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Teesta Setalvad: सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के अगले दिन ही तीस्ता सीतलवाड़ पर शिकंजा कसना शुरू, कई विवादों से जुड़ा नाम, जानें इनके बारे में सबकुछ

Sat, 25 Jun 2022 08:04 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Sat, 25 Jun 2022 08:04 PM IST
सार

तीस्ता सीतलवाड़ एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं और गुजरात दंगों के पीड़ितों की तरफ से अदालत में केस लड़ रही हैं। उन पर विदेश से मिले धन के दुरुपयोग और धोखाधड़ी का आरोप है।

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Teesta Setalvad arrested by Gujarat ATS after SC remark, know all about her
तीस्ता सीतलवाड़ - फोटो : social media

विस्तार

सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ को गुजरात एटीएस की टीम ने हिरासत में ले लिया है। उन्हें मुंबई के सांताक्रूज पुलिस स्टेशन में पेश करने के बाद एटीएस अहमदाबाद लेकर गई है। सीतलवाड़ के खिलाफ एटीएस की कार्रवाई ऐसे वक्त पर हुई जब एक दिन पहले ही गुजरात दंगा 2002 मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जाकिया जाफरी की याचिका खारिज करते हुए तीस्ता सीतलवाड़ के एनजीओ की जांच की जरूरत बताई थी। इसके बाद शनिवार सुबह ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक टीवी इंटरव्यू में कहा था कि सीतलवाड़ ने अपने एनजीओ की मदद से गुजरात दंगों के बारे में आधारहीन जानकारी दी। आइए जानते हैं कि तीस्ता सीतलवाड़ कौन हैं, जो लंबे अर्से से गुजरात दंगों के बाद कानूनी मुहिम और अपने एनजीओ को लेकर चर्चा व विवादों में रही हैं। 

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कौन हैं तीस्ता सीतलवाड़ 
तीस्ता सीतलवाड़ एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं और गुजरात दंगों के पीड़ितों की तरफ से अदालत में केस लड़ रही हैं। उन पर विदेश से मिले धन के दुरुपयोग और धोखाधड़ी का आरोप है। 2013 में अहमदाबाद स्थित गुलबर्ग सोसाइटी के 12 निवासियों ने तीस्ता के खिलाफ जांच की मांग की थी। सोसाइटी के लोगों ने आरोप लगाया था कि तीस्ता ने गुलबर्ग सोसाइटी में एक म्यूजियम बनाने के लिए विदेश से करीब डेढ़ करोड़ रुपये जमा किए, लेकिन उन पैसों का सही इस्तेमाल नहीं हुआ। फिर 2014 में तीस्ता और उनके पति जावेद आनंद के खिलाफ क्राइम ब्रांच ने एफआईआर दर्ज की थी। 
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तीस्ता सीतलवाड़ को एटीएस द्वारा हिरासत में लेने का मामला उस घटना से संबंधित है जिसे 2002 में हुई गुजरात के गुलबर्ग सोसाइटी की घटना के रूप में जाना जाता है। इसमें एक ट्रेन के डिब्बे में आग लगने से कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफरी सहित 68 लोग मारे गए थे। यह हिंसा गोधरा में ट्रेन की बोगी में आग लगाए जाने की घटना के एक दिन बाद हुई थी। गोधरा ट्रेन अग्निकांड में 59 लोगों की जान चली गई थी। इसके बाद गुजरात में दंगे भड़क गए थे। इस घटना के एक दशक बाद 2012 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एसआईटी की रिपोर्ट ने गुलबर्ग सोसाइटी मामले में नरेंद्र मोदी समेत कई राजनेताओं और अधिकारियों को दोषमुक्त कर दिया था। इसके खिलाफ एहसान जाफरी की पत्नी जाकिया जाफरी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली थी।
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तीस्ता के खिलाफ ये गंभीर आरोप
तीस्ता और उनके पति जावेद आनंद के खिलाफ आरोप है कि उन्होंने 2007 से बड़े पैमाने पर धन संग्रह अभियान शुरू करके दंगा पीड़ितों के नाम पर 6 करोड़ रुपये से 7 करोड़ रुपये तक की धनराशि एकत्र करके धोखाधड़ी को अंजाम दिया। अदालत में यह आरोप लगाया गया था कि दान के माध्यम से जुटाए गए इन फंडों को युगल द्वारा शराब और विशिष्ट उपभोग के अन्य लेखों पर खर्च किया। तीस्ता के खिलाफ एक और आरोप यह है कि उन्होंने विदेशी मुद्रा कानूनों का उल्लंघन किया और 2009 में अमेरिका आधारित फोर्ड फाउंडेशन द्वारा अपने एनजीओ को दान किए गए धन का दुरुपयोग किया। 


तीस्ता सीतलवाड़ के विदेशी कनेक्शन का खुलासा खुद उनके पूर्व सहयोगी रईस खान पठान ने अदालत में जमा अपने हलफनामा में किया था। रईस खान ने कहा था कि तीस्ता को विदेशों से हवाला के जरिए पैसा आया था। तीस्ता और उनके पति जावेद आनंद कम्युनलिज्म कॉम्बैट नाम की पत्रिका निकालते थे जिसे विदेशों से फंडिंग होती थी। जिस काम के लिए पैसे मिले थे, उसे किसी और काम में खर्च करना एफसीआरए का सीधा उल्लंघन माना गया। बाद में केंद्र सरकार ने तीस्ता और जावेद के सबरंग ट्रस्ट का एफसीआरए लाइसेंस रद्द करने का फैसला लिया था। 

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