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EFTA: स्विट्जरलैंड ने भारत-ईएफटीए मेगा व्यापार समझौते को दी हरी झंडी, अक्तूबर में लागू करने की तैयारी
Fri, 11 Jul 2025 09:41 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: पवन पांडेय
Updated Fri, 11 Jul 2025 09:41 PM IST
सार
भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के बीच ऐतिहासिक व्यापार समझौता अब लागू होने के करीब है। स्विट्जरलैंड ने इस समझौते (टीईपीए - ट्रेड एंड इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट) की अंतिम मंजूरी दे दी है। स्विट्जरलैंड की भारत में राजदूत माया तिस्साफी ने इसे भारत-स्विट्जरलैंड संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया है।
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माया तिस्साफी, भारत में स्विटजरलैंड की राजदूत
- फोटो : X @SwissAmbIND
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विस्तार
स्विट्जरलैंड ने भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के बीच एक ऐतिहासिक व्यापार समझौते के समर्थन की प्रक्रिया पूरी कर ली है। यह समझौता व्यापार बाधाओं को कम करेगा और स्विस निर्यात के लिए भारतीय बाजार को महत्वपूर्ण रूप से खोलेगा। भारत में स्विट्जरलैंड की राजदूत माया तिस्साफी ने स्विट्जरलैंड की ओर से इस व्यापार समझौते को अपने देश के लिए महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया।
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100 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश करने की योजना- तिस्साफी
माया तिस्साफी ने कहा कि व्यापार और आर्थिक भागीदारी समझौता (टीईपीए) अक्तूबर में लागू होने की उम्मीद है। इस विशाल व्यापार समझौते के तहत, ईएफटीए के सदस्य आइसलैंड, लिकटेंस्टीन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड अगले 15 वर्षों में भारत में 100 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश करने की योजना बना रहे हैं। आइसलैंड, लिकटेंस्टीन और नॉर्वे पहले ही इस व्यापार समझौते का समर्थन कर चुके हैं।
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भारत और स्विट्जरलैंड के संबंध हो रहे मजबूत- तिस्साफी
वर्तमान में स्विट्जरलैंड भारत में 12वां सबसे बड़ा निवेशक है। 2000 में जहां उसका निवेश ₹5,935 करोड़ था, वह 2024 में बढ़कर ₹1.07 लाख करोड़ से अधिक हो गया है। राजदूत तिस्साफी के अनुसार, 'यह समझौता सभी के लिए फायदे का सौदा है।' भारत और स्विट्जरलैंड 77 वर्षों से मैत्रीपूर्ण संबंधों में जुड़े हैं, जो अब और मजबूत हो रहे हैं।
'भारत में दस लाख नौकरियां पैदा होंगी'
माया तिस्साफी ने कहा, ईएफटीए के सदस्य देश 15 वर्षों में भारत में 100 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश करेंगे। इससे दस लाख नौकरियां पैदा होंगी। यह सभी संबंधित देशों के लिए जीत वाली स्थिति होगी। उन्होंने कहा, टीईपीए हमारे देशों के बीच दीर्घकालिक सहयोग का मार्ग प्रशस्त करता है। टैरिफ में कमी के अलावा, यह सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने, बौद्धिक संपदा सुरक्षा को बढ़ाने और स्थायी व्यापार प्रथाओं के लिए एक ढांचा स्थापित करने में मदद करेगा।
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भारत ने चार देशों के साथ टीईपीए पर हस्ताक्षर किए
मार्च में, चार देशों के यूरोपीय समूह (जिसमें आइसलैंड, नॉर्वे, लिकटेंस्टीन और स्विट्जरलैंड शामिल हैं) ने लगभग 16 वर्षों की बातचीत के बाद भारत के साथ टीईपीए पर हस्ताक्षर किए। गुरुवार आधी रात (स्विस समय) को, ईएफटीए -भारत टीईपीए के लिए जनमत संग्रह की समय सीमा आधिकारिक रूप से समाप्त हो गई। माया तिस्साफी ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, जनमत संग्रह न होने के कारण, स्विस लोगों ने इस समझौते पर अपनी मौन स्वीकृति व्यक्त की है। स्विट्जरलैंड की ओर से व्यापार समझौते का समर्थन स्विस काउंसिल ऑफ स्टेट्स की मंजूरी के सात महीने से अधिक समय बाद हुआ।
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100 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश करने की योजना- तिस्साफी
माया तिस्साफी ने कहा कि व्यापार और आर्थिक भागीदारी समझौता (टीईपीए) अक्तूबर में लागू होने की उम्मीद है। इस विशाल व्यापार समझौते के तहत, ईएफटीए के सदस्य आइसलैंड, लिकटेंस्टीन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड अगले 15 वर्षों में भारत में 100 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश करने की योजना बना रहे हैं। आइसलैंड, लिकटेंस्टीन और नॉर्वे पहले ही इस व्यापार समझौते का समर्थन कर चुके हैं।
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भारत और स्विट्जरलैंड के संबंध हो रहे मजबूत- तिस्साफी
वर्तमान में स्विट्जरलैंड भारत में 12वां सबसे बड़ा निवेशक है। 2000 में जहां उसका निवेश ₹5,935 करोड़ था, वह 2024 में बढ़कर ₹1.07 लाख करोड़ से अधिक हो गया है। राजदूत तिस्साफी के अनुसार, 'यह समझौता सभी के लिए फायदे का सौदा है।' भारत और स्विट्जरलैंड 77 वर्षों से मैत्रीपूर्ण संबंधों में जुड़े हैं, जो अब और मजबूत हो रहे हैं।
'भारत में दस लाख नौकरियां पैदा होंगी'
माया तिस्साफी ने कहा, ईएफटीए के सदस्य देश 15 वर्षों में भारत में 100 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश करेंगे। इससे दस लाख नौकरियां पैदा होंगी। यह सभी संबंधित देशों के लिए जीत वाली स्थिति होगी। उन्होंने कहा, टीईपीए हमारे देशों के बीच दीर्घकालिक सहयोग का मार्ग प्रशस्त करता है। टैरिफ में कमी के अलावा, यह सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने, बौद्धिक संपदा सुरक्षा को बढ़ाने और स्थायी व्यापार प्रथाओं के लिए एक ढांचा स्थापित करने में मदद करेगा।
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भारत ने चार देशों के साथ टीईपीए पर हस्ताक्षर किए
मार्च में, चार देशों के यूरोपीय समूह (जिसमें आइसलैंड, नॉर्वे, लिकटेंस्टीन और स्विट्जरलैंड शामिल हैं) ने लगभग 16 वर्षों की बातचीत के बाद भारत के साथ टीईपीए पर हस्ताक्षर किए। गुरुवार आधी रात (स्विस समय) को, ईएफटीए -भारत टीईपीए के लिए जनमत संग्रह की समय सीमा आधिकारिक रूप से समाप्त हो गई। माया तिस्साफी ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, जनमत संग्रह न होने के कारण, स्विस लोगों ने इस समझौते पर अपनी मौन स्वीकृति व्यक्त की है। स्विट्जरलैंड की ओर से व्यापार समझौते का समर्थन स्विस काउंसिल ऑफ स्टेट्स की मंजूरी के सात महीने से अधिक समय बाद हुआ।