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फिर सुर्खियों में तमिलनाडु लोकभवन: विजय सरकार में वन मंत्री के गंभीर आरोप, राज्यपाल के हस्तक्षेप पर क्या बोले?

Sun, 05 Jul 2026 09:12 PM IST
प्रशांत तिवारी पीटीआई, चेन्नई
पीटीआई, चेन्नई Published by: प्रशांत तिवारी Updated Sun, 05 Jul 2026 09:12 PM IST
सार

VCK ने तमिलनाडु में ऑनर किलिंग रोकने के लिए अलग कानून बनाने की मांग दोहराते हुए दावा किया कि इस दिशा में जल्द सकारात्मक प्रगति होगी। वहीं मंत्री ने गवर्नर राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर पर लोकतांत्रिक सरकार के समानांतर प्रशासन चलाने और संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन करने का आरोप लगाया।

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Tamil Nadu Raj Bhavan in headlines again Serious allegations by Forest Minister in Vijai government
सामाजिक न्याय मंत्री वन्नी अरासु - फोटो : वन्नी अरासु एक्स पोस्ट

विस्तार

विदुथलाई चिरुथैगल काची (VCK) ने रविवार को तमिलनाडु में ऑनर किलिंग की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए अलग कानून बनाने की अपनी मांग दोहराई। पार्टी ने कहा कि इस दिशा में विधायी स्तर पर प्रयास जारी हैं और जल्द ही सकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं।

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ऑनर किलिंग पर सख्त कानून की वकालत
पत्रकारों से बातचीत में सामाजिक न्याय मंत्री वन्नी अरासु ने कहा कि VCK का स्पष्ट और अडिग रुख है कि ऑनर किलिंग जैसी जघन्य घटनाओं को पूरी तरह समाप्त किया जाना चाहिए। ऐसे अपराधों को किसी भी स्थिति में न तो स्वीकार किया जा सकता है और न ही उन्हें किसी तरह का संरक्षण मिलना चाहिए। उन्होंने कहा, 'विधानसभा में अपने पहले ही भाषण के दौरान मैंने ऑनर किलिंग रोकने के लिए एक अलग और समर्पित कानून बनाने की मांग उठाई थी। VCK ने पहले भी इस सामाजिक बुराई के खिलाफ कई आंदोलन और विरोध प्रदर्शन किए हैं।'
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'जल्द बनेगा समर्पित कानून'
वन्नी अरासु ने भरोसा जताते हुए कहा, 'बहुत जल्द आप ऑनर किलिंग के खिलाफ एक समर्पित कानून बनते देखेंगे। जब ऐसा होगा, तब आप भी इस पहल की सराहना करेंगे।'
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गवर्नर पर संविधान की अनदेखी का आरोप
तमिलनाडु के गवर्नर राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर की कार्यशैली पर सवाल उठाए जाने के जवाब में मंत्री ने कहा कि उनकी गतिविधियां संवैधानिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि गवर्नर लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार के समानांतर प्रशासन चलाने की कोशिश कर रहे हैं, जो संविधान की भावना के खिलाफ है।

'मुख्यमंत्री और कैबिनेट का सम्मान करना चाहिए'
मंत्री ने कहा, 'गवर्नर को लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद का सम्मान करना चाहिए। इसके बजाय वे समानांतर सरकार चलाने की कोशिश कर रहे हैं और जनता से सीधे उनके पास शिकायतें और याचिकाएं देने की अपील कर रहे हैं। यह संवैधानिक परंपराओं और नियमों के विपरीत है।'


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मदुरै दौरे के बाद बढ़ा राजनीतिक विवाद

गौरतलब है कि हाल ही में गवर्नर राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने मदुरै में वरिष्ठ जिला अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की थी। इसके अलावा उन्होंने नागरिकों से लोक भवन में आकर अपनी शिकायतें और याचिकाएं सौंपने की अपील भी की थी। इसके बाद राज्य के विभिन्न राजनीतिक दलों ने उनकी भूमिका को लेकर सवाल उठाए और आलोचना की।

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