फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   tcs nashik  nida khan arrest forced conversion ncw report digital evidence

TCS नासिक मामला: जांच में मिले 171 इस्लामिक लिंक, ब्रेनवॉश के लिए किए इस्तेमाल

Tue, 12 May 2026 05:12 AM IST
राकेश कुमार अमर उजाला नेटवर्क, मुंबई
अमर उजाला नेटवर्क, मुंबई Published by: राकेश कुमार Updated Tue, 12 May 2026 05:12 AM IST
सार

नासिक की एक अदालत ने टीसीएस यौन उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण मामले की मुख्य आरोपी निदा खान को 24 मई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। जांच के दौरान पुलिस को 171 डिजिटल लिंक मिले हैं, जिनका उपयोग कथित तौर पर कर्मचारियों के ब्रेनवॉश और धर्म परिवर्तन के लिए किया जाता था। राष्ट्रीय महिला आयोग की 50 पन्नों की रिपोर्ट में क्या-क्या है? खबर में जानिए...
 

विज्ञापन
tcs nashik  nida khan arrest forced conversion ncw report digital evidence
टीसीएस की पूर्व कर्मचारी निदा खान। - फोटो : एक्स

विस्तार

नासिक की एक अदालत ने टीसीएस यौन उत्पीड़न-जबरन धर्मांतरण मामले में मुख्य आरोपी निदा खान को 24 मई तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया। वहीं, पुलिस को जांच के दौरान कुछ अहम डिजिटल साक्ष्य मिले हैं, जिनमें 171 इस्लामिक लिंक शामिल हैं। दावा है कि इनके माध्यम से पीड़िताें का ब्रेनवाश करने की कोशिश की गई।
विज्ञापन


खान को पुलिस हिरासत खत्म होने के बाद कड़ी सुरक्षा के बीच सोमवार को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश केजी जोशी की अदालत में पेश किया गया था। मामले की सुनवाई बंद कमरे में की गई। सूत्रों के मुताबिक, पुलिस और अभियोजन पक्ष ने कोर्ट में जांच से जुड़े कई अहम खुलासे किए। पुलिस ने अदालत को बताया कि डिजिटल फारेंसिक जांच के दौरान उन्हें 171 इस्लामिक लिंक मिले, जिन्हें निदा खान ने पीड़िता को भेजा था। इन लिंक में इस्लामिक आयतें और इस्लाम धर्म अपनाने संबंधी संदेश मौजूद थे।
विज्ञापन


इन डिजिटल रिकॉर्ड्स को जांच का अहम हिस्सा माना जा रहा है। अभियोजन पक्ष का दावा है कि आरोपी ने पीड़िता का नाम भी बदलने की कोशिश की थी। अभियोजन पक्ष ने कोर्ट को बताया कि डिजिटल डाटा की जांच साइबर और फोरेंसिक विशेषज्ञों की मदद से की गई है। इसके आधार पर कई सबूत जुटाए गए हैं, जिन्हें अदालत में पेश किया जाएगा। मामले को सुनने के बाद अदालत ने निदा खान को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में नासिक केंद्रीय जेल में भेज दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन


कब सामने आया था मामला? 
टीसीएस की नासिक इकाई में कर्मचारियों की शिकायतों के बाद यह मामला सामने आया था। इस संबंध में नौ एफआईआर दर्ज की गई हैं और मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की गई है। केस दर्ज होने के बाद से निदा खान फरार थी। उसे 7 मई को छत्रपति संभाजीनगर से असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली एआईएमआईएम पार्टी के एक पार्षद के घर से गिरफ्तार किया गया था। 27 वर्षीय आरोपी निदा खान के खिलाफ बीएनएस की कई धाराओं के अलावा अनुसूचित जाति, अनसूचित जनजाती (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत भी केस दर्ज किया गया है। शिकायतकर्ता अनुसूचित जाति की है, जिसका निदा खान ने जबरन धर्म परिवर्तन कराने का प्रयास किया।

यह भी पढ़ें: अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का चीन दौरा: शी जिनपिंग से मुलाकात पर टिकी निगाहें, व्यापारिक तनाव कम होने की उम्मीद

मुख्य आरोपी निदा खान को 24 तक न्यायिक हिरासत
निदा खान को शरण देने के आरोप में गिरफ्तार एआईएमआईएम नेता मतीन पटेल की पार्षदी भी खतरे में हैं। पटेल पर अवैध निर्माण के आरोप हैं। छत्रपति संभाजीनगर के महापौर समीर राजुरकर ने कहा कि पटेल से सभी दस्तावेज मंगवाए जाएंगे और उनकी जांच की जाएगी। अगर उनका मकान अवैध निकला तो नगर निगम अधिनियम के तहत कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा, यदि पटेल किसी गैर-कानूनी गतिविधि में लिप्त थे तो निश्चित तौर पर उनकी पार्षदी रद्द की जानी चाहिए।

भय के साए में थे कर्मचारी, निष्क्रिय थी पॉश कमेटी
टीसीएस नासिक यूनिट से जुड़े मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) की ओर से महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को सौंपी गई 50 पन्नों की जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। इसमें दावा किया गया है कि यहां महिला कर्मचारियों के साथ यौन शोषण, मानसिक उत्पीड़न और धार्मिक अपमान जैसी घटनाएं देखी गईं। कर्मचारी भय के साये में थे और महिला सुरक्षा से संबंधित पॉश कमेटी पूरी तरह निष्क्रिय थी। शिकायतें मिलने के बाद राष्ट्रीय महिला आयोग ने टीसीएस नासिक मामले का संज्ञान लिया। आयोग की चेयरमैन विजया राहटकर के निर्देश पर फैक्ट फाइंडिंग कमेटी गठित की गई और सेवानिवृत्त जज जस्टिस साधना जाधव की अध्यक्षता में मामले की जांच की गई। इसके बाद कुछ सुझाव और सिफारिश के साथ 50 पन्नों की रिपोर्ट तैयार कर मुख्यमंत्री फडणवीस को सौंपी गई है। 


रिपोर्ट के मुताबिक, मामले में गिरफ्तार किए गए कई लोगों पर आरोप है कि उन्होंने न केवल दफ्तर का माहौल बिगाड़ा बल्कि कुछ कर्मचारियों पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने की कोशिश की। आरोपी हिंदू मान्यताओं, परंपराओं और रीति-रिवाजों का अपमान करके महिला कर्मचारियों को यह बताते थे कि इस्लाम धर्म कितना श्रेष्ठ है। उनका दफ्तर में इतना प्रभाव था कि नौकरी जाने या तबादले के भय से कोई भी कर्मचारी उनके खिलाफ आवाज उठाने की हिम्मत नहीं कर पा रहा था।

सीसीटीवी कैमरे तो थे लेकिन वह काम नहीं कर रहे थे
रिपोर्ट में बताया गया है कि जांच में महिला कर्मचारियों की सुरक्षा पॉश कानून लगभग शून्य पाया गया। सहायक जनरल मैनेजर अश्विनी चैनानी ने मामले में चुप्पी साधी, जिससे आरोपियों के हौसले बुलंद हुए। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में संबंधित आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 75,78,79 और 299 के तहत कठोर कार्रवाई करने की सिफारिश करते हुए कहा है कि गवाहों को विटनेस प्रोटेक्शन एक्ट के तहत सुरक्षा प्रदान की जाए।

वीडियो-
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed