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EWS Quota: कोर्ट के फैसले पर चर्चा के लिए तमिलनाडु सरकार ने बुलाई दलों की बैठक, एमके स्टालिन करेंगे अध्यक्षता
Tue, 08 Nov 2022 04:50 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
Published by: निर्मल कांत
Updated Tue, 08 Nov 2022 04:50 PM IST
सार
राज्य सरकार की ओर से जारी एक विज्ञप्ति के मुताबिक, ईडब्ल्यूएस आरक्षण सामाजिक न्याय और समानता के खिला है। सभी विधायी दल के नेताओं की बैठक में इस मुद्दे पर कार्रवाई के अगले कदम पर चर्चा होगी।
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- फोटो : facebook/DDNewsLive
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए दस फीसदी आरक्षण बरकरार रखने का फैसला लिया है। इसके बाद मंगलवार को तमिलनाडु की सरकार ने घोषणा की है कि इस फैसले के बाद वह अगले कदम पर चर्चा के लिए 12 नवंबर को विभिन्न दलों की बैठक बुलाएगी।
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बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन करेंगे। राज्य सरकार की ओर से जारी एक विज्ञप्ति के मुताबिक, ईडब्ल्यूएस आरक्षण सामाजिक न्याय और समानता के खिला है। सभी विधायी दल के नेताओं की बैठक में इस मुद्दे पर कार्रवाई के अगले कदम पर चर्चा होगी।
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इससे पहले स्टालिन ने कहा था कि ईडब्ल्यूएस पर सुप्रीम का फैसला सदियों से चले आ रहे सामाजिक संघर्ष के लिए एक झटका है।
सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में क्या कहा
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अनारक्षित वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर तबके को 10 फीसदी आरक्षण देने वाले 103वें संविधान संशोधन की संवैधानिक वैधता पर मुहर लगा दी। कोर्ट ने कहा कि यह संविधान संशोधन किसी भी तरह से असंवैधानिक नहीं है। जस्टिस दिनेश माहेश्वरी ने कहा कि आरक्षण के लिए 50 फीसदी की तय सीमा के आधार पर भी ईडब्ल्यूएस आरक्षण मूल ढांचे का उल्लंघन नहीं है, क्योंकि 50 फीसदी आरक्षण की सीमा अपरिवर्तनशील नहीं है।
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ईडब्ल्यूएस आरक्षण के साथ केंद्रीय संस्थानों में आरक्षण की कुल सीमा 59.50% तक पहुंच गई है। कोर्ट में जस्टिस दिनेश माहेश्वरी, जस्टिस बेला एम त्रिवेदी और जस्टिस जेबी पारदीवाला ने आर्थिक आरक्षण को सही ठहराया, जबकि चीफ जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस रवींद्र भट्ट ने इसके विरोध में अपनी राय रखी।
संविधान का 103वां संशोधन क्या है?
जनवरी 2019 में देश में ईडब्ल्यूएस आरक्षण की अधिसूचना जारी हुई। संविधान के 103वें संशोधन के आधार पर कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग ने यह अधिसूचना जारी की। इसके जरिए नौकरी और शिक्षण संस्थानों में प्रवेश में आरक्षण दिया गया। इसका लाभ उन लोगों को मिलता है, जो अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग आरक्षण के दायरे में नहीं आते और जिनके परिवार की सकल वार्षिक आय आठ लाख से कम है। हालांकि, इसके साथ ही आरक्षण को लेकर कुछ शर्ते भी थीं।
ईडब्ल्यूएस आरक्षण का फायदा किन्हें मिलेगा?
ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट के लिए वे लोग आवेदन कर सकते हैं, जिनकी सालाना पारिवारिक आमदनी 8 लाख रुपये या उससे कम है। इसमें स्रोतों में सिर्फ सैलरी ही नहीं, कृषि, व्यवसाय और अन्य पेशे से मिलने वाली आय भी शामिल हैं। वहीं, अगर कोई व्यक्ति गांव में रहता है। ऐसे में उसके पास पांच एकड़ से कम आवासीय भूमि होनी चाहिए, साथ ही 200 वर्ग मीटर से अधिक आवासीय जमीन नहीं होनी चाहिए।
शहरों में रहने वाले लोगों के पास भी 200 वर्ग मीटर से अधिक आवासीय जमीन नहीं होनी चाहिए। ईडब्ल्यूएस के पात्र के पास आरक्षण का दावा करने के लिए 'आय और संपत्ति प्रमाण पत्र' होना जरूरी है। यह प्रमाण पत्र तहसीलदार या उससे ऊपर पद के राजपत्रित अधिकारी ही जारी करते हैं। इसकी वैधता एक साल तक ही रहती है।
अगर आप ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट के लिए आवेदन करने जा रहे हैं। ऐसे में आपके पास पहचान पत्र, राशन कार्ड, स्वयं घोषित प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, आयु प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, मूल निवास प्रमाण पत्र, मोबाइल नंबर, पैन कार्ड और दूसरे दस्तावेजों की जरूरत होगी।