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गडकरी का उद्योगपतियों को आमंत्रण, दिल्ली-मुंबई हाईवे के पास खोलें टेक्सटाइल पार्क, सरकार करेगी मदद
Tue, 28 Jan 2020 09:47 PM IST
आसिम खान
सुरेन्द्र मिश्र, अमर उजाला, मुंबई
सुरेन्द्र मिश्र, अमर उजाला, मुंबई
Published by: आसिम खान
Updated Tue, 28 Jan 2020 09:47 PM IST
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नितिन गडकरी (फाइल फोटो)
- फोटो : एएनआई
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केंद्रीय सूक्ष्म व लघु उद्योग (एमएसएमई) मंत्री नितिन गडकरी ने बस्त्र उद्योग से जुड़े उद्योगपतियों को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे के आसपास टेक्सटाईल पार्क खोलने के लिए आमंत्रण दिया है। उन्होंने कहा कि यह एक्सप्रेस-वे तीन साल में बनकर तैयार हो जाएगा। यहां उद्योग लगाने में सरकार उनकी पूरी मदत करेगी। कपड़ा कारोबार की प्रमुख संस्था भारत मर्चेंट्स चेम्बर की हीरक जयंती समारोह में उन्होंने उद्योगपतियों को संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही।
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केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे की टेक्सटाइल उद्योग में अहम भूमिका होगी क्योंकि यह एक्सप्रेस-वे दिल्ली और मुंबई के बीच एक नए अलाइनमेंट के साथ विकसित किया जा रहा है, जो हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात के पिछड़े और जनजातीय जिलों से गुजरता है। यहां जमीन सस्ती है, मजदूरी कम है और बेहतर माहौल मिल रहा है। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे परियोजना पूरी होने पर दिल्ली- मुंबई का सफर 12 घंटे में किया जा सकेगा।
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एमएसएमई पांच साल में देगा पांच करोड़ रोजगार
गडकरी ने कहा कि एमएसएमई सेक्टर आने वाले वर्षों में रोजगार का बड़ा क्षेत्र बनकर उभरने वाला है। यह क्षेत्र अगले पांच वर्षों में पांच करोड़ नए रोजगार देगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का आकार देने की दिशा में काम कर रहे हैं। एमएसएमई सेक्टर इसमें अहम योगदान देगा। फिलहाल, ग्रामीण उद्योगों का सालाना टर्नओवर 75 हजार करोड़ का है, इसे इस साल तक एक लाख करोड़ करेंगे।
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करो में छूट नहीं नीतियों में सरलीकरण चाहते हैं कारोबारी: लोहिया
चेंबर के अध्यक्ष विजय कुमार लोहिया ने कहा कि बार-बार कानून में हुए बदलाव ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग कारोबारियों की कमर तोड़ दी है। सबसे ज्यादा पीड़ा श्रम कानून से मिल रही है जिसके कारण बांग्लादेश भी हमसे आगे निकल गया है। कारोबारी सरकार से करों में छूट नहीं बल्कि नीतियों में सरलीकरण चाहते हैं।
विश्व बाजार में हिस्सेदारी बढ़ाने की चुनौती: पोद्दार
सियाराम सिल्क मिल्स के चेयरमैन रमेश पोद्दार ने कहा कि समस्याएं हैं, लेकिन विदेशी कंपनियां हमारे यहां बेहतर कारोबार कर रही हैं। हमारे पास सबसे बड़ा बाजार उपलब्ध है, कच्चा माल भी है। हमें वैश्विक बाजार में 5-6 फीसदी से बढ़ाकर 8-9 फीसदी हिस्सेदारी बढ़ाने की चुनौती स्वीकार करनी होगी।