फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Tamil Nadu Dr. Badrinath who enlightened millions of eyes is no more brought big changes in field of eye care

Tamil Nadu: नहीं रहे लाखों आंखों को रोशन करने वाले डॉ. बद्रीनाथ, नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में लाए बड़े बदलाव

Wed, 22 Nov 2023 07:38 AM IST
यशोधन शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई Published by: यशोधन शर्मा Updated Wed, 22 Nov 2023 07:38 AM IST
सार

एक आम आदमी की तरह जीवन जीने वाले डॉ. बद्रीनाथ ने निधन से पहले निर्देश दे दिए थे कि उनके लिए विशेष आयोजन न हों। बढ़ा-चढ़ा कर संस्कार न निभाए जाएं। निधन पर दुख जताने के लिए शंकर नेत्रालय में एक सेकंड के लिए भी काम न रुके।

विज्ञापन
Tamil Nadu Dr. Badrinath who enlightened millions of eyes is no more brought big changes in field of eye care
Dr. badrinath - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

लाखों लोगों को सस्ती नेत्र चिकित्सा देने वाले चेन्नई के शंकर नेत्रालय के संस्थापक और जाने-माने विट्रियोरेटिनल शल्य-चिकित्सक डॉ. एसएस बद्रीनाथ (83) का मंगलवार को अपने घर में निधन हो गया। वह काफी समय से बीमार थे। उन्हें भारत में नेत्र चिकित्सा क्षेत्र में बड़े बदलाव लाने के लिए जाना जाता है। डॉ. बद्रीनाथ के परिवार में उनकी पत्नी व बालरोग विशेषज्ञ डॉ. वसंती बद्रीनाथ और दो बेटे अनंत व शेषु हैं।

विज्ञापन


बचपन में एक रिश्तेदार डॉ. बद्रीनाथ के घर रहने आया, वह दृष्टिहीन था। उसके साथ गुजारे समय ने बद्रीनाथ को दृष्टिहीन लोगों की मुश्किलों के बारे में जानने का मौका दिया। उनके मन में उनके लिए काम करने का गहरा जज्बा पैदा हुआ। 
विज्ञापन


कह गए थे-दुख जताने के लिए काम न रोकना
एक आम आदमी की तरह जीवन जीने वाले डॉ. बद्रीनाथ ने निधन से पहले निर्देश दे दिए थे कि उनके लिए विशेष आयोजन न हों। बढ़ा-चढ़ा कर संस्कार न निभाए जाएं। निधन पर दुख जताने के लिए शंकर नेत्रालय में एक सेकंड के लिए भी काम न रुके। किसी की इच्छा हो तो हाथ में काली पट्टी बांध सकता है, लेकिन काम करता रहे। अंतिम संस्कार भी साधारण तरीके से करें, जैसा साधारण लोगों का किया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


यूं रहा सफर
24 फरवरी 1940 को चेन्नई (तत्कालीन मद्रास) में जन्मे सेंगामेदी श्रीनिवास बद्रीनाथ ने यहीं से स्कूली शिक्षा ली। उन्होंने 1962 में मद्रास मेडिकल कॉलेज से पढ़ाई की और फिर अमेरिका के न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय के ग्रासलैंड चिकित्सालय स्थित पीजी मेडिकल स्कूल व ब्रुकलिन नेत्र चिकित्सालय से पढ़कर 1968 में नेत्र चिकित्सक बने। 1970 में भारत लौटे।

1974 में कांची मठ के आचार्य जयेंद्र सरस्वती से मुलाकात के बाद उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया। आध्यात्मिक गुरु चंद्रशेखरेंद्र सरस्वती स्वामिगल के मोतियाबिंद का ऑपरेशन करने के दौरान वह शंकर मठ के संपर्क में आए। उनकी प्रेरणा से 1978 में डॉ. बद्रीनाथ ने शंकर नेत्रालय की स्थापना की। उन्हें पद्मश्री और पद्म भूषण सम्मान दिए गए।

अमिट छाप छोड़ी
पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि डॉ. एसएस ब्रदीनाथ के निधन पर गहरा दुख हुआ है। वह  शंकर नेत्रालय के संस्थापक होने के साथ विजनरी नेत्र चिकित्सक भी थे। नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में उनके योगदान और समाज के प्रति उनकी अथक सेवा ने अमिट छाप छोड़ी है। उनके परिजनों और प्रियजनों के प्रति सांत्वना। उनका काम कई पीढ़ियों को प्रेरित करेगा। 


ये मिले सम्मान
1983: पद्श्री, 1991: डॉ. बीसी रॉय राष्ट्रीय पुरस्कार, 1992: पॉल हैरिस फेलो अवॉर्ड, 1999 : पद्म भूषण, 2009: उत्कृष्टता के लिए वी कृष्णमूर्ति पुरस्कार, 2009: मद्रास सिटी ऑप्थल्मोलॉजिकल एसोसिएशन लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड, 2014: लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड, विट्रेओ रेटिनल सोसाइटी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed