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अस्पतालों की मनमानी वसूली पर लगेगी रोक, स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों को दिए निर्देश

Thu, 18 Jun 2020 06:29 AM IST
संजीव कुमार झा परीक्षित निर्भय, अमर उजाला , नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, अमर उजाला , नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Thu, 18 Jun 2020 06:29 AM IST
सार

  • दिल्ली, मुंबई सहित कई राज्यों से मनमानी कीमतों की सामने आ रही घटनाएं
  • दिल्ली में दो घंटे उपचार करने पर मरीज से वसूले पीपीई किट के 10 हजार रुपये
  • राज्यों को केंद्र का आदेश, निजी अस्पतालों में मनमानी कीमतों से मिलेगा छुटकारा

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The arbitrary recovery of hospitals will be banned, Health Ministry gave instructions to states
डॉ हर्षवर्धन (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई

विस्तार

दिल्ली के पश्चिम विहार निवासी 74 वर्षीय रमेश चंद्र बंसल को सांस लेने में तकलीफ के बाद परिजनों ने निजी अस्पताल में भर्ती कराया। महज दो घंटे के इलाज में अस्पताल ने बतौर पीपीई किट 10 हजार रुपये वसूल लिए। मरीज की तीन दिन पहले मौत हो गई। इसी तरह, दिल्ली की साइमा फुरकान ने अपने दादा को निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। करीब 30 दिन बाद अस्पताल ने उन्हें 122 पेज का बिल देते हुए 16,14,596 रुपये के भुगतान करने को कहा। इस बिल में प्रतिदिन पीपीई किट के 10 हजार रुपये लिए गए। प्राइवेट अस्पतालों की मनमानी के ऐसे कई केस अब तक सामने आ चुके हैं।

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इस पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सोमवार को सभी राज्यों को निर्देश जारी कर निजी अस्पतालों की मनमानी रोकने को लेकर सख्त कदम उठाने को कहा है। मंत्रालय ने कहा, राज्य तमिलनाडु और तेलंगना की तरह इलाज की दरें तय करते समय निजी सुरक्षा उपकरणों जैसे पीपीई किट की लागत पर भी ध्यान दें। दरें तय किए जाने के बाद इनका व्यापक स्तर पर प्रचार किया जाए ताकि मरीजों व सेवाप्रदाताओं को इन दरों की पूरी जानकारी मिल सके। ऐसा करने से कोरोना मरीजों को त्वरित और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं वाजिब दर पर प्रदान करने में मदद मिलेगी।
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फिक्की और प्राइवेट अस्पतालों के संगठन एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स (एएचपीआई) के अध्यक्ष डॉ. अलेक्जेंडर थॉमस के अनुसार निजी अस्पतालों में उपचार लागत को लेकर पारदर्शिता न होने के मामले सामने आए जिसके बाद 21 राज्यों में उनके सदस्य अस्पतालों के साथ बैठकर कीमतें एक समान रखने का फैसला लिया। वहीं फिक्की स्वास्थ्य सेवा समिति के अध्यक्ष डॉ. आलोक रॉय का कहना है कि कोविड इलाज के खर्चों को तर्कसंगत बनाना मुश्किल है।
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फिक्की व प्राइवेट अस्पतालों का संगठन भी कर चुका है कीमत तय...फिर भी नहीं दिखा असर

  • 40 हजार से अधिक का न हो बिल

एएचपीआई ने अलग अलग बयान जारी करते हुए निजी अस्पतालों को कोविड उपचार की कीमतें समान रखने की सलाह दी थी। इसमें कहा गया था कि प्रतिदिन 40 हजार रुपये से अधिक का बिल नहीं लिया जाए। सामान्य, ऑक्सीजन और आईसीयू बेड की अलग अलग कीमतें भी बताई गई थीं लेकिन इसके बाद भी मनमानी कीमतें वसूलने की शिकायतें कम नहीं हुईं।

जांच की कीमतें भी नहीं हुईं कम

इसी तरह 25 मई को भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक डॉ. बलराम भार्गव ने सभी राज्यों से कोविड जांच की कीमतें कम करने का सुझाव दिया था लेकिन अभी तक तमिलनाडु, तेलंगाना और महाराष्ट्र कीमतें कम करने की घोषणा कर चुके हैं। वहीं दिल्ली में एक दिन पहले टेस्ट की कीमत कम करने का फैसला किया गया। फिलहाल ज्यादात्तर राज्यों में निजी लैब में जांच के लिए 4500 रुपये लिए जा रहे हैं।

  • राज्यों के पास है अधिकार, कीमत होनी चाहिए तय

राष्ट्रीय फॉर्मास्युटिकल मूल्य प्राधिकरण (एनपीपीए) के पूर्व चैयरमेन भूपेंद्र सिंह का कहना है कि पीपीई, सैनिटाइजर, ग्लव्स और मास्क जैसे उत्पादों की कीमतों पर तत्काल नियंत्रण की आवश्यकता है। क्लीनिकल एस्टेबलिस्टमेंट एक्ट के तहत राज्य सरकारों के पास जांच और उपचार दोनों की कीमतें तय करने का अधिकार है।

  • तमिलनाडु ने सबसे पहले कर दिखाया

देश में सबसे पहले तमिलनाडु ने कोविड के सामान्य व गंभीर मामलों को लेकर अस्पतालों में कीमतें तय करने का फैसला लिया। चार अलग अलग ग्रेड में अस्पतालों की छंटनी करते हुए राज्य सरकार ने कोविड के सामान्य मरीजों के लिए प्रतिदिनि 5 हजार रुपये और गंभीर कोरोना मरीजों के लिए अधिकतम 15 हजार रुपये प्रतिदिन ही लिए जाने को अनिवार्य किया। वहीं संक्रमण की जांच के लिए 2500 रुपये तय किए। अगर घर बैठे जांच चाहिए तो उसके 500 रुपये अतिरिक्त तय किए गए।

  • राज्यों के पास है रेट कार्ड : मंत्रालय

स्वास्थ्य मंत्रालय के एक निदेशक बताते हैं कि राज्यों के पास सीजीएचएस और प्रधानमंत्री जनआरोग्य योजना के तहत उपचार रेट कार्ड उपलब्ध है। चूंकि स्वास्थ्य राज्य का विषय है ऐसे में राज्य सरकारें इन रेट कार्ड का इस्तेमाल कोविड मरीजों के लिए उपचार कीमतें तय करने में कर सकती हैं। उन्होंने उम्मीद जताई है कि जल्द ही राज्यों में इसपर सख्त कदम उठाए जाएंगे।

  • पहली बार सबसे ज्यादा जांच

कोरोना वायरस को लेकर देश में रोजाना तीन लाख सैंपल की क्षमता विकसित होने के बाद एक दिन में सबसे ज्यादा जांच दर्ज की गई हैं।  आईसीएमआर के अनुसार बीते एक दिन में 1.63 लाख से अधिक सैंपल की जांच हुई है। अब तक देश में 60.84 लाख से ज्यादा सैंपल की जांच हो चुकी है।

 (अधिकतम राशि, फिक्की और एएचपीआई की कीमतों में पीपीई किट शामिल नहीं, तमिलनाडु में पीपीई किट, ग्लब्स, मास्क सब शामिल। वर्तमान हालात : कुछ केसेज को छोड़कर ज्यादात्तर रोगियों से लिए जाने वाली राशि।)

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