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तेज प्रताप यादव और ऐश्वर्या का अलगावः आसान नहीं है तलाक की राह

Sat, 03 Nov 2018 01:59 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला
न्यूज डेस्क,अमर उजाला Updated Sat, 03 Nov 2018 01:59 PM IST
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tej pratap yadav divorce: not easy to get divorce just after 5 months of marriage
तेज प्रताप-एश्वर्या की शादी
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने पत्नी ऐश्वर्या राय से तलाक के लिए कोर्ट में अर्जी दाखिल कर दी है। इसी साल मई में परिणय सूत्र में बंधे तेज प्रताप यादव की शादी राजनैतिक परिवार से ताल्लुक रखने वाली ऐश्वर्या से हुई थी जो अब टूटने की कगार पर है।
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लेकिन क्या तेज प्रताप को इतनी आसानी से तलाक मिल पाएगा? चारा घोटाले में लंबी कानूनी लड़ाई हारकर, सजा काट रहे बीमार लालू यादव के लिए पारिवारिक कलह का ये मामला फिर से मानसिक अवसाद और समाजिक प्रतिष्ठा को बट्टा लगा सकता है। भारतीय कानून के मुताबिक ये इतना आसान नहीं होगा। अगर बहू ऐश्वर्या सहमति से तलाक के लिए राजी नहीं होती हैं तो यादव परिवार को एक बार फिर अदालत के चक्कर काटने पड़ सकते हैं।
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आपको बता दें कि तेज प्रताप के वकील यशवंत कुमार शर्मा ने इस खबर की पुष्टि करते हुए बताया कि तेज प्रताप की ओर से तलाक के लिए आवेदन किया गया है। केस संख्या- 1208 में हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के तहत धारा 13 (1) (ia) के अनुसार याचिका में तेज प्रताप द्वारा ऐश्वर्या से तलाक की मांग की गई है। खास बात ये है कि तलाक का आधार 'क्रूरता' बनाया गया है। वकील के मुताबिक तेज प्रताप ने पत्नी से रिश्ता खत्म करने का फैसला लेने के पीछे कारण, 'कम्पैटिबिलिटी' का ना होना बताया है।
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आइये जानते हैं कि इतने कम समय में तलाक की चाहत करने वाले तेज प्रताप को किन कानूनी नियमों से गुजरना पड़ेगा और क्या वो आसानी से पत्नी से अलग हो पाएंगे या फिर तलाक लेने की कई कानूनी पेंच आड़े आएंगी?

क्या कहता है भारतीय कानून

भारत में तलाक के लिए दो कानून के तहत न्यायालय से मांग की जा सकती है:
  • हिंदू मैरिज एक्ट, 1955
  • स्पेशल मैरिज एक्ट, 1954
तेज प्रताप का मामला हिंदू मैरिज एक्ट, 1955 के तहत अदालत में सुना जाएगा।

तलाक लेने की प्रक्रिया दो आधार पर आगे बढती हैः
  • डिवोर्स विथ म्युचूअल कंसेेंट यानि सहमती से तलाक
  • डिवोर्स बाय कॉन्टेस्ट 
तलाक मांगने के आधार
शारीरिक/मानसिक प्रताड़ना, पार्टनर द्वारा छोड़ देना, पार्टनर की विक्षिप्त मानसिक स्थिति, धोखा, नपुसंकता जैसी गंभीर वजहों को ‘साबित’ कर देते हैं, जिससे साथ रहना नामुमकिन हो जाए।

पहला आधार आसान है यानि पति-पत्नी सहमति से तलाक ले लें। हालांकि इसमें भी कम से कम छह महीने का वक्त लगता ही है। लेकिन दूसरा आधार जिसमें पति-पत्नी से या पत्नी-पति से खुश ना हो तो अदालत में साबित करना पड़ता है कि वो तलाक पाने की हकदार है। इस प्रक्रिया में काफी वक्त लगता है और अगर ऐश्वर्या सहमति से तलाक देने को राजी नहीं होती हैं तो दोनो के बीच लंबी कानूनी लड़ाई चल सकती है।

tej pratap yadav divorce: not easy to get divorce just after 5 months of marriage
तेज प्रताप ने तलाक की दी अर्जी
आपसी सहमति से तलाक की प्रक्रिया


