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Swachh Survekshan: कभी गंदगी के चलते फैले प्लेग ने ली लोगों की जान, आज कैसे स्वच्छता के शिखर पर पहुंचा सूरत
Fri, 12 Jan 2024 09:04 PM IST
शिवेंद्र तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिवेंद्र तिवारी
Updated Fri, 12 Jan 2024 09:04 PM IST
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इंदौर के साथ सूरत सबसे स्वच्छ शहर
- फोटो :
Amar Ujala
विस्तार
मध्य प्रदेश में इंदौर और गुजरात का सूरत शहर इस साल संयुक्त रूप से देश के सबसे स्वच्छ शहर बने हैं। इंदौर को लगातार सातवीं बार देश के सबसे स्वच्छ शहर होने का खिताब मिला है। वहीं, डायमंड सिटी सूरत पहली बार स्वच्छता के शिखर पर पहुंचा है।आइये जानते हैं स्वच्छ सर्वेक्षण रिपोर्ट 2023 रिपोर्ट क्या है? सूरत को लेकर स्वच्छ सर्वेक्षण रिपोर्ट में क्या है? शहर ने यह उपलब्धि कैसे हासिल की? प्रशासन ने क्या कदम उठाए? लोगों की भूमिका क्या रही?
इंदौर के साथ सूरत सबसे स्वच्छ शहर
- फोटो :
Amar Ujala
स्वच्छ सर्वेक्षण रिपोर्ट 2023 रिपोर्ट क्या है?
गुरुवार को ‘स्वच्छ सर्वेक्षण 2023’ पुरस्कार घोषित कर दिए गए। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में स्वच्छता पुरस्कार प्रदान किए। यहां 13 पुरस्कार विजेताओं को स्वच्छ शहर, सबसे स्वच्छ छावनी, सफाई मित्र सुरक्षा, गंगा टाउन और सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले राज्य की श्रेणियों के अंतर्गत सम्मानित किया गया।
2016 में स्वच्छ सर्वेक्षण पुरस्कारों की शुरुआत हुई थी तब देश के 73 प्रमुख शहरों का मूल्यांकन ही किया गया था। आज सातवें साल इस सर्वे में 4477 शहरों को जगह मिली। इस वर्ष स्वच्छ शहर पुरस्कारों में लंबे समय से चल रहे कचरे के मैदानों को खत्म करने, प्लास्टिक कचरे का प्रबंधन करने, रिड्यूज, रीयूज, रीसाइक्लिंग के सिद्धांतों को लागू करने और सफाई मित्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को प्राथमिकता दी गई। स्वच्छ सर्वेक्षण 2023 ने कचरे को कीमती संसाधनों में बदलने पर ध्यान केंद्रित किया। 3,000 से अधिक मूल्यांकनकर्ताओं की टीम ने इस सर्वे को अंजाम दिया।
गुरुवार को ‘स्वच्छ सर्वेक्षण 2023’ पुरस्कार घोषित कर दिए गए। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में स्वच्छता पुरस्कार प्रदान किए। यहां 13 पुरस्कार विजेताओं को स्वच्छ शहर, सबसे स्वच्छ छावनी, सफाई मित्र सुरक्षा, गंगा टाउन और सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले राज्य की श्रेणियों के अंतर्गत सम्मानित किया गया।
2016 में स्वच्छ सर्वेक्षण पुरस्कारों की शुरुआत हुई थी तब देश के 73 प्रमुख शहरों का मूल्यांकन ही किया गया था। आज सातवें साल इस सर्वे में 4477 शहरों को जगह मिली। इस वर्ष स्वच्छ शहर पुरस्कारों में लंबे समय से चल रहे कचरे के मैदानों को खत्म करने, प्लास्टिक कचरे का प्रबंधन करने, रिड्यूज, रीयूज, रीसाइक्लिंग के सिद्धांतों को लागू करने और सफाई मित्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को प्राथमिकता दी गई। स्वच्छ सर्वेक्षण 2023 ने कचरे को कीमती संसाधनों में बदलने पर ध्यान केंद्रित किया। 3,000 से अधिक मूल्यांकनकर्ताओं की टीम ने इस सर्वे को अंजाम दिया।
सूरत
- फोटो :
Social media
सूरत को लेकर स्वच्छ सर्वेक्षण रिपोर्ट में क्या है?
इस वर्ष सबसे स्वच्छ शहर पुरस्कार की श्रेणी में दो शहरों को संयुक्त रूप से विजेता घोषित किया गया। सबसे स्वच्छ शहरों की लीग में अब इंदौर के साथ सूरत भी शामिल हो गया है। बंदरगाहों के शहर सूरत ने भी इस बार इंदौर के साथ शीर्ष सम्मान हासिल किया। इससे पहले लगातार छह वर्षों तक इंदौर ही शीर्ष स्थान हासिल करता रहा है।
इस वर्ष सबसे स्वच्छ शहर पुरस्कार की श्रेणी में दो शहरों को संयुक्त रूप से विजेता घोषित किया गया। सबसे स्वच्छ शहरों की लीग में अब इंदौर के साथ सूरत भी शामिल हो गया है। बंदरगाहों के शहर सूरत ने भी इस बार इंदौर के साथ शीर्ष सम्मान हासिल किया। इससे पहले लगातार छह वर्षों तक इंदौर ही शीर्ष स्थान हासिल करता रहा है।
इससे पहले के वर्षों में सूरत की रैंकिंग क्या रही है?
2016 में जब पहला स्वच्छ सर्वेक्षण सर्वेक्षण हुआ तो इसमें सूरत छठे पायदान पर था। 2017 में इसने सुधार किया और चौथे स्थान पर पहुंच गया। हालांकि, 2018 और 2019 में इसे झटका लगा और इसकी रैंकिंग गिरकर 14वें स्थान पर पहुंच गई। 2020 में सूरत फिर से दूसरे स्थान पर पहुंच गया और यह सिलसिला 2022 तक जारी रहा। अब यह स्वच्छता का सिरमौर है।
2016 में जब पहला स्वच्छ सर्वेक्षण सर्वेक्षण हुआ तो इसमें सूरत छठे पायदान पर था। 2017 में इसने सुधार किया और चौथे स्थान पर पहुंच गया। हालांकि, 2018 और 2019 में इसे झटका लगा और