पद्मिनी के चित्रों में झलकता है प्रकृति का सौंदर्य
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जन्म से लेकर मृत्यु तक हमारे जीवन में पेड़ों का काफी महत्व है। प्रकृति से ही जीवन मिलता है और अंततः इंसान प्रकृति में ही विलीन हो जाता है। इसलिए मेरी पेंटिंग में पेड़-पौधे और प्रकृति की छाया दिखाई देती है। यह कहना है कि वरिष्ठ चित्रकार पद्मिनी मेहता का, जिनकी पेंटिंग की प्रदर्शनी इन दिनों सुंदर नगर स्थित स्टूडियो 55, कैफे एंड आर्ट गैलरी में लगी हुई है। यहां इनके अलावा सात अन्य कलाकारों की भी चित्र प्रदर्शनी लगी है। यह प्रदर्शनी 11 मई तक चलेगी।
अपने जीवन को कला के लिए समर्पित कर चुकी पद्मिनी कहती हैं, इस पेंटिंग प्रदर्शनी का नाम है जर्नी यानी यात्रा है। जैसे मानव जीवन की यात्रा की शुरुआत से अंत तक प्रकृति पर ही निर्भर है। हमारा बचपन पेड़-पौधों के आसपास गुजरा। जैसे-जैसे बड़े होते गए, इनका सानिध्य छूटता गया। प्रकृति हमसे दूर होती गई, लेकिन हम यह भूल गए कि प्रकृति से दूर होते जाना ही जीवन से दूर होते जाना है। जैसे-जैसे इंसान प्रकृति से दूर होता जाता है, हमारा जीवन उतना ही नारकीय होता जाता है।
यह बात बहुत बाद में समझ आती है और जब तक समझ आती है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। देखिए, आज हम उसकी मार झेल रहे हैं। एक चित्रकार होने के नाते बस मैं अपनी पेंटिंग के माध्यम से यही बात समझाना चाहती हूं। कोशिश कर रही हूं, कितनी कामयाब होउंगी, यह तो समय ही बताएगा। पिछले 15 वर्षों से चित्रकला के माध्य से देश और दुनिया में अनेकों शो कर चुकीं पद्मिनी की काफी तारीफ हो रही है, कहती हैं- कलाकार तो बस अपने अंदर की भावनाओं को व्यक्त करता है, अपने अंदर की भावनाओं को जीता है। जो अंदर ऊपजते हैं, वही कूंची से उकेर भर देता है।
‘जर्नी’ प्रदर्शनी में पद्मिनी के उनके अलावा प्रसिद्ध चित्रकार दिपाली अपने रंगों के माध्यम से दर्शकों का ध्यान खींच रही हैं। बेहतरीन रंगों का संयोजन किया है। कुछ नया प्रयोग करते रहना दीपाली जी की विशेषता है। इसी तरह से कमल देवनाथ के रंगों की छटा यहां बिखरी हुई है। उनके मनमोहक रंग, एकाएक ही दर्शकों को अपनी ओर खींचते हैं। स्कल्पचर (मूर्तिकला) के लिए प्रसिद्ध असुरवेद की मूर्ति कला को दूर से देखकर एक बारगी तो दर्शक, उंगली मुंह में दबा लेता है। बेहतरीन ढंग से तरासे गए मूर्तिकला को देखकर मन रोमांचित हो जाता है।
निवेदिता की पेंटिंग में दूर तक फैले रंगों का सामंजस्य देखते ही बनता है। पूरा कैनवास ही सजीव हो उठता है, उनके रंगों से। मानव मन और मानव चिंतन को दर्शाती शशि त्रिपाठी के चित्र आपको किसी ओर ही दुनिया में ले जाते हैं। उनका चिंतन और उनका मनन का विषय मानव मन और उनमें उमडते-घुमडते विचारों का कला रूप है। रंगों को सजीव ढंग से कैनवास पर उकेरकर विषय को समझाने में माहिर विजया वेद, की कलाकृतियां आपको प्रकृति और अध्यात्म को संग-संग लेकर चलती हैं। आपके मन में बरबस ही बहुत से खयाल आने लगते हैं, आंखों के रास्ते। हर रंग अपनी बात कहने में सक्षम है।
जर्नी प्रदर्शनी के संयोजक किशोर लाबर कहते हैं, यह प्रदर्शनी जर्नी की पहली यात्रा है। इसे 15 यात्राओं तक ले जाने का विचार है। इसके साथ-साथ बहुत सी गतिविधियों को जोड़ते हुए कला को और आगे ले जाना चाहते हैं। यह प्रदर्शनी 11 मई तक, चलेगी। अगर आपको भी रंग और कैनवास से प्यार है। कुछ नया देखने और आंखों की पुतलियों में नया रंग भरने की तमन्ना रखते हैं, तो आप स्टूडियो 55, कैफे एंड आर्ट गैलरी, सुंदर नगर जा सकते हैं।