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बेबसी: बेटे की साइकिल से खेत जोतने को मजबूर हुआ किसान, लॉकडाउन में खत्म हुई पूरी कमाई
Sun, 04 Jul 2021 08:58 PM IST
संजीव कुमार झा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Sun, 04 Jul 2021 08:58 PM IST
सार
मीडिया में आई जानकारी के अनुसार तमिलनाडु के थिरूथानी के अगूर में एक किसान को आर्थिक किल्लत की वजह से अपने बेटे की साइकिल से त जोतने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
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बेटे की साइकिल से खेत जोतता किसान
- फोटो : Video grab
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विस्तार
कोरोना की दूसरी लहर के दौरान जहां लाखों लोगों की जान चली गई वहीं कई लोगों की आर्थिक स्थिति को भारी नुकसान हुआ है। खेती से लेकर हर तरह के व्यवसाय प्रभावित हुए हैं। इसी क्रम में तमिलनाडु से एक किसान की भावुक कर देने वाली खबर सामने आई है। मीडिया में आई जानकारी के अनुसार तमिलनाडु के थिरूथानी के अगूर में एक किसान को आर्थिक किल्लत की वजह से अपने बेटे की साइकिल से त जोतने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
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लॉकडाउन में 37 साल के नागराज की आर्थिक स्थिति बिगड़ने के बाद बेटा और परिवार के दूसरे सदस्य भी खेती में मदद कर रहे हैं। लेकिन धान की खेती में काफी नुकसान उठाना पड़ा। इसके बाद भी नागराज ने हिम्मत नहीं हारी और सम्मांगी/चंपक की फसल उगाने का फैसला किया। इसके फूलों का इस्तेमाल धार्मिक कार्यों में किया जाता है।
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फूल की खेती के लिए खेत नागराज के साथ उनके परिवार के सदस्यों ने छह महीने तक काम किया और पौधों के बड़े होने का इंतजार किया। लेकिन बदकिस्मती से जब फूलों की फसल तैयार हुई तो लॉकडाउन की वजह से सभी मंदिर के कपाट बंद हो गए। और फिर क्या था जैसे किसान के परिवार के ऊपर दुख का पहाड़ गिर गया हो।
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एक साल तक नागराज को इन्हीं परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। इस दौरान जो भी बचत थी वो भी समाप्त हो गई। ऊपर से कर्ज का बोझ भी बढ़ने लगा। लेकिन विषम हालातों के बावजूद भी नागराज ने हिम्मत नहीं हारी और एक बार फिर सम्मांगी की फसल उगाने का फैसला किया। हालांकि अब उसने दूसरा उपाय खोजा। वह थी बेटे को स्कूल में सरकार की तरफ से मिली साइकिल। नागराज के पास जो भी थोड़े से पैसे बचे थे, उसी से साइकिल को खेत जोतने लायक उपकरण में तब्दील कर लिया।
नागराज ने बताया कि आर्थिक तंगी के कारण मैं अपने बेटे की साइकिल इस्तेमाल कर रहा हूं। इस हालात में जब कहीं से कोई मदद नहीं मिल रही है तो मैंने यह जुगार निकाला।