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फूड फोर्टिफिकेशन के विरोध में स्वदेशी जागरण मंच ने प्रधानमंत्री को लिखा खत, कहा- फैसले पर लगे रोक 

Sat, 01 Sep 2018 04:26 AM IST
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 01 Sep 2018 04:26 AM IST
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Swadeshi Jagran Manch Writes a letter to the Pm modi against Food Fortification
फूड फोर्टिफिकेशन के विरोध में स्वदेशी जागरण मंच ने पीेएम मोदी को लिखा पत्र।

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के संगठन स्वदेशी जागरण मंच ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखा है। स्वदेशी जागरण मंच ने पत्र लिख कर फूड फोर्टिफिकेशन का विरोध किया है। मंच का कहना है कि फूड फोर्टिफिकेशन में मिलाए जाने वाले जरूरी पोषक तत्व को पशुओं से तैयार किया जाएगा, जो धार्मिक मान्यताओं और शाकाहारियों के खिलाफ है। इस फैसले से देश में कानून और व्यवस्था की स्थिति प्रभावित हो सकती है।

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स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सह संयोजक अश्वनी महाजन का कहना है कि हाल ही में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने 24 अगस्त को भोजन में फोर्टिफिकेशन को लेकर राष्ट्रीय परामर्श का आयोजन किया था। उनका कहना है कि इस फैसले से लाखों गरीब भारतीयों की जिंदगी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। मंच का दावा है कि फूड फोर्टिफिकेशन के लिए इस्तेमाल की जाने वाली तकनीक और कच्चे माल के आयात से अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
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अपने पत्र में जागरण मंच का कहना है कि फूड फोर्टिफिकेशन को लेकर फूड इंडस्ट्री के अपने हित हैं और उनका फैसलों से कोई लेना-देना नहीं है। महाजन का कहना है कि फोर्टिफिकेशन को लेकर टाटा ट्रस्ट, ग्लोबल अलायंस फॉर इंप्रूव्ड न्यूट्रिशियन (गेन), बिल एंड मिंलिडा गेट्स फाउंडेशन, क्लिंटन हेल्थ इनिशिएटिव, फूड फोर्टिफिकेशन इनिशिएटिव एंड न्यूट्रिशनल इंटरनेशनल और इंटरनेशनल लाइफ सांइसेज इंस्टीट्यूट जैसे संस्थानों और कंपनियों के अपने निजी हित शामिल हैं।
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अपने पत्र में स्वदेशी जागरण मंच ने अपील की है प्रधानमंत्री कार्यालय इसमें दखल दे और जब तक सभी मुद्दों का हल नहीं निकल जाता, तब तक कोई फैसला नहीं लिया जाए। मंच का कहना है कि इस बात को जांचने का कोई तरीका नहीं है जिसमें किसी व्यक्ति को फोर्टिफिकेशन से होने वाले नुकसानों का पता लगाया जा सके। मंच का कहना है कि अनिमिया मुक्त कार्यक्रम के तहत आयरन सप्लीमेंट और विटामिन ए के ओवरडोसेज से नुकसान होने की आशंका है।

स्वदेशी जागरण मंच के मुताबिक इस बात के कोई सबूत नहीं है कि जरूरी फोर्टिफिकेशन से सेहत को कोई फायदा होता है। मंच ने चिंता जाहिर ककरते हुए कहा है कि वास्तविक खाने की बजाय फोर्टिफिकेशन फूड को जरूरी बनाने से छोटी कंपनियों को नुकसान पहुंचेगा। साथ ही फोर्टिफिकेशन को आवश्यक बनाने से किसी व्यक्ति के संवैधानिक अधिकार प्रभावित होंगे और वह अपनी मनमर्जी से भोजन नहीं खा पाएगा।

मंच का कहना है कि जरूरी फोर्टिफिकेशन से कुछ सुक्ष्म पोषक तत्वों के सस्ते विकल्प ढूंढे जाएंगे। उदाहरण के लिए विटामिन डी को जानवरों से प्राप्त किया जाता है। इसे आवश्यक बना देने से लोगों की धार्मिक मान्यताओं और शाकाहारियों को दिक्कत हो सकती है और देश की कानून और व्यवस्था को खतरा हो सकता है।


गौरतलब है कि स्वदेशी जागरण मंच ने एफएसएसएआई के पौष्टिक तत्व मिलाने को लेकर जारी नोटिफिकेशन का विरोध किया था। मंच का कहना था कि मेडिकल शोध पत्रों के मुताबिक खाद्य पदार्थों में आयातित सिंथेटिक विटामिनों से जनता की सेहत को फायदा पहुंचने की बजाय नुकसान पहुंचेगा। उन्होंने बताया कि सिंथेटिक विटामिन सेहत के लिए जहर है और एफएसएसएआई ने फूड फोर्टिफिकेशन के जरिए पूरे देश की जनता को कुपोषित बना दिया है।  

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