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Tamil Nadu: प्रदूषित हो रही पलार नदी पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त निर्देश, जांच के लिए पैनल गठित करने का दिया आदेश

Thu, 30 Jan 2025 03:16 PM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शुभम कुमार Updated Thu, 30 Jan 2025 03:16 PM IST
सार

तमिलनाडु में चमड़े के कारखाने से निकल रहे अपशिष्टों के कारण प्रदूषित हो रही पलार नदी को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त होता हुआ दिख रहा है। जहां कोर्ट ने राज्य सरकार को जांच के लिए एक पैनल के गठन का निर्देश दिया है। साथ ही प्रदूषण के कारण प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने की बात भी कही है। 

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Tanneries polluting river SC asks TN to compensate affected warns of action on non-compliance News In Hindi
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

तमिलनाडु में चमड़े के कारखाने के चलते पलार नदी लगातार प्रदूषित होती जा रही है। इसको लेकर अब सुप्रीम कोर्ट एक्शन में आती हुई नजर आ रही है, जिसके तहत सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को तमिलनाडु में पलार नदी में चमड़े के कारखानों से निकलने वाले अपशिष्टों के कारण हो रहे गंभीर प्रदूषण को कम करने के लिए कई आदेश दिए। बता दें कि यह मामला वेल्लोर जिले के पर्यावरण प्रदूषण से जुड़ा हुआ था, जहां चमड़े के कारखानों के कचरे से पर्यावरणीय क्षति हो रही थी।
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हालांकि रिपोर्ट्स के अनुसार अधिकारियों ने एक केंद्रीय अपशिष्ट उपचार संयंत्र स्थापित किया था, लेकिन अदालत ने कहा कि चमड़े के उद्योगों ने पर्यावरणीय नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया है, जिसके कारण प्रदूषण का स्तर कम नहीं हो सका। अदालत ने यह भी कहा कि वेल्लोर जिला निगरानी समिति ने जो नियम बनाए थे, उद्योगों ने उनका पालन नहीं किया। इसलिए अदालत ने कुछ निर्देश जारी किए और कहा कि यह आदेश निरंतर रहेगा, और अदालत समय-समय पर इसके पालन की समीक्षा करेगी।

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जांच के लिए पैनल के गठन का आदेश
साथ ही न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने तमिलनाडु सरकार से जैविक क्षति का आकलन करने और उसे दूर करने के लिए उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक पैनल गठित करने को कहा। यह पैनल एक सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता में होगा और इसमें पर्यावरण विशेषज्ञ और राज्य सरकार के अधिकारी शामिल होंगे।
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छति के लिए मुआवजे का दिया निर्देश
न्यायालय ने कहा कि चमड़े के कारखानों द्वारा नदी और आसपास के इलाकों में अनुपचारित अपशिष्ट बहाने से जल, भूमि और भूजल को भारी नुकसान हुआ है। इसके परिणामस्वरूप स्थानीय किसानों और निवासियों की हालत खराब हुई है, और सार्वजनिक स्वास्थ्य को खतरा हुआ है। अदालत ने प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने का आदेश दिया और कहा कि अगर प्रदूषणकारी उद्योगों से मुआवजा नहीं लिया गया, तो राज्य सरकार को यह राशि वसूलनी चाहिए।


सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी
साथ ही मामले में न्यायालय ने यह भी कहा कि राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर एक समिति गठित करनी होगी, जो पर्यावरणीय नुकसान की भरपाई करने और इसे रोकने के उपायों की निगरानी करेगी। अदालत ने यह भी चेतावनी दी कि अगर इस आदेश का पालन नहीं किया गया, तो जिम्मेदार अधिकारियों को सजा दी जाएगी।
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