Cancer: इलाज के लिए औषधीय पौधों पर शोध करेगा टाटा मेमोरियल सेंटर, 50 एकड़ जमीन पर होगी वनस्पतियों की खेती
टाटा मेमोरियल सेंटर के निदेशक डॉ. राजेंद्र बडवे ने बताया कि राज्य सरकार ने खोपोली में 50 एकड़ जमीन दी है, जो खारघर स्थित हमारे केंद्र से मात्र 30 मिनट की दूरी पर है। इस जमीन के चारों ओर सुरक्षा दीवार बनाने का काम चल रहा है।
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देश और दुनिया में तेजी से फैल रहे कैंसर के सटीक इलाज के लिए कई प्रकार के रिसर्च चल रहे है। इस कड़ी में टाटा मेमोरियल सेंटर (टीएमसी) अब कैंसर की रोकथाम और उसके उपचार के लिए वनस्पतियों का अध्ययन करेगा। इसके लिए मुंबई से सटे रायगढ़ जिले के खोपोली में 50 एकड़ में कैंसर से लड़ने वाले पौधे लगाए जाएंगे और उस पर शोध किया जाएगा।
टाटा मेमोरियल सेंटर के निदेशक डॉ. राजेंद्र बडवे ने बताया कि राज्य सरकार ने खोपोली में 50 एकड़ जमीन दी है, जो खारघर स्थित हमारे केंद्र से मात्र 30 मिनट की दूरी पर है। इस जमीन के चारों ओर सुरक्षा दीवार बनाने का काम चल रहा है। इस जमीन पर कैंसर के खिलाफ प्रभावी या कैंसर के प्रभाव को कम करने वाले पौधों की खेती की जाएगी। वनस्पतियों के अनुसंधान की परियोजना के लिए केंद्र सरकार ने 300 करोड़ का अनुदान दिया है। डॉ. बड़वे ने कहा कि तीन साल पहले टाटा मेमोरियल सेंटर के शोधकर्ताओं ने गर्भाशय कैंसर के मरीजों के लिए आयुर्वेदिक दवाओं का इस्तेमाल किया था। इसके अलावा मरीजों पर कीमोथेरेपी दवाओं के दुष्प्रभाव को रोकने के लिए आयुर्वेदिक दवाओं की क्षमता का परीक्षण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पांच साल के अध्ययन के बाद यह सामने आया है कि नियमित योग से स्तन कैंसर के रोगियों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इस संबंध में एक लेख भी प्रकाशित किया गया है। हल्दी में मौजूद तत्व करक्यूमिन कैंसर को बढ़ने से रोकने में भी मददगार है। इस संबंध में छोटे स्तर पर अध्ययन और शोध किया गया है।
20 पौधों की हुई पहचान, शोध में लगेंगे तीन साल
टीएमसी के निदेशक डॉ. राजेन्द्र बडवे ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि ऐसे 20 अलग-अलग पौधे की पहचान की गई है जो कैंसर रोग के इलाज में प्रभावी हो सकते हैं। पूणे स्थित आगरकर इंसटीट्यूट, हरिद्वार स्थित देव संस्कृति, जम्मू का आईआईआईएम और बेंगलुरू के रमैया इंस्टीट्यूट ने इन पौधों की खोज की है। इन संस्थानों के आयुर्वेद प्रैक्टिसनर के सुझाव पर औषधीय पौधे खोपोली स्थित 50 एकड़ में लगाए जाएंगे। उसके बाद उसका वेस्टर्न डिजाईन से टेस्ट किया जाएगा कि असल में ये कैंसर के उपचार में प्रभावी है या नहीं।
देश में प्रतिवर्ष 7 लाख लोगों की कैंसर से होती मृत्यु
आंकड़ों के मुताबिक भारत में हर साल 7 लाख लोगों की कैंसर से मृत्यु हो जाती हैं। औसतन प्रतिवर्ष करीब 10 लाख लोग कैंसर रोग से प्रभावित होता है। राजेंद्र बडवे ने कहा कि टाटा मेमोरियल सेंटर के परेल और खारघर के अस्पतालों में हर साल देश के विभिन्न राज्यों से 75 हजार मरीज भर्ती होते हैं। इतनी बड़ी संख्या में मरीज सामने आने के कारण हमारे संस्थान के शोधकर्ता कैंसर के इलाज के वैकल्पिक तरीकों पर शोध कर रहे हैं।