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रिपब्लिक डे परेड: पहली बार शामिल होगी देशी बोफोर्स
ब्यूरो/एजेंसी, भोपाल
Updated Mon, 23 Jan 2017 06:10 PM IST
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भारत की पहली स्वदेशी और लंबी दूरी तक मार करने में सक्षम ‘धनुष’ तोप पहली दफा राजपथ में आयोजित होने वाली गणतंत्र दिवस परेड में अपना शौर्य दिखाएगी। देसी बोफोर्स के नाम से मशहूर धनुष को जबलपुर स्थित गन कैरिज फैक्ट्री (जीसीएफ) ने निर्मित किया है। 155 एमएम कैलिबर वाली इस देसी बोफोर्स की कीमत करीब 14.50 करोड़ रुपये है।
जीसीएफ के ज्वाइंट जनरल मैनेजर एवं पीआरओ संजय श्रीवास्तव ने बताया कि रक्षा विभाग के शक्ति प्रदर्शन के तहत नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस परेड में ‘धनुष’ शामिल होगी। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि धनुष की तुलना दुनिया के दूसरे देशों की ओर से इस्तेमाल की जाने वाली नवीनतम हथियार प्रणाली से की जाती है। बेहतरीन तकनीक से लैस धनुष की मारक क्षमता 38 किमी है, जो आयत की गईं विदेशी बोफोर्स तोपों से भी ज्यादा है।
उन्होंने बताया कि धनुष प्रोजेक्ट को ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों के अलावा भेल, सेल जैसे सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों और कई निजी क्षेत्र की कंपनियों का सक्रिय सहयोग मिला। कोलकाता स्थित ऑर्डिनेंस फेक्ट्री बोर्ड (ओएफबी) ने 1980 के दशक के बोफोर्स करार के तहत हस्तांतरित तकनीकी का अध्ययन करने के बाद धनुष को विकसित किया है। विवाद के चलते स्वीडिश बोफोर्स कंपनी (अब ब्रिटेन के बीएई सिस्टम के स्वामित्व में) भारत को 39 कैलिबर वाली 155 एमएम होवित्जर तकनीक हस्तांतरण नहीं कर पाई थी।
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जीसीएफ के ज्वाइंट जनरल मैनेजर एवं पीआरओ संजय श्रीवास्तव ने बताया कि रक्षा विभाग के शक्ति प्रदर्शन के तहत नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस परेड में ‘धनुष’ शामिल होगी। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि धनुष की तुलना दुनिया के दूसरे देशों की ओर से इस्तेमाल की जाने वाली नवीनतम हथियार प्रणाली से की जाती है। बेहतरीन तकनीक से लैस धनुष की मारक क्षमता 38 किमी है, जो आयत की गईं विदेशी बोफोर्स तोपों से भी ज्यादा है।
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उन्होंने बताया कि धनुष प्रोजेक्ट को ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों के अलावा भेल, सेल जैसे सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों और कई निजी क्षेत्र की कंपनियों का सक्रिय सहयोग मिला। कोलकाता स्थित ऑर्डिनेंस फेक्ट्री बोर्ड (ओएफबी) ने 1980 के दशक के बोफोर्स करार के तहत हस्तांतरित तकनीकी का अध्ययन करने के बाद धनुष को विकसित किया है। विवाद के चलते स्वीडिश बोफोर्स कंपनी (अब ब्रिटेन के बीएई सिस्टम के स्वामित्व में) भारत को 39 कैलिबर वाली 155 एमएम होवित्जर तकनीक हस्तांतरण नहीं कर पाई थी।
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