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Air India: कर्ज में डूबी एयर इंडिया के अधिग्रहण के लिए टाटा संस ने लगाई बोली, क्या हो पाएगी 'घर वापसी'

Wed, 15 Sep 2021 06:35 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Wed, 15 Sep 2021 06:35 PM IST
सार

सूत्रों के अनुसार, टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस ने सोमवार को समय सीमा समाप्त होने से पहले रुचि पत्र जमा किया है। इसी के साथ अधिग्रहण की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है। 

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Tata Sons puts in financial bid for Air India: Company spokesperson
एयर इंडिया - फोटो : पीटीआई

विस्तार

घाटे में चल रही सरकारी विमानन कंपनी एयर इंडिया के अधिग्रहण के लिए टाटा संस ने बोली लगाई है। कंपनी के प्रवक्ता ने यह जानकारी दी है। वहीं, डिपार्टमेंट ऑफ इनवेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (DIPAM) ने जानकारी दी कि एयर इंडिया अधिग्रहण संबंधी रुचि पत्र मिल गया है। इसी के साथ ये प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। 

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टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस ने सोमवार को समय सीमा समाप्त होने से पहले रुचि पत्र जमा किया। सरकार ने भी साफ कर दिया कि उसे एयर इंडिया अधिग्रहण के लिए कई प्रस्ताव मिले हैं। डीआईपीएएम सचिव तुहिन कांत पांडे ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है। 
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बता दें कि एयर इंडिया को बेचने की प्रक्रिया जनवरी 2020 में ही शुरू कर दी गई थी, लेकिन कोरोना महामारी के कारण इसमें लगातार देरी हुई। अप्रैल 2021 में सरकार ने एक बार फिर योग्य कंपनियों से बोली लगाने को कहा। 15 सितंबर बोली लगाने का आखिरी दिन था। साल 2020 में भी टाटा ग्रुप ने एयर इंडिया के अधिग्रहण को लेकर रुचि पत्र दिया था।
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सरकार ने 2017 से ही एयर इंडिया की नीलामी के प्रयास शुरू कर दिए थे, लेकिन तब कंपनियों ने रुचि ही नहीं दिखाई थी। अक्तूबर में सरकार ने एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (ईओएल) के नियमों में ढील दी जिसके बाद कर्ज में डूबे एयर इंडिया को खरीदने में कुछ कंपनियों ने रुचि दिखाई। नए नियमों के तहत ही कर्ज के प्रावधानों में नरमी बरती गई ताकि स्वामित्व वाली कंपनी को पूरा कर्ज न वहन करना पड़े। 

2007 में घरेलू ऑपरेटर इंडियन एयरलाइंस के साथ विलय के बाद से ही एयर इंडिया घाटे में चल रहा है। इस एयरलाइन की स्थापना टाटा ने 1932 में एक मेल करियर के रूप में की थी। अब जो भी कंपनी इसका स्वामित्व हासिल करेगी उसे 4400 घरेलू उड़ानें, देश में 1800 अंतर्राष्ट्रीय लैंडिंग और पार्किंग की जगह मिलेगी। 

अगर टाटा के साथ सरकार का सौदा पक्का हो जाता है तो विमानन कंपनी की 67 साल बाद ‘घर वापसी’ हो सकती है। टाटा समूह ने अक्तूबर 1932 में टाटा एयरलाइंस के नाम से एयर इंडिया की शुरुआत की थी, जिसे भारत सरकार ने 1953 में अपने अधिकार क्षेत्र में ले लिया था। 


विमानन कंपनी पर 60 हजार करोड़ का कर्ज
वर्तमान में एयर इंडिया पर 60,074 करोड़ का कर्ज है, लेकिन अधिग्रहण के बाद खरीदार को 23,286.5 करोड़ रुपये ही चुकाने होंगे। शेष कर्ज को विशेष उद्देश्य के लिए बनाए गए एयर इंडिया एसेट होल्डिंग्स लिमिटेड को ट्रांसफर कर दिया जाएगा। इसका मतलब है कि बाकी का कर्ज खुद सरकार उठाएगी।

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