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Tamil Nadu: 'जीत का भरोसा तो स्टालिन अकेले क्यों नहीं लड़ रहे चुनाव', DMK में सीट बंटवारे पर TVK ने उठाए सवाल

Fri, 13 Feb 2026 01:09 AM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई Published by: हिमांशु चंदेल Updated Fri, 13 Feb 2026 01:09 AM IST
सार

तमिलनाडु में टीवीके महासचिव आधव अर्जुना ने डीएमके गठबंधन की सीट शेयरिंग पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि जीत का दावा करने वाली डीएमके कांग्रेस को सिर्फ 25 सीटें क्यों दे रही है। सीट बंटवारे में देरी और सहयोगी दलों को कम सम्मान मिलने का आरोप भी लगाया।

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Tamil Nadu politics TVK attacks DMK cogress alliance over seat sharing askwhy Stalin not contesting all seats
टीवीके के आधव अर्जुन और स्टालिन - फोटो : ANI

विस्तार

तमिलनाडु में चुनावी हलचल के बीच गठबंधन राजनीति को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। सलेम में टीवीके के महासचिव आधव अर्जुना ने डीएमके नीत गठबंधन और सीट बंटवारे की प्रक्रिया पर खुला सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि अगर डीएमके को अपनी जीत पर इतना भरोसा है तो वह सहयोगी दलों को सीमित सीटें क्यों दे रही है।
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आधव अर्जुना ने कहा कि डीएमके अगर 200 सीट जीतने का दावा कर रही है, तो कांग्रेस को सिर्फ 25 सीटों तक सीमित क्यों रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब वोट मुख्यमंत्री और सरकारी योजनाओं के नाम पर मांगे जा रहे हैं, तो डीएमके को सभी सीटों पर खुद अकेले चुनाव लड़ना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पहले जयललिता ने भी इसी तरह आत्मविश्वास के साथ अकेले चुनाव लड़ा था।
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सीट बंटवारे में देरी पर उठाए सवाल
टीवीके नेता ने गठबंधन वार्ता में देरी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सीट शेयरिंग पर बातचीत देर से शुरू हुई और वह भी तब जब दिल्ली में कांग्रेस नेताओं ने आवाज उठाई। उन्होंने आशंका जताई कि नामांकन से ठीक पहले छोटी पार्टियों को कम सीटें देकर दबाव बनाया जा सकता है। असहमति जताने पर उन्हें राजनीतिक रूप से अलग-थलग करने की कोशिश भी हो सकती है।
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सहयोगी दलों को सम्मान नहीं मिलने का आरोप
आधव अर्जुना ने आरोप लगाया कि चुनाव के समय कांग्रेस, सीपीआई, वीसीके और मुस्लिम लीग जैसे सहयोगी दल पूरी मेहनत करते हैं, लेकिन जीत के बाद उन्हें सरकार में उचित प्रतिनिधित्व और सम्मान नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि मंत्री पद और फैसलों में सहयोगियों की भागीदारी सीमित कर दी जाती है। इससे गठबंधन सहयोग कमजोर होता है।

उन्होंने कहा कि करुणानिधि और जयललिता के निधन के बाद तमिलनाडु की राजनीति बदल गई है। पहले डीएमके और एआईएडीएमके मिलकर 70 से 75 प्रतिशत वोट शेयर लेते थे, लेकिन अब स्थिति अलग है। उन्होंने दावा किया कि टीवीके ने अकेले 27 प्रतिशत से ज्यादा वोट शेयर पार किया है। उनके मुताबिक सहयोगी दलों के बिना डीएमके 22 प्रतिशत से आगे नहीं बढ़ सकती। उन्होंने कहा कि जनता बदलाव चाहती है और टीवीके नेतृत्व ही यह विकल्प दे सकता है।

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