Kaleshwaram Project: न्यायिक आयोग की 1600 पन्नों की जांच रिपोर्ट तैयार, तेलंगाना के पूर्व CM-मंत्रियों के नाम
तेलंगाना की बहुचर्चित कालेश्वरम परियोजना में कथित अनियमितता की जांच के बाद न्यायिक आयोग ने 1600 पेज की रिपोर्ट तैयार की है। इसमें पूर्व सीएम केसीआर और उनके मंत्रिमंडल में शामिल लोगों के नाम शामिल हैं। रिपोर्ट में कई चौंकाने वाली बात सामने आई है। जानिए क्या है न्यायिक आयोग की रिपोर्ट
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विस्तार
सिंचाई मंत्री उत्तम रेड्डी ने पेश किया रिपोर्ट
वहीं राज्य के सिंचाई मंत्री एन उत्तम कुमार रेड्डी ने सोमवार को सचिवालय में हुई कैबिनेट बैठक में आयोग की रिपोर्ट का सारांश पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन के ज़रिए प्रस्तुत किया। रिपोर्ट के अनुसार, परियोजना की योजना, निर्माण, संचालन और रखरखाव सभी स्तरों पर केसीआर की सीधी और परोक्ष भूमिका रही है।
वहीं आयोग ने पूर्व सिंचाई मंत्री टी. हरीश राव (जो केसीआर के भतीजे हैं) पर भी सवाल उठाए हैं। सूत्रों के मुताबिक, विशेषज्ञों की एक समिति ने पहले ही इस परियोजना को शुरू न करने की सलाह दी थी, लेकिन बीआरएस सरकार ने उस रिपोर्ट को जानबूझकर दबा दिया।
बता दें कि इस आयोग का नेतृत्व पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज और पूर्व लोकपाल जस्टिस पिनाकी चंद्र घोष कर रहे थे। उन्होंने अपनी रिपोर्ट 31 जुलाई को सिंचाई विभाग के प्रमुख सचिव राहुल बोज्जा को सौंपी थी। मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने एक अगस्त को अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे इस रिपोर्ट का अध्ययन कर उसका सार कैबिनेट के सामने 4 अगस्त को पेश करें। बीआरएस पार्टी की ओर से फिलहाल इस पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है - "मेदिगड्डा, अन्नाराम और सुंडिला (कालेश्वरम परियोजना के) में बैराज बनाने का निर्णय "सिंचाई मंत्री और मुख्यमंत्री का व्यक्तिगत निर्णय" (sole and individual decision of the Minister (Irrigation) and the Chief Minister) था।
मंत्रिमंडल ने अनुमोदित नहीं किया
इस रिपोर्ट के मुताबिक इस संबंध में सरकार ने कोई औपचारिक "निर्णय" नहीं लिया। तीनों बैराजों का उल्लेख राज्य सरकार निर्णय (GOR) क्रमांक 231, 232 और 233 में 1.3.2016 को किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक बैराज निर्माण के लिए प्रारंभिक प्रशासनिक अनुमोदन न तो मंत्रिमंडल के समक्ष प्रस्तुत किया गया और न ही मंत्रिमंडल ने इसे अनुमोदित किया।
बिना DPR के बोली सरकार- कालेश्वरम परियोजना की लागत 71,436 करोड़ रुपये
तत्कालीन मुख्यमंत्री ने 11.2.2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा। इसमें कालेश्वरम परियोजना की लागत 71,436 करोड़ रुपये बताई गई थी। आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक चौंकाने वाली बात ये भी है कि सरकार ने वैपकोस (WAPCOS) की तरफ से अंतिम विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) प्रस्तुत किए जाने से पहले ही लागत करोड़ों रुपये में बता दी।
रिपोर्ट की मुख्य बातें
गौरतलब है कि रिपोर्ट कुल 665 पन्नों की है, जिसका 60 पन्नों का सारांश तैयार किया गया। सारांश में केसीआर का नाम 32 बार, हरीश राव का 19 बार और पूर्व वित्त मंत्री ईटाला राजेंद्र का 5 बार आया है। आयोग ने राजेंद्र को, जो अब भाजपा सांसद हैं, वित्तीय मामलों में लापरवाही बरतने का दोषी माना है।