फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Tamil Nadu SIR Row: TVK-DMK Walk Out of All-Party Meeting, Launch Protest Against Election Commission

तमिलनाडु में एसआईआर पर बवाल: सर्वदलीय बैठक से टीवीके-डीएमके का वॉकआउट; चुनाव आयोग के खिलाफ खोला मोर्चा

Fri, 23 Oct 2026 06:09 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Fri, 23 Oct 2026 06:09 PM IST
सार

तमिलनाडु में मतदाता सूची के पुनरीक्षण पर बवाल हो गया है। टीवीके, डीएमके और कांग्रेस समेत कई दलों ने सर्वदलीय बैठक से वॉकआउट कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांगा। डीएमके ने 74 लाख से अधिक नाम हटाए जाने का दावा किया, जबकि अन्नाद्रमुक ने करीब 97 लाख मतदाताओं की प्रविष्टियों की जांच की मांग की। लेकिन क्या चुनाव आयोग इन आरोपों पर जवाब देगा? क्या नई पुनरीक्षण प्रक्रिया से पहले कथित गलतियां सुधारी जाएंगी? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...

विज्ञापन
Tamil Nadu SIR Row: TVK-DMK Walk Out of All-Party Meeting, Launch Protest Against Election Commission
सर्वदलीय बैठक से टीवीके-डीएमके ने क्यों किया वॉकआउट? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

तमिलनाडु में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। शुक्रवार को चुनाव आयोग की ओर से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में सत्तारूढ़ टीवीके और मुख्य विपक्षी दल डीएमके समेत कई दलों ने विरोध जताते हुए बैठक से वॉकआउट कर दिया। इन दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। उनका आरोप है कि पिछली विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए गए और चुनाव आयोग ने पारदर्शिता बनाए नहीं रखी। हालांकि, अन्नाद्रमुक और भाजपा के प्रतिनिधि बैठक में शामिल रहे।

विज्ञापन


टीवीके और डीएमके ने बैठक से वॉकआउट क्यों किया?
तमिलनाडु के मुख्य निर्वाचन अधिकारी अर्चना पटनायक की अध्यक्षता में शुक्रवार को मतदाता सूची के विशेष सारांश पुनरीक्षण यानी एसएसआर पर चर्चा के लिए बैठक बुलाई गई थी। इसमें कई राजनीतिक दलों ने पिछली विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा उठाया। विरोध करने वाले दलों ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से बड़ी संख्या में लोगों के नाम हटाए गए, लेकिन चुनाव आयोग ने इस बारे में संतोषजनक जवाब नहीं दिया। इन दलों ने कहा कि पिछली प्रक्रिया की गलतियां ठीक किए बिना नई पुनरीक्षण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़नी चाहिए। इसी मांग को लेकर टीवीके, डीएमके और कांग्रेस समेत कई दलों के प्रतिनिधियों ने बैठक छोड़ दी।
विज्ञापन


मुख्य चुनाव आयुक्त से इस्तीफे की मांग क्यों उठी?
तमिलनाडु के ऊर्जा संसाधन और कानून मंत्री आर. निर्मल कुमार ने कहा कि पिछली पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं, खासकर युवाओं और महिलाओं के नाम मनमाने तरीके से मतदाता सूची से हटाए गए। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त से इन कथित चूकों की नैतिक जिम्मेदारी लेने और तत्काल इस्तीफा देने की मांग की। उनका कहना था कि जब तक पिछली प्रक्रिया की गलतियां ठीक नहीं की जातीं, तब तक नई विशेष सारांश पुनरीक्षण प्रक्रिया आगे बढ़ाना स्वीकार नहीं किया जा सकता। डीएमके के विधिक प्रकोष्ठ के संयुक्त सचिव आई. परंथामेन ने भी चुनाव आयोग की मौजूदा प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए।
विज्ञापन
विज्ञापन


डीएमके ने कितने मतदाताओं के नाम हटाए जाने का दावा किया?
डीएमके नेता आई. परंथामेन ने दावा किया कि एसआईआर की अंतिम प्रक्रिया के दौरान 74 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए। उन्होंने सवाल उठाया कि ये मतदाता कहां गए और क्या वे तमिलनाडु या भारत में नहीं रह रहे हैं। उनके मुताबिक, चुनाव आयोग ने इन सवालों का जवाब नहीं दिया। परंथामेन ने कहा कि मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त के नेतृत्व में होने वाली प्रक्रिया पर भरोसा नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि डीएमके सांसद पहले ही मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग करने और राष्ट्रपति को याचिका देने का फैसला कर चुके हैं। कांग्रेस के एक प्रतिनिधि ने भी आयोग पर भरोसे की कमी का हवाला देते हुए बैठक से बाहर जाने की पुष्टि की।

अन्नाद्रमुक ने 97 लाख मतदाताओं का मुद्दा कैसे उठाया?
जहां टीवीके, डीएमके और कांग्रेस ने बैठक का बहिष्कार किया, वहीं अन्नाद्रमुक और भाजपा के प्रतिनिधि इसमें शामिल हुए। अन्नाद्रमुक के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री डी. जयकुमार ने कहा कि बैठक से बाहर जाना या उसमें शामिल रहना किसी भी राजनीतिक दल का लोकतांत्रिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने ठोस तथ्य आयोग के सामने रखने के लिए बैठक में भाग लिया। जयकुमार के मुताबिक, तमिलनाडु में एसआईआर के दौरान करीब 97 लाख मतदाताओं के नाम चिह्नित हुए या प्रभावित हुए। इनमें करीब 26 लाख मृत मतदाता और 52 लाख ऐसे लोग शामिल थे, जिनके दूसरी जगह चले जाने की जानकारी थी। उन्होंने आयोग से इन सभी प्रविष्टियों की पारदर्शी जांच करने और सार्वजनिक रूप से बताने की मांग की कि कितने मामलों का सही तरीके से सत्यापन हुआ है।


चुनाव आयोग से आगे क्या मांग की गई?
अन्नाद्रमुक नेता जयकुमार ने कहा कि मतदाता सूची को लेकर लोगों के मन में संदेह हैं और इन्हें दूर करना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है। उन्होंने नवंबर में आयोजित होने वाले विशेष शिविरों को मानसून के मौसम को देखते हुए दूसरी तारीख पर रखने की मांग भी की। दूसरी ओर, कांग्रेस प्रतिनिधि ने कहा कि उनकी पार्टी मौजूदा आयोग नेतृत्व की अध्यक्षता में होने वाली बैठकों में तब तक हिस्सा नहीं लेगी, जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त इस्तीफा नहीं देते। बैठक का उद्देश्य मतदाता सूची के विशेष सारांश पुनरीक्षण पर चर्चा करना था, लेकिन पिछली एसआईआर प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों ने इसे राजनीतिक टकराव का मंच बना दिया। बैठक में शामिल भाजपा और अन्नाद्रमुक के प्रतिनिधियों ने अपनी बात रखी, जबकि विरोध करने वाले दलों ने आयोग की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल उठाए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed