तमिलनाडु : द्रमुक अध्यक्ष स्टालिन की बैठक में हंगामा करने वाली महिला गिरफ्तार
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द्रमुक अध्यक्ष एमके स्टालिन की अध्यक्षता में शनिवार को जिले में हुई लोक ग्राम सभा की बैठक में एक महिला ने हंगामा किया और ऐसे कार्यक्रमों की जरूरत पर सवाल उठाते हुए पार्टी पर आरोप लगाया कि वह लोगों की समस्याओं को हल करने के लिए कदम नहीं उठा रही है। ताजा जानकारी के अनुसार हंगामा करने वाली महिला को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार महिला एआईएडीएमके की कार्यकर्ता है।
द्रमुक अध्यक्ष ने थोंडामुथुअर क्षेत्र के देवीरायापुरम में बैठक में अपने संबोधन के दौरान वहां एकत्रित लोगों से सुझाव मांगे जिन्हें आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर पार्टी के घोषणापत्र में शामिल किया जा सके।
तभी भीड़ में एक अधेड़ आयुवर्ग की महिला ने स्टालिन से पूछा कि क्या इस तरह की बैठकें करना आवश्यक है ? पार्टी कार्यकर्ताओं ने महिला को तुरंत बैठने को कहा और स्टालिन ने महिला से वहां से जाने को कहा और आरोप लगाया कि उसे नगरीय प्रशासन मंत्री एस.पी. वेलुमानी के कहने पर बैठक में अव्यवस्था फैलाने के लिए भेजा गया।
इसी बीच पुलिस वहां पहुंची और महिला को वहां से निकाला। हालांकि पार्टी के कुछ कार्यकर्ता महिला के पीछे भी गए। लेकिन पुलिस महिला को वहां से सुरक्षित ले गई। कोविड-19 के मद्देनजर राज्य सरकार ने ग्राम सभा बैठकों का आयोजन फिलहाल न करने को कहा है लेकिन द्रमुक 'मक्काल सभा' (जनसभा) के नाम से ऐसी बैठकें आयोजित कर रहा है।
वेलुमणि के खिलाफ भ्रष्टाचार पर बोले स्टालिन
द्रमुक अध्यक्ष एम के स्टालिन ने कहा है कि यदि वह तमिलनाडु के नगर प्रशासन मंत्री एसपी वेलुमणि के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों को साबित नहीं कर पाते हैं, तो राजनीति छोड़ देंगे। वेलुमणि द्वारा उनके खिलाफ लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों को साबित करने या राजनीति छोड़ने की चुनौती पर प्रतिक्रिया देते हुए स्टालिन ने कहा, मैं राजनीति छोड़ने के लिए तैयार हूं।
क्या आप (वेलुमणि) तैयार हैं? स्टालिन ने थोंडमुथुर निर्वाचन क्षेत्र में देवारायपुरम में लोगों की ग्राम सभा की एक बैठक को संबोधित करते हुए कहा, हम न केवल मंत्री के खिलाफ आरोपों को साबित करेंगे, बल्कि उन्हें अदालत में भी घसीटेंगे और उन्हें उनके भ्रष्ट कार्यों के लिए सजा दिलवाएंगे। इससे पहले डीएमके अध्यक्ष ने मंगलवार को तमिलनाडु के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित को शिकायती पत्र सौंपकर मंत्रिपरिषद के खिलाफ भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था।