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Tamil Nadu: राज्यपाल के धर्मनिरपेक्षता वाले बयान पर हंगामा, कांग्रेस ने की बर्खास्त करने की मांग

Tue, 24 Sep 2024 01:42 AM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई Published by: नितिन गौतम Updated Tue, 24 Sep 2024 01:42 AM IST
सार

कांग्रेस नेता की टिप्पणी राज्यपाल आरएन रवि के उस बयान के बाद आई है जिसमें उन्होंने कहा था कि 'धर्मनिरपेक्षता एक यूरोपीय अवधारणा है जो चर्च और राजा के बीच संघर्ष के बाद विकसित हुई जबकि भारत एक धर्म-केंद्रित राष्ट्र है।'

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तमिलाडु के राज्यपाल आर एन रवि - फोटो : एएनआई

विस्तार

तमिलनाडु के राज्यपाल आर एन रवि के बयान पर विवाद हो गया है। दरअसल राज्यपाल आर एन रवि ने अपने एक बयान में कहा है कि धर्मनिरपेक्षता एक यूरोपीय अवधारणा है, जो चर्च और राजा के बीच संघर्ष के बाद विकसित हुई। उन्होंने कहा कि भारत एक धर्म केंद्रित राष्ट्र है। राज्यपाल के इस बयान का विरोध शुरू हो गया है। कांग्रेस ने राज्यपाल को बर्खास्त करने की मांग की है। 
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कांग्रेस ने बयान को बताया अपमानजनक
कांग्रेस ने सोमवार को तमिलनाडु के राज्यपाल आर एन रवि की टिप्पणी को अपमानजनक और अस्वीकार्य बताया और उन्हें तत्काल बर्खास्त करने की मांग की। कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जो करवाना चाहते हैं, वही दोहरा रहे हैं। रमेश ने कहा, 'यह व्यक्ति, जिसने संविधान की शपथ ली है और जो ऐसी टिप्पणी के बाद भी एक संवैधानिक पदाधिकारी बना हुआ है, उन्हें तुरंत बर्खास्त कर दिया जाना चाहिए। यह बेहद अपमानजनक है।' कांग्रेस नेता ने कहा कि यह आर एन रवि का कोई पहला अपमानजनक और अस्वीकार्य बयान नहीं है बल्कि वह पहले भी विवादित बयान देते रहे हैं।   
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राज्यपाल के किस बयान पर हुआ विवाद
कांग्रेस नेता की टिप्पणी राज्यपाल आरएन रवि के उस बयान के बाद आई है जिसमें उन्होंने कहा था कि 'धर्मनिरपेक्षता एक यूरोपीय अवधारणा है जो चर्च और राजा के बीच संघर्ष के बाद विकसित हुई जबकि भारत एक धर्म-केंद्रित राष्ट्र है और इसलिए, यह संविधान का हिस्सा नहीं था बल्कि आपातकाल के दौरान 'एक असुरक्षित प्रधानमंत्री' द्वारा जोड़ा गया था।' तमिलनाडु के राज्यपाल ने रविवार को कन्याकुमारी जिले में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि 'देश के लोगों के साथ बहुत सारे धोखाधड़ी किए गए हैं और उनमें से एक धर्मनिरपेक्षता की गलत व्याख्या है।' 
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राज्यपाल आर एन रवि ने अपने बयान में दावा किया कि 'स्वतंत्रता के समय, जब संविधान का मसौदा तैयार किया जा रहा था, तो उस वक्त धर्मनिरपेक्षता पर चर्चा हुई और संविधान सभा ने इसे यह कहते हुए खारिज कर दिया कि भारत एक धर्म-केंद्रित देश है और यहां यूरोप जैसा कोई संघर्ष नहीं हुआ है।'

 
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