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गेट्स फाउंडेशन के खिलाफ स्वदेशी जागरण मंच ने खोला मोर्चा

Tue, 07 Jun 2016 04:59 AM IST
एम संजय/ अमर उजाला, नई दिल्ली
एम संजय/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 07 Jun 2016 04:59 AM IST
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swadeshi jagran manch is against gates foundation india

संघ के अनुशांगिक संगठन स्वदेशी जागरण मंच ने बिल एंड मिलिंडा गेटस फाउंडेशन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उसका आरोप है कि फाउंडेशन के लोग स्वास्थ्य नीतियों को प्रभावित करते हैं। मंच ने सरकार से मांग की है कि स्वास्थ्य मंत्रालय की नीतियों पर फाउंडेशन के प्रभाव को खत्म करने के लिए कदम उठाए। स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सहसंयोजक अश्विनी महाजन ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि विदेशी कंपनियों का प्रभाव मुक्त बिना स्वास्थ्य सुविधाएं सस्ती नहीं हो सकती हैं। इसस पहले अप्रैल माह में नागौर में संपन्न हुई प्रतिनिधिसभा की बैठक में प्रस्ताव पारित कर खुद संघ ने अपने सरकार से सस्ती स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने की मांग की थी। अब स्वदेशी जागरण मंच ने संघ के पहल को आगे बढ़ाया है।

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बीते दिनों एक प्रस्ताव पारित कर स्वदेशी जागरण मंच ने कहा है कि सरकारी खर्च में कमी से स्वास्थ्य सेवाओं में निजीकरण के कारण चिकित्सा लागत बढ़ी है। तो दूसरी ओर सरकारी नीतियों पर विदेशी कंपनियों के प्रभाव के कारण, अनावश्यक टीकाकरण को बढ़ावा मिला है, जिससे आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाओं में कटौती हो रही है। पेंटेंट कानून में बदलाव की मांग करते हुए मंच ने कहा है कि 2005 में पेटेंट कानून में परिवर्तन से 1995 के बाद की आविष्कृत औषधियाँ व उनके उत्पाद पेटेंट प्रावधानों के कारण अत्यंत महंगी होती जा रही है।
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मंच के सहसंयोजक अश्विनी महाजन का कहना है कि राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान में नए-नए टीके शामिल करने के लिए बिल एवं मिलिंडा गेटस फाउंडेशन के प्रतिनिधि स्वास्थ्य मंत्रालय पर दबाव बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि टीकाकरण की नीति में विदेशी हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं होगा। बल्कि सरकार को खुद नीति तय करनी चाहिए। महाजन का कहना है कि बेवजह के दो कंपोनेट जुडने के कारण 15 रुपए में लगने वाला डीपीटी का टीका अब 525 रुपए का हो गया है। रोटा वायरस के टीके पर भी डाक्टरों ने अलग-अलग राय जताई है। इससे बच्चों पर दुष्प्रभाव पड़ रहा है। टीकाकरण के लिए व्यापक समीक्षा होनी चाहिए।
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वहीं मंच ने स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार गांव तक करने की मांग की है। केंद्र और राज्य सरकारों से स्वास्थ्य बजट में बढ़ोतरी की मांग करते हुए स्वदेशी जागरण मंच ने कहा है कि देश में जीवन शैली जन्य रोगों सहित विविध रोग अत्यन्त तीव्र गति से बढ़ रहे हैं। सभी प्रकार के रोगों के सकल वैश्विक रोग भार का 21 प्रतिशत भारत पर है। लेकिन देश में चिकित्सा सेवाओं की अपर्याप्तता और चिकित्सा सुविधाओं के महंगा होने कारण बड़ी संख्या में लोगों को चिकित्सा सुलभ नहीं हो पा रही है। रोकथाम योग्य रोगों व उनसे होने वाली असामयिक मृत्यु की बढ़ती घटनाओं के कारण ही प्रतिवर्ष 6 प्रतिशत सकल घरेलू उत्पाद की क्षति हो रही है, जिसका मूल्य 9-10 लाख करोड़ रुपये वार्षिक से भी अधिक है।


देश में प्रतिवर्ष 58 लाख लोगों की मृत्यु हृदय व फेफड़े के रोगों, टाइप 2 के मधुमेह व कैंसर जैसे असंक्रामक रोगों से हो रही हैं, जिनकी रोकथाम संभव है। देश आज विश्व की हृदय रोग, मधुमेह, गठिया आदि की राजधानी कहलाने लगा है। देश में 6.13 करोड़ मधुमेह के रोगी है।

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