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Gujarat: राज्यपाल सुंदरराजन बोलीं; उत्तर भारतीय प्रदेश गौमुद्रा प्रतिनिधि, बांटने के मंसूबे कामयाब नहीं होंगे
Fri, 08 Dec 2023 06:19 PM IST
ज्योति भास्कर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Fri, 08 Dec 2023 06:19 PM IST
सार
राजनीति में धर्म-आस्था से जुड़े बयान और विवाद का ताजा मामला तमिलनाडु से सामने आया था। डीएमके सांसद के 'गोमूत्र' वाले बयान पर बवाल के बीच तेलंगाना की राज्यपाल ने कहा, उत्तर भारतीय राज्य 'गौमुद्रा' के प्रतिनिधि हैं, न कि 'गौमूत्र' के।
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तमिलसाई सुंदरराजन
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विस्तार
तेलंगाना की राज्यपाल तमिलिसाई सुंदरराजन ने कहा कि उत्तर भारतीय राज्य 'गौमुद्रा' (गाय का पवित्र प्रतीक) का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने यह बयान द्रमुक सांसद के गोमूत्र वाले बयान पर विवाद के बीच दिया है। उन्होंने कहा कि उत्तरी भारत के प्रदेशों को 'गौमूत्र' वाले प्रदेश कहने से वह सहमत नहीं हैं। उन्होंने सुंदरराजन ने द्रमुक संसद के बयान को 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताया। बता दें कि संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत के बाद लोक सभा में द्रमुक सांसद के विवादास्पद बयान के बाद जमकर बवाल हुआ।
द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के लोकसभा सदस्य डीएनवी सेंथिल कुमार ने बीते मंगलवार को विधानसभा चुनावों में भाजपा को मिली शानदार जीत पर टिप्पणी के दौरान मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान पर विवादित टिप्पणी की थी। उन्होंने भाजपा की हालिया चुनावी जीत के मद्देनजर हिंदी भाषी राज्यों का विवादास्पद संदर्भ दिया और इन प्रदेशों को गोमूत्र राज्य करार दिया।
गुजरात दौरे पर गईं तमिलनाडु की राज्यपाल ने कहा, 'मैं तमिलनाडु से हूं और मुझे यह कहना पड़ रहा है, क्योंकि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि आजकल कुछ लोग उत्तर-दक्षिण विभाजन का उल्लेख कर रहे हैं।' उन्होंने कहा, 'मुझे वास्तव में बहुत बुरा लगा जब तमिलनाडु के ही एक सांसद ने इसका उल्लेख किया। उन्होंने (डीएमके सांसद) उत्तरी राज्यों को 'गौमूत्र' राज्य बताया और भारत के एक क्षेत्र को दक्षिणी राज्यों से अलग किया।
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राज्यपाल ने कहा, उन्हें कहना होगा कि उत्तरी भारत के राज्य 'गौमुद्रा' राज्य हैं, 'गौमूत्र' नहीं। उन्होंने कहा, वे ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि सांसदों के बयान के आधार पर ऐसे विभाजन नहीं होने चाहिए। हर प्रदेश का सम्मान होना चाहिए। राज्यपाल सुंदरराजन ने कहा, प्राचीन वर्षों में तमिलनाडु के लोग भगवान के सामने एक 'हुंडियाल' (गुल्लक) रखते थे। वे हर दिन इसमें कुछ पैसे डालते थे, ताकि इस बचाए हुए पैसे का उपयोग करके वे अपने जीवनकाल में कम से कम एक बार काशी जा सकें। ऐसे महत्व वाले शहर समेत बाकी शहरों पर विवादित टिप्पणी नहीं होनी चाहिए।
राज्यपाल सुंदरराजन ने कहा कि भारत के लोग आध्यात्मिक रूप से एकजुट हैं। उन्हें क्षेत्रीय आधार पर विभाजित करने के प्रयास स्वीकार नहीं किए जा सकते। गौरतलब है कि वर्तमान में काशी यूपी के वाराणसी के रूप में जाना जाता है। बीते दिनों सुंदरराजन ने काशी तमिल संगमम को लेकर भी सरकार के प्रयासों की सराहना की थी। बता दें कि सुंदरराजन पुडुचेरी की उपराज्यपाल भी हैं।
अहमदाबाद में विश्वविद्यालय के छात्रों और शिक्षकों से मुखातिब तेलंगाना की राज्यपाल ने कहा, "आप लोगों को कैसे विभाजित कर सकते हैं? आध्यात्मिक रूप से लोग विभाजित नहीं हैं। राजनीतिक रूप से कुछ लोग विभाजित करना चाहते हैं, लेकिन ऐसा नहीं हो सकता क्योंकि इस देश के लोग आध्यात्मिक रूप से एकजुट हैं।" उन्होंने कहा, तमिलनाडु में, लोग काशी और रामेश्वरम (दक्षिणी राज्य में मंदिर शहर) का अलग से उल्लेख नहीं करते हैं। लोग कहते हैं काशी-रामेश्वरम. क्योंकि जो भी लोग काशी आते हैं, वे अपनी आध्यात्मिक यात्रा पूरी करने के लिए रामेश्वरम भी आते हैं। और जो लोग रामेश्वरम जाते हैं, वे काशी भी जाते हैं। उत्तर-दक्षिण विभाजन को गहरा नहीं किया जाना चाहिए। उत्तर में काशी है और दक्षिण में तेनकासी (तमिलनाडु का एक शहर) है। जो विभाजन करना चाहते हैं...उनके नापाक मंसूबे सफल नहीं होंगे, क्योंकि हमारे संस्कृति हमें एकजुट करती है।
