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तबरेज अंसारी मॉब लिंचिंग केस: गिरफ्तारी और मौत के बीच चार दिन में क्या हुआ?

Thu, 27 Jun 2019 04:47 AM IST
गौरव द्विवेदी अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव द्विवेदी Updated Thu, 27 Jun 2019 04:47 AM IST
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Tabrez Ansari Mob Lynching Case: What happened in four days between death and arrest
चोरी के शक में 22 साल के शख्स की पिटाई - फोटो : ANI

झारखंड के सरायकेला जिले में कदमडीह गांव के मोहम्मद तबरेज अंसारी के साथ कथित तौर पर 'मॉब लिंचिंग' की घटना हुई। चोरी के आरोप में पकड़े जाने के बाद ग्रामीणों ने उसे पकड़कर पीटा। उससे जबरदस्ती ‘जय श्री राम’ के नारे लगवाये गए और इस दौरान उसके साथ मारपीट की गई। कथित तौर पर इसी पिटाई के कारण बाद में उसकी मौत हो गई। पिटाई के समय का एक विडियो भी सामने आया है जो इस घटना की पुष्टि करता है। लेकिन क्या इस घटना का पूरा सच यही है? या इस कहानी को जबरदस्ती मॉब लिंचिंग का रूप दिया जा रहा है और इसके पीछे 'कुछ' छिपाने की कोशिश की जा रही है? एक उच्च अधिकारी के द्वारा राज्य प्रशासन को भेजी गई रिपोर्ट इसी तरफ इशारा करती है। 

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दरअसल, घटना का विडियो वायरल होने के बाद विपक्ष ने इस घटना की कड़ी आलोचना की। चालू संसद सत्र के दौरान कुछ सांसदों ने इस मामले पर तीखी प्रतिक्रिया दी। इसके बाद राज्य प्रशासन सक्रिय हुआ और घटना में लापरवाही बरतने के कारण कुछ अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड भी कर दिया गया। इसी दौरान राज्य सरकार के गृहसचिव ने स्थानीय अधिकारियों से इस मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। सरायकेला जिले के उपायुक्त के द्वारा गृह सचिव को 24 जून को जो रिपोर्ट भेजी गई है, वह इस घटना पर कई अहम सवाल खड़े करती है। 

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यह है घटनाक्रम


जानकारी के मुताबिक, मोहम्मद तबरेज अंसारी 17/18 जून की रात अपने दो साथियों नुमैर अली और शेख इरफान के साथ कमल महतो नाम के आदमी के घर में चोरी की नीयत से घुसा था। इसी दौरान घर के लोग जग गये और उन्होंने शोर मचाया। इसके बाद ग्रामीणों ने चोरों को पकड़ने का प्रयास किया। इस कोशिश में मोहम्मद तबरेज आलम ग्रामीणों के हाथ लग गया जबकि उसके दो साथी नुमैर अली और इरफान वहां से भागने में कामयाब रहे। लगभग 2:30 बजे रात घटी इस घटना के बाद ग्रामीणों ने तबरेज की पिटाई की। 

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पुलिस को इसकी सूचना मिली और लगभग पांच बजे सुबह तक वह घटनास्थल पर पहुंच गई। पुलिस ने तबरेज को ग्रामीणों से बचाया। उसे थाने लाया और इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई। तबरेज के पास से मोटरसाइकिल और कुछ अन्य चोरी का सामान पकड़े जाने की बात भी कही गई है। इस दौरान उसकी प्राथमिक चिकित्सा भी कराई गई थी। लेकिन इस दौरान उसे कोई गंभीर चोट लगने की बात सामने नहीं आई थी। 

18 जून को ही धात की डीह गांव के लोगों के द्वारा तबरेज और उसके दो साथियों के विरुद्ध चोरी की प्राथमिकी भी दर्ज करायी गई थी। इसके बाद तबरेज को सदर अस्पताल ले जाकर उसकी एमएलसी भी कराई गई। वहां भी उसे किसी गंभीर चोट लगने की बात सामने नहीं आई थी। इसके बाद उसे न्यायिक अधिकारी के समक्ष पेश कर जेल भेज दिया गया था। जानकारी के मुताबिक 22 जून को सुबह अचानक तबरेज की तबीयत खराब हो गई और उसे अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

चार दिनों में क्या हुआ


इस घटना में अहम सवाल यह उठाया जा रहा है कि तबरेज की पिटाई का मामला 18 जून को सामने आया था। उसके बाद पहले उसकी प्राथमिक चिकित्सा और बाद में सदर अस्पताल में चिकित्सा भी कराई गई थी। इस दौरान उसे ऐसी किसी गंभीर चोट लगने की बात अब तक सामने नहीं आई है जिससे उसकी जान को खतरा हो सकता था। ऐसे में सवाल उठाया जा रहा है कि चार दिनों के बाद अचानक उसकी तबीयत खराब कैसे हुई जो उसकी मौत का कारण बनी। (22 जून को ही सरायकेला-खरसावां के कार्यपालक दंडाधिकारी के सामने तबरेज के शव का पोस्ट मोर्टेम किया गया। पोस्ट मोर्टेम की विडियोग्राफी कराई गई। इसके बाद तबरेज का शव उसके परिवार वालों को सौंप दिया गया था।)

तबरेज के परिवार वालों ने की शिकायत


घटना में मृतक तबरेज के परिवार वालों ने धात की डीह गांव के पप्पू मंडल और अन्य के विरुद्ध लिंचिंग करने की शिकायत दर्ज कराई गई थी। 22 जून को ही पप्पू मंडल को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इसके अगले ही दिन 23 जून को सरायकेला के पुलिस अधीक्षक ने इस मामले की विस्तृत जांच की थी और घटना पर लापरवाही बरतने के कारण चंद्रमोहन उरांव और विपिन बिहारी सिंह को निलंबित कर दिया गया था। 24 जून की सुबह इस घटना के अन्य आरोपियों कमल महतो, सोनामु प्रधान, प्रेम चंद माहली और भीम मंडल को भी गिरफ्तार कर लिया गया।


भाजपा की सधी प्रतिक्रिया


मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी भी इस पर सधी हुई प्रतिक्रिया दे रही है। झारखंड निवासी भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुदेश वर्मा ने इस घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि ‘जय श्री राम’ न कहने पर पिटाई होने का मामला बेहद निराशाजनक है और लोकतंत्र में किसी को भी ऐसा करने की इजाजत नहीं दी जा सकती। उन्होंने कहा कि घटना में जो भी दोषी होंगे उन्हें कानून के मुताबिक कड़ी सजा दी जायेगी। अब तक 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। 

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