Telangana: तेलंगाना में ओबीसी आरक्षण 42% तक बढ़ाने की तैयारी, डिप्टी सीएम बोले- जल्द पेश होगा विधेयक
तेलंगाना सरकार ओबीसी के लिए आरक्षण को बढ़ाकर 42 प्रतिशत करने के लिए जल्द ही विधानसभा में एक विधेयक पारित करेगी। इसके लिए उपमुख्यमंत्री विक्रमार्क ने कहा कि राज्य सरकार केंद्र पर दबाव बनाएगी ताकि यह विधेयक संसद में भी पारित हो सके।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
तेलंगाना सरकार ने बुधवार को घोषणा की कि वह ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) के लिए आरक्षण को 42 प्रतिशत तक बढ़ाने के लिए जल्द ही विधानसभा में एक विधेयक पारित करेगी। यह कदम कांग्रेस पार्टी के चुनावी वादे के तहत उठाया गया है। उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने बताया कि मार्च की शुरुआत में विधेयक विधानसभा में पेश किया जाएगा।
बता दें कि कांग्रेस ने 2023 विधानसभा चुनाव से पहले 'बीसी घोषणा' की थी, जिसमें बीसी कोटा को 23 प्रतिशत से बढ़ाकर 42 प्रतिशत करने का वादा किया गया था। इसके तहत, बीसी समुदाय के लोगों को स्थानीय निकायों में नए राजनीतिक नेतृत्व पद मिलेंगे और सरकारी नागरिक निर्माण और रखरखाव अनुबंधों में भी 42 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा।
राज्य सरकार केंद्र पर बनाएगी दवाब- विक्रमार्क
तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री विक्रमार्क ने यह भी कहा कि राज्य सरकार केंद्र पर दबाव बनाएगी ताकि यह विधेयक संसद में भी पारित हो सके, क्योंकि इससे 50 प्रतिशत आरक्षण की सीमा का उल्लंघन होगा। इसके लिए राज्य सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य नेताओं से मिलकर संसद में समर्थन जुटाएगी।
उन्होंने ने कहा कि जाति सर्वेक्षण के दौरान छूटे परिवारों के आंकड़े 16 से 28 फरवरी तक स्वीकार किए जाएंगे। ऐसे नागरिक मंडल कार्यालयों और ऑनलाइन टोल फ्री नंबर के माध्यम से सरकार से संपर्क कर सकते हैं। इसके साथ ही विक्रमार्क ने बीआरएस अध्यक्ष के चंद्रशेखर राव और उनके बेटे के टी रामा राव पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जो लोग सर्वेक्षण से छूट गए थे, उन्हें अब यह अवसर लाभ उठाना चाहिए।
विक्रमार्क ने किया जाति सर्वेक्षण का जिक्र
विक्रमार्क ने कहा कि जाति सर्वेक्षण के आधार पर राज्य की 56 प्रतिशत आबादी पिछड़े वर्गों (जिसमें मुस्लिम पिछड़े वर्ग भी शामिल हैं) की मांग को कानूनी दर्जा देने की प्राथमिकता है। उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र इस कदम को मंजूरी देगा।
एक नजर तेलंगाना के जातिए सर्वेक्षण पर
गौरतलब है कि जाति सर्वेक्षण में 3.5 करोड़ लोग शामिल थे, लेकिन 16 लाख लोग इससे बाहर रह गए क्योंकि वे उपलब्ध नहीं थे या उन्होंने इसमें भाग नहीं लिया। तेलंगाना में पिछड़े वर्गों की आबादी 46.25 प्रतिशत है, इसके बाद अनुसूचित जाति (17.43 प्रतिशत) और अनुसूचित जनजाति (10.45 प्रतिशत) हैं। सरकार पिछड़े मुसलमानों को आरक्षण देने के लिए भी काम कर रही है।