तेलंगाना की राज्यपाल ने कहा कि देश में एक मजबूत सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था की जरूरत है। उन्होंने कहा पिछले 100 वर्षों में 20,000 से अधिक मंदिर नष्ट किए गए। अब ऐसे पूजा स्थलों को विकसित किया जा रहा है। उनसे जुड़ी स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए और अधिक मंदिरों को विकसित करने की जरूरत है। सुंदरराजन ने गुजरात के पावागढ़ पहाड़ी पर कालिका माता के हाल ही में दोबारा विकसित किए गए मंदिर का उदाहरण भी दिया।
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द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के लोकसभा सदस्य डीएनवी सेंथिल कुमार ने बीते मंगलवार को विधानसभा चुनावों में भाजपा को मिली शानदार जीत पर टिप्पणी के दौरान मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान पर विवादित टिप्पणी की थी। उन्होंने भाजपा की हालिया चुनावी जीत के मद्देनजर हिंदी भाषी राज्यों का विवादास्पद संदर्भ दिया और इन प्रदेशों को गोमूत्र राज्य करार दिया।
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गुजरात दौरे पर गईं तमिलनाडु की राज्यपाल ने कहा, 'मैं तमिलनाडु से हूं और मुझे यह कहना पड़ रहा है, क्योंकि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि आजकल कुछ लोग उत्तर-दक्षिण विभाजन का उल्लेख कर रहे हैं।' उन्होंने कहा, 'मुझे वास्तव में बहुत बुरा लगा जब तमिलनाडु के ही एक सांसद ने इसका उल्लेख किया। उन्होंने (डीएमके सांसद) उत्तरी राज्यों को 'गौमूत्र' राज्य बताया और भारत के एक क्षेत्र को दक्षिणी राज्यों से अलग किया।
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राज्यपाल ने कहा, उन्हें कहना होगा कि उत्तरी भारत के राज्य 'गौमुद्रा' राज्य हैं, 'गौमूत्र' नहीं। उन्होंने कहा, वे ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि सांसदों के बयान के आधार पर ऐसे विभाजन नहीं होने चाहिए। हर प्रदेश का सम्मान होना चाहिए। राज्यपाल सुंदरराजन ने कहा, प्राचीन वर्षों में तमिलनाडु के लोग भगवान के सामने एक 'हुंडियाल' (गुल्लक) रखते थे। वे हर दिन इसमें कुछ पैसे डालते थे, ताकि इस बचाए हुए पैसे का उपयोग करके वे अपने जीवनकाल में कम से कम एक बार काशी जा सकें। ऐसे महत्व वाले शहर समेत बाकी शहरों पर विवादित टिप्पणी नहीं होनी चाहिए।
राज्यपाल सुंदरराजन ने कहा कि भारत के लोग आध्यात्मिक रूप से एकजुट हैं। उन्हें क्षेत्रीय आधार पर विभाजित करने के प्रयास स्वीकार नहीं किए जा सकते। गौरतलब है कि वर्तमान में काशी यूपी के वाराणसी के रूप में जाना जाता है। बीते दिनों सुंदरराजन ने काशी तमिल संगमम को लेकर भी सरकार के प्रयासों की सराहना की थी। बता दें कि सुंदरराजन पुडुचेरी की उपराज्यपाल भी हैं।
अहमदाबाद में विश्वविद्यालय के छात्रों और शिक्षकों से मुखातिब तेलंगाना की राज्यपाल ने कहा, "आप लोगों को कैसे विभाजित कर सकते हैं? आध्यात्मिक रूप से लोग विभाजित नहीं हैं। राजनीतिक रूप से कुछ लोग विभाजित करना चाहते हैं, लेकिन ऐसा नहीं हो सकता क्योंकि इस देश के लोग आध्यात्मिक रूप से एकजुट हैं।" उन्होंने कहा, तमिलनाडु में, लोग काशी और रामेश्वरम (दक्षिणी राज्य में मंदिर शहर) का अलग से उल्लेख नहीं करते हैं। लोग कहते हैं काशी-रामेश्वरम. क्योंकि जो भी लोग काशी आते हैं, वे अपनी आध्यात्मिक यात्रा पूरी करने के लिए रामेश्वरम भी आते हैं। और जो लोग रामेश्वरम जाते हैं, वे काशी भी जाते हैं। उत्तर-दक्षिण विभाजन को गहरा नहीं किया जाना चाहिए। उत्तर में काशी है और दक्षिण में तेनकासी (तमिलनाडु का एक शहर) है। जो विभाजन करना चाहते हैं...उनके नापाक मंसूबे सफल नहीं होंगे, क्योंकि हमारे संस्कृति हमें एकजुट करती है।
तेलंगाना की राज्यपाल ने कहा कि देश में एक मजबूत सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था की जरूरत है। उन्होंने कहा पिछले 100 वर्षों में 20,000 से अधिक मंदिर नष्ट किए गए। अब ऐसे पूजा स्थलों को विकसित किया जा रहा है। उनसे जुड़ी स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए और अधिक मंदिरों को विकसित करने की जरूरत है। सुंदरराजन ने गुजरात के पावागढ़ पहाड़ी पर कालिका माता के हाल ही में दोबारा विकसित किए गए मंदिर का उदाहरण भी दिया।