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Hindi News ›   India News ›   Term ends in January, but Amit Shah to remain BJP president till 2019 Lok Sabha elections

भाजपा के बॉस की कोई नहीं छीन सकता कुर्सी, कार्यकाल होगा समाप्त फिर भी रहेंगे अध्यक्ष

Sat, 08 Sep 2018 05:45 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 08 Sep 2018 05:45 PM IST
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Term ends in January, but Amit Shah to remain BJP president till 2019 Lok Sabha elections

भाजपा में अमित शाह का कद इसी बात से आंका जा सकता है कि उनसे उनकी बॉस की कुर्सी पार्टी में कोई नहीं छीनने वाला। यूं तो अध्यक्ष पद पर उनका कार्यकाल जनवरी में ही समाप्त हो रहा है लेकिन 2019 लोकसभा चुनाव होने से पहले वो कुर्सी नहीं छोड़ने वाले।  

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पूरी पार्टी का यही मानना भी है कि अमित शाह कुर्सी पर बने रहें। पार्टी की बागडोर वही संभालें और एक बार फिर सत्ता में लौटें। पार्टी कार्यकारिणी ने तय कर लिया है कि जब तक 2019 के लोकसभा चुनाव नहीं हो जाते वो ऐसा कोई फेरबदल नहीं करने वाली। 
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भाजपा एससी/एसटी के मुद्दे पर पिछड़ी जाति का वोट अपने खाते में लाना चाहती है। और पार्टी को विश्वास है कि ऐसा अमित शाह की रणनीति से ही सफल हो सकेगा। अभी भाजपा अध्यक्ष अमित शाह तेलंगाना के महबूबनगर में 15 सितंबर को जनसभा कर चुनावों के लिए पार्टी अभियान की शुरुआत करने वाले हैं।
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भाजपा के विधान पार्षद एन रामचंद्र राव ने बताया कि पार्टी के राष्ट्रीय स्तर के नेताओं और भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के भी अभियान में शिरकत करने की संभावना है। उन्होंने बताया कि चुनाव होने तक उनके लगातार यहां आने की संभावना है।

मतलब अब अमित शाह 2019 लोकसभा के लिए पूरी तरह से कमर कसने वाले हैं। भाजपा प्रत्येक विधानसभा में जनसभा आयोजित करेगी और पार्टी केवल राज्य का घोषणापत्र ही नहीं बल्कि ‘‘स्थानीय घोषणापत्र’’ भी जारी करेगी। 

तेलंगाना भाजपा इकाई के अध्यक्ष के लक्ष्मण पहले ही पार्टी के विधानसभा चुनाव अकेले लड़ने की घोषणा कर चुके हैं। लक्ष्मण ने कहा था कि दिल्ली में शनिवार और रविवार को होने वाली पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारी बैठक में तेलंगाना चुनावों के मुद्दे पर चर्चा की जाएगी।


तेलंगाना विधानसभा चुनाव पहले अगले वर्ष लोकसभा चुनावों के साथ होने वाले थे। बहरहाल, टीआरएस सरकार की सिफारिश के बाद राज्य विधानसभा इस सप्ताह भंग कर दी गई, जिस कारण यहां समयपूर्व चुनाव जरूरी हो गए हैं। 

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