{"_id":"592453b04f1c1b2d2c537221","slug":"swadesi-jagran-manch-writes-to-pm-in-protest-against-gm-mustard","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"PM मोदी के दर पहुंची जीएम सरसों की रार, स्वदेशी जागरण मंच ने लिखा पत्र","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
PM मोदी के दर पहुंची जीएम सरसों की रार, स्वदेशी जागरण मंच ने लिखा पत्र
संजय मिश्र/ नई दिल्ली
Updated Tue, 23 May 2017 09:03 PM IST
विज्ञापन
जीएम सरसों के उगाए जाने की अनुमति को लेकर सरकार और उसके अपने संगठनों के बीच छीड़ी रार अब पीएम मोदी के दर पहुंच गई है। केंद्रीय मंत्री राधा मोहन सिंह के जरिए जीएम सरसों के उत्पादन को जायज ठहराने के अगले ही दिन अपना सार्वजनिक विरोध प्रकट करते हुए संघ के संगठन स्वदेशी जागरण मंच ने पीएम मोदी को पत्र लिखा है।
पीएम को लिखे पत्र में मंच ने कहा है कि जीएम सरसों पर सच को छूपाया गया है। पीएम मोदी से जीएम सरसों के उगाए जाने की अनुमति नहीं देने की मांग करते हुए स्वदेशी जागरण मंच ने कहा है कि जीएम के सुरक्षा खतरों को लेकर भी सरकार को गुमराह किया गया है।
जीएम सरसों है जहरीला, कैंसर बढने की संभावना
जीएम सरसों के व्यवसायिक उत्पादन की मंजूरी पर नाराजगी जताते हुए स्वदेशी जागरण मंच ने सरकार से पूछा है कि वह इस मामले में जल्दबाजी में क्यों है। मंच के राष्ट्रीय सह संयोजक अश्वनी महाजन ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि जीएम सरसों पर स्वदेशी बीज और देश में हुए शोध का फर्जी चोला पहनाया गया है।
विज्ञापन
उनका कहना है कि इस मामले में विदेशी कंपनी बेयर के व्यापार और शोध प्रयोग किए गए हैं। बेयर के बीच हुई आईपीआर की शर्तों को भी अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। मंच का कहना है कि जीएम सरसों का स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ेगा। हरबीसाईड होने की वजह से यह बेहद जहरीला भी है।
विज्ञापन
पीएम को लिखे पत्र में मंच ने कहा है कि जीएम सरसों पर सच को छूपाया गया है। पीएम मोदी से जीएम सरसों के उगाए जाने की अनुमति नहीं देने की मांग करते हुए स्वदेशी जागरण मंच ने कहा है कि जीएम के सुरक्षा खतरों को लेकर भी सरकार को गुमराह किया गया है।
विज्ञापन
जीएम सरसों है जहरीला, कैंसर बढने की संभावना
जीएम सरसों के व्यवसायिक उत्पादन की मंजूरी पर नाराजगी जताते हुए स्वदेशी जागरण मंच ने सरकार से पूछा है कि वह इस मामले में जल्दबाजी में क्यों है। मंच के राष्ट्रीय सह संयोजक अश्वनी महाजन ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि जीएम सरसों पर स्वदेशी बीज और देश में हुए शोध का फर्जी चोला पहनाया गया है।
विज्ञापन
उनका कहना है कि इस मामले में विदेशी कंपनी बेयर के व्यापार और शोध प्रयोग किए गए हैं। बेयर के बीच हुई आईपीआर की शर्तों को भी अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। मंच का कहना है कि जीएम सरसों का स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ेगा। हरबीसाईड होने की वजह से यह बेहद जहरीला भी है।
स्वदेशी जागरण मंच के नाराजगी की वजह
अश्वनी महाजन का कहना है कि स्वदेशी जागरण मंच की नारागजी की प्रमुख वजह है कि जीएम सरसों वैज्ञानिक रूप से प्रमाणिक नहीं है। पर्यावरण और अन्य वनस्पतियों पर इसके दुष्प्रभाव क्या होंगे इसकी भी चिंता नहीं की गई है।
