाए देने लगे। हर तरफ हथियारबंद इराकी गार्डों को देख कुवैत के स्‍थानीय लोगों में दशहत तारी हो गई, इनमें भारतीय समुदाय के लोग भी बड़ी संख्या में थे। एक अनुमान के मुताबिक उस समय कुवैत में पौने दो लाख के करीब भारतीय रह रहे थे।
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इनमें से ज्यादातर लोग वहां नौकरीपेशा थे जो कुवैत के उद्योगों में काम करते थे। हालांकि इराकी गार्डों ने किसी को कोई खास नुकसान नहीं पहुंचाया लेकिन उनकी दहशत हर तरफ थी। वो आने जाने वालों को टोक रहे थे, नतीजतन युद्ध के इस माहौल में लोग घरों और दफ्तरों में ही कैद होकर हर गए। कुवैत के अमीरों के देश छोड़ने के बाद इस बात की संभावना भी कम ही थी कि यहां हालात जल्दी सुधरेंगे क्योंकि सद्दाम हुसैन ने कुवैत को अपने देश का हिस्सा मानते हुए यहां इराकी शासन की घोषणा कर दी थी।
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इसके लिए उसने अपने चचेरे भाई अली हसन अल-माजिद जिसे केमिकल अली भी कहा जाता था उसे कुवैत का नया गर्वनर नियुक्त कर दिया। इसी बीच कुवैत में फंसे भारतीयों को निकालने के लिए तत्कालीन चंद्रशेखर सरकार ने कदम उठाया। इस काम की जिम्मेदारी सौंपी गई तत्कालीन विदेश मंत्री इंद्र कुमार गुजराल को, जो तुरंत इस मुद्दे पर सक्रिय हुए और इराक के राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन से जेद्दा में मुलाकात की। हालांकि यहां एक गुमनाम भारतीय अरबपति की भूमिका का भी जिक्र किया जाता है जो कुवैत में रह रहा था।

कहा जाता है उसी ने दोनों नेताओं की मुलाकात कराई और इसके बाद ही कुवैत से 1.70 लाख भारतीयों को निकालने के अभियान की शुरूआत हुई। इसी व्यक्ति के ऊपर ही कुछ दिन पहले अक्षय कुमार की फिल्म 'एयरलिफ्ट' आई थी जिसमें उन्होंने रंजीत कात्याल की भूमिका निभाई। फिल्म में दावा किया गया कि रंजीत कात्याल ने ही अकेले दम प्रयास कर 1.70 लाख भारतीयों को एयर इंडिया की मदद से एयर लिफ्ट किया था।

हालांकि, इस बात के आज तक कोई पुख्ता प्रमाण नहीं मिले हैं, उस अभियान को भारतीय विदेश मंत्रालय और कुवैत में मौजूद भारतीय दूतावास के अधिकारियों का सामूहिक प्रयास माना गया था। जिसमें पहले सभी भारतीयों को सुरक्षित जार्डन सीमा पर पहुंचाया गया और उसके बाद अगस्त से अक्टूबर तक 60 दिनों के अभियान में भारतीय एयरलाइंस 'एयर इंडिया' के विमानों ने रात दिन एक करते हुए कुल 500 उड़ाने भरी थीं जिनमें अधिकतर भारतीयों को कुवैत से निकालने में सफलता मिली।


कुछ लोगों को दूसरे देशों के रास्ते भी निकाला गया और कुछ ने अपने निजी प्रयासों से भी कुवैत से बाहर निकलने में सफलता पाई। एयर इंडिया और विदेश मंत्रालय के इस अभियान को पूरी दुनिया में सराहा गया और एक साथ इतने लोगों को एयरलिफ्ट करने के कारण इसे 'गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड' में जगह दी गई। दुनिया ने पहली बार भारत की इस अनोखी ताकत को देखा जो हर किसी को हतप्रभ कर गई।


 
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