आदित्यनाथ के CM बनने से बढ़ेगी ‘मंदिर-मस्जिद’ की राजनीति: पवार
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भाजपा के खिलाफ महागठबंधन की पैरवी करने वालों में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) सुप्रीमो शरद पवार भी शामिल हो गए हैं। उन्होंने रविवार को कहा कि भाजपा का मुकाबला करने के लिए समान विचारधारा वाले दलों को साथ आने की जरूरत है। वह अहमदाबाद में एनसीपी के नए कार्यालय का उद्घाटन करने आए थे।
पवार ने कहा कि यूपी में महंत आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद ‘मंदिर-मस्जिद’ की राजनीति तेज हो सकती है। विधानसभा चुनाव में भाजपा को मिले जनसमर्थन पर नजर डालें तो यह स्पष्ट है कि उसका मुकाबला करने के लिए समान विचारधारा वाले दलों को एक साथ आना होगा। उन्होंने कहा, ‘सभी गैर-भाजपा दलों को खुद के सिमटते जनाधार पर आत्ममंथन करने की जरूरत है। सबको मिलकर भाजपा का एक मजबूत विकल्प देना होगा।’
यूपी में बढ़ेगी सांप्रदायिक राजनीति
जब उनसे पूछा गया कि क्या इस संबंध में कोई पहल हुई है तो पवार ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। ‘यह एक सलाह है। इस पर अभी कोई विस्तृत चर्चा नहीं हुई है। अगर एनसीपी के पास इस तरह के गठबंधन में शामिल होने का कोई प्रस्ताव आता है तो पार्टी इस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देगी।’ पवार को डर है कि कट्टर हिंदूवादी छवि वाले आदित्यनाथ के यूपी का सीएम बनने से राज्य में सांप्रदायिक राजनीति तेज हो सकती है।
उन्होंने कहा, ‘यूपी जैसे बड़े राज्य में विकास के एजेंडा को आगे बढ़ाने के लिए स्पष्ट नजरिए वाले नेतृत्व की आवश्यकता है। हालांकि, मैं यूपी की जनता को लेकर चिंतित हूं। राज्य का नया नेतृत्व विकास पर ध्यान देने के बजाय ‘मंदिर-मस्जिद’ के मुद्दे को ज्यादा तवज्जो दे सकता है।’