2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने अपने घोषणापत्र में स्पष्ट कहा था कि जीएम सरसों को उगाने की मंजूरी तब तक नहीं दी जाएगी जब तक की पर्यावरण एवं स्वास्थ्य पर पड़ने वाले इसके दुष्प्रभाव की वैज्ञानिक संतुष्टि न मिल जाए। मगर पता नहीं सरकार के कदम इस मामले में तेज क्यों हैं।
संघ का किसान संघ भी विरोध में
स्वदेशी जागरण मंच के अलावा संघ का एक अन्य संगठन भारतीय किसान संघ भी देश में जीएम सरसों उगाने की मंजूरी के विरोध में है। भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय महामंत्री बद्री नारायण चौधरी का कहना है कि सरकार किसी की भी हो अगर किसान विरोधी, देश विरोधी और राष्ट्र विरोधी कदम है तो भारतीय किसान संघ हमेशा विरोध करेगा। उनका कहना है कि वैज्ञानिकों के नाम पर सरकार को बरगलाया जा रहा है।
स्वदेशी सरसों से बढ़ सकता है उत्पादन
स्वदेशी जागरण मंच का कहना है कि उत्पादन बढ़ाने के नाम पर जीएम सरसों के उगाने की मंजूरी का कदम उचित नहीं है। देश में सरसों की ऐसी कई प्रजाति हैं जिनकी उत्पादन क्षमता जीएम सरसों से भी ज्यादा है।
क्या है जीएम सरसों का पूरा मामला
पर्यावरण मंत्रालय की एक्सपर्ट कमेटी ने पिछले हफ्ते जेनेटिक मोडिफाइड यानी जीएम सरसों को उगाने की मंजूरी प्रदान कर दी है। जीएम सरसों को दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर जैनिटिक मैनुपुलेशन एंड क्रॉप प्लांट्स ने विकसित किया है। कई साल के शोध के बाद डीयू के पूर्व वीसी डॉ दीपक पेंटल की अगुवाई में एक टीम ने जीएम सरसों विकसित किया है। जीएम फसलों से जुड़े मामलों को देखने वाली सरकार की एक्सपर्ट कमेटी (GEAC) ने इसे अपनी मंजूरी प्रदान कर दी है।
2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने अपने घोषणापत्र में स्पष्ट कहा था कि जीएम सरसों को उगाने की मंजूरी तब तक नहीं दी जाएगी जब तक की पर्यावरण एवं स्वास्थ्य पर पड़ने वाले इसके दुष्प्रभाव की वैज्ञानिक संतुष्टि न मिल जाए। मगर पता नहीं सरकार के कदम इस मामले में तेज क्यों हैं।
संघ का किसान संघ भी विरोध में
स्वदेशी जागरण मंच के अलावा संघ का एक अन्य संगठन भारतीय किसान संघ भी देश में जीएम सरसों उगाने की मंजूरी के विरोध में है। भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय महामंत्री बद्री नारायण चौधरी का कहना है कि सरकार किसी की भी हो अगर किसान विरोधी, देश विरोधी और राष्ट्र विरोधी कदम है तो भारतीय किसान संघ हमेशा विरोध करेगा। उनका कहना है कि वैज्ञानिकों के नाम पर सरकार को बरगलाया जा रहा है।
स्वदेशी सरसों से बढ़ सकता है उत्पादन
स्वदेशी जागरण मंच का कहना है कि उत्पादन बढ़ाने के नाम पर जीएम सरसों के उगाने की मंजूरी का कदम उचित नहीं है। देश में सरसों की ऐसी कई प्रजाति हैं जिनकी उत्पादन क्षमता जीएम सरसों से भी ज्यादा है।
क्या है जीएम सरसों का पूरा मामला
पर्यावरण मंत्रालय की एक्सपर्ट कमेटी ने पिछले हफ्ते जेनेटिक मोडिफाइड यानी जीएम सरसों को उगाने की मंजूरी प्रदान कर दी है। जीएम सरसों को दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर जैनिटिक मैनुपुलेशन एंड क्रॉप प्लांट्स ने विकसित किया है। कई साल के शोध के बाद डीयू के पूर्व वीसी डॉ दीपक पेंटल की अगुवाई में एक टीम ने जीएम सरसों विकसित किया है। जीएम फसलों से जुड़े मामलों को देखने वाली सरकार की एक्सपर्ट कमेटी (GEAC) ने इसे अपनी मंजूरी प्रदान कर दी है।