पहला चरण: दोनों पार्टी (पति और पत्नी) को कोर्ट में पहले एक याचिका दाखिल करनी पड़ती है।

दूसरा चरण: कोर्ट के सामने दोनों पक्ष के बयान रिकॉर्ड किए जाते हैं और पेपर पर दस्तखत लिए जाते हैं।
तीसरा चरण: कोर्ट दोनों पक्ष को 6 महीने का समय देती है कि वो अपने रिश्ते को वक्त दें और फिर सोचें कि उन्हें तलाक चाहिए या नहीं। इसे सामंजस्य बिठाने की अवधि भी कहते हैं।
चौथा चरण: जब ये समय खत्म हो जाता है तो दोनों पार्टी फाइनल सुनवाई के लिए बुलाई जाती है। (अगर उन्होंने अपना फैसला बदल लिया है)
पांचवां चरण: अंतिम सुनवाई में कोर्ट अपना आखिरी फैसला सुनाती है।

केस लड़कर तलाक लेने की प्रक्रिया

पहला चरण : सबसे पहले आप किस आधार पर तलाक लेना चाहते हैं ये सुनिश्चित कर लें।
दूसरा चरण : आप जिस आधार पर तालाक चाहते हैं इसके लिए साक्ष्य जुटाना शुरू करें। इस तरह से तलाक लेने की प्रक्रिया में सबसे अह्म यही होता है कि आप कितने मजबूत सुबूत दिखा पाते हैं।
तीसरा चरण : कोर्ट में याचिका दाखिल करें और साथ ही सारे साक्ष्य और कागज भी जमाक करें।
चौथा चरण (क): याचिका दाखिल होने के बाद कोर्ट दूसरे पक्ष को नोटिस देगी। अगर दूसरा पक्ष कोर्ट नहीं पहुंचता है तो ये मुद्दा एकपक्षी होता है तलाक प्रस्तुत किए कागजों पर दिया जाता है।
चौथा चरण (ख) : अगर दूसरा पक्ष कोर्ट में हाजिर होता है तो ये द्वपक्षीय हो जाता है और दोनों पार्टी की बातें सुनती हैं और कोशिश करती है कि सुलह हो जाए।अगर बाद में दोनों साथ में रहना चाहते हों या फिर तलाक।
पांचवां चरण : अगर दोनों पक्ष सुलग नहीं कर पाए तो केस करने वाला पक्ष लिखित में दूसरे के खिलाफ याचिका देता है। लिखित बयान 30 से 90 दिन के भीतर होना चाहिए।
छठा चरण : एक बार अगर बयान की प्रक्रिया पूरा हो जाए तो कोर्ट फैसला लेती है कि आगे क्या करना है।
सातवां चरण : कोर्ट सुनवाई शुरू करती है और दोनों पक्षों को और उनके पेश किए गए सुबूत और पेपर दुबारा देखती है।
आठवां चरण : सारे सुबूतों को देखने के बाद कोर्ट अपना फैसला सुनाती है। ये काफी लंबी प्रक्रिया  और कई सप्ताह, महीने और साल भी लग जाते हैं।  

इन बातों से साफ है कि तेजप्रताप को अभी तलाक की प्रक्रिया पूरा करने के लिए काफी लंबा और मजबूत संघर्ष करना होगा। फिलहाल दोनों परिवारों में सुलह की कोशिश जारी है और ऐश्वर्या राय के पिता पूर्व मंत्री चंद्रिका राय अपनी बेटी के साथ लालू आवास पहुंचे हुए हैं।  लालू प्रसाद ने भी अपने बेटे को बुला लिया ताकि इस मसले पर कोई हल निकल सके।
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