आवाज पहचानने में माहिर वीरप्पन को चकमा देकर मारा था STF ने
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रूपा पब्लिकेशन की ओर से प्रकाशित उनकी किताब वीरप्पन : चेजिंग द ब्रिगेंड में वीरप्पन से जुड़ी तमाम घटनाओं का जिक्र किया गया है। इसमें वीरप्पन की ओर से की गई क्रूर हत्याओं और कन्नड़ सुपरस्टार का अपहरण कर उन्हें 108 दिनों की कैद में रहने का बहुचर्चित मामला है।
'वीरप्पन आवाज पहचानने में माहिर है'
के. विजय कुमार ने लिखा है, जब हमें पता चला कि वीरप्पन आवाज पहचानने में माहिर है तो हमने अपनी रणनीति बदल ली। हम संख्याओं के जरिये संवाद करने लगे। वीरप्पन जहां सक्रिय था, उस 60 वर्ग किलोमीटर के इलाकों के 16 हिस्सों को हमने फिर कई हिस्सों में बांटा। फिर हमने इनके ऊपर काल्पनिक घड़ियां लगाईं।
हम इन घड़ियों की पोजीशन को अपनी मौजूदगी के बारे में बताने के लिए इस्तेमाल करते थे। इसे हमारी टीम तो समझ सकती थी लेकिन इसे दूसरे नहीं सुन सकते। चूंकि अब उसे हमारी आवाज नहीं सुनाई देती थी इसलिए संख्याओं के लेकर वह भ्रम में रहने लगा। उसे हमारे बारे में कोई पता नहीं होता था। इस रणनीति में वह फंस गया और हमने उसे घेर लिया। इसके बाद वीरप्पन का खेल खत्म होना ही था।