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चिंताजनक: मुंह के कैंसर के इलाज पर पिछले साल 2386 करोड़ किए खर्च
Mon, 21 Jun 2021 07:01 AM IST
देव कश्यप
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
Published by: देव कश्यप
Updated Mon, 21 Jun 2021 07:01 AM IST
सार
- शोध के अनुसार, अगले दस वर्षों में 23,724 करोड़ रुपये का आर्थिक बोझ
- समय पर रोग की पहचान तो बच सकते हैं 250 करोड़ रुपये
- टाटा मेमोरियल सेंटर के चिकित्सकों ने किया खर्च पर अध्ययन, 80 फीसदी मामले बढ़ी हुई अवस्था में पहुंचते हैं डॉक्टरों के पास
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
विस्तार
देश में मुंह का कैंसर समय के साथ आर्थिक बोझ का कारण बनता जा रहा है। टाटा मेमोरियल सेंटर द्वारा किए गए एक शोध से पता चला है कि देश में मुंह के कैंसर के इलाज के लिए वर्ष 2020 में कुल 2,386 करोड़ रुपये की राशि खर्च हुई है।
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टाटा मेमोरियल सेंटर के निदेशक डॉ. आरए बडवे ने बताया कि ग्लोबोकैन के आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो दशकों में नए मामलों की निदान दर में 68 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मुंह के कैंसर के 60 से 80 फीसदी मामले बढ़ी हुई अवस्था में डॉक्टरों के पास पहुंचते हैं। वर्ष 2020 में करीब 2,386 करोड़ रुपये खर्च हुए जो सरकार द्वारा जारी किए गए स्वास्थ्य बजट का एक अहम हिस्सा है। रिपोर्ट के अनुसार अगले दस वर्षों में देश पर 23,724 करोड़ रुपये का आर्थिक बोझ पड़ेगा।
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गंभीर होने पर चलता है रोग का पता
डॉ. बडवे के अनुसार अधिकतर लोगों को इस बीमारी के बारे में तब पता चलता है जब स्थिति बिगड़ चुकी होती है। वहीं कुछ मरीजों को समय पर इलाज तक नसीब नहीं हो पाता है। मुंह के कैंसर की पहचान समय पर हो और गंभीर श्रेणी के रोग में केवल 20 फीसदी की कमी हो तो 250 करोड़ रुपये बच सकते हैं।
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जांच पर भी बड़ी रकम खर्च
मुह के कैंसर के इलाज पर होने वाले खर्च के लिए डॉ. पंकज चतुर्वेदी की अध्यक्षता में टाटा मेमोरियल सेंटर ने विश्लेषण शुरू किया। अस्पताल में रिसर्च फेलो और शोध के प्रमुख लेखक डॉ. अर्जुन सिंह ने पाया कि उन्नत चरणों के इलाज की लागत 2,02,892 रुपये थी जबकि प्रारंभिक चरण की लागत 1,71,135 रुपये थी। सीटी स्कैन, एमआरआई जैसी जांचों के साथ कीमोथेरेपी पर भी बड़ी रकम खर्च हुई।