जम्मू-कश्मीर में अपने पूर्ण खात्मे की ओर जा रहा है आतंकवाद, अब युवा नहीं हो रहे गुमराह!

जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 08 Jun 2020 07:59 PM IST
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encounter jammu kashmir - फोटो : अमर उजाला (सांकेतिक)

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सार

पाक समर्थित अलगाववादी संगठन यहां झूठ का प्रचार करते हैं। वे अपने दुष्प्रचार में भोले-भाले युवाओं को फंसा लेते थे। अब उन्हें जनता से बहुत ज्यादा समर्थन नहीं मिल रहा है। लोग भी चाहते हैं कि वे हिंसा के इस चक्र से बाहर निकल कर विकास की मुख्यधारा में शामिल हों...

विस्तार

जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद अपने पूर्ण खात्मे की ओर जा रहा है। मौजूदा समय में सुरक्षा बल आत्मविश्वास और बहादुरी से लबरेज हैं। एक-एक कर टॉप आतंकवादी भारतीय सुरक्षा बलों की गोलियों का निशाना बन रहे हैं। जेएंडके के डीजी दिलबाग सिंह ने कहा, सुरक्षा बलों ने 14 दिन में 22 आतंकी ढेर कर दिए हैं।
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दो दिन में 9 आतंकी मारे गए, जिनमें से 6 टॉप कमांडर थे। ये सभी 9 आतंकवादी हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े थे। सेना, सीआरपीएफ और पुलिस की मानें तो अब पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद लंबा नहीं चलेगा।
स्थानीय युवा अब आतंकियों का घिनौना चेहरा समझने लगे हैं। वे इससे दूर हट रहे हैं। दस बातें गवाह हैं, जो यह साबित कर रही हैं कि अब कश्मीर में आतंकियों के दिन गिनती के ही बचे हैं।
 
कश्मीर में आतंकियों से जुड़ी एक अहम रिपोर्ट के मुताबिक, 2019 और 2020 में आतंकियों को लेकर ट्रेंड बदल रहे हैं। पहले आतंकियों को लोकल स्पोर्ट बहुत ज्यादा मिल रही थी, लेकिन अब उसमें धीरे धीरे कमी आ रही है।

जिन युवाओं को तीन साल पहले तक आसानी से गुमराह कर उन्हें आतंकी समूहों में शामिल कर लिया जाता था, वे अब समझ रहे हैं।
 
कश्मीर में एक्सवी कोर के चीफ लेफ्टिनेंट जनरल बग्गावली सोमशेखर राजू कहते हैं, पाकिस्तान समर्थित अलगाववादी संगठन यहां झूठ का प्रचार करते हैं।

वे अपने दुष्प्रचार में भोले-भाले युवाओं को फंसा लेते थे। अब उन्हें जनता से बहुत ज्यादा समर्थन नहीं मिल रहा है। लोग भी चाहते हैं कि वे हिंसा के इस चक्र से बाहर निकल कर विकास की मुख्यधारा में शामिल हों।

आतंकवादी संगठनों में स्थानीय युवाओं की भर्ती 2018 के मुकाबले 2019 में लगभग आधी हो गई है। इस साल तो उसमें और भी ज्यादा कमी आई है।

वो दस बातें, जिनसे मालूम होगा कि अपने अंत की तरफ चल पड़े हैं आतंकवादी... 

कारण 2019           2020 (30 मई)  
हिंसात्मक वारदात 255 78
ग्रेनेड फेंकना   62 15
आईडी ब्लास्ट     11   00
रेंडम फायरिंग     64 17
एनकाउंटर /क्रॉस फायरिंग 102 42
हथियार छीनना 4 1
अपहरण       8 3
आतंकी मरे   157 89
आतंकी/सस्पेक्ट गिरफ्तार 112 116
सरेंडर       10 1
 
नोट: आतंकी वारदात में पिछले साल 44 नागरिक मारे गए थे, जबकि 193 घायल हुए थे। इस साल अभी तक 14 नागरिकों की मौत हुई है और 21 घायल हुए हैं।

खतरा केवल सीमापार से आने वाले आतंकियों का है

घाटी में इस साल लगातार चले ऑपरेशंस में टॉप आतंकियों का सफाया हो रहा है। उनके हमदर्द भी पकड़े जा रहे हैं। जम्मू-कश्मीर के डीजीपी दिलबाग सिंह के अनुसार, अब खतरा केवल सीमापार से आने वाले आतंकियों का है।

स्थानीय स्तर पर देशी विदेशी जितने भी आतंकी बचे हैं, देर-सवेर उनका खात्मा तय है। कश्मीर इलाके में लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) पर करीब ढाई सौ आतंकी हो सकते हैं।

इसके अलावा जम्मू में लगभग सवा सौ आतंकियों के सक्रिय होने की सूचना है। पीओके में बने आतंकी लॉचिंग पैड पर लंबे समय से हलचल देखी जा रही है। आतंकियों का प्रयास है कि किसी भी तरह वे सीमा पार कर जम्मू कश्मीर में पहुंच जाएं।

पाकिस्तानी सेना और आईएसआई की तरफ से पोषित नए आतंकी संगठन कई बार सिर उठाने का प्रयास कर चुके हैं, लेकिन सुरक्षा बलों की मुस्तैदी और मजबूत खुफिया नेटवर्क के चलते उनके पांव नहीं जमने दिए जा रहे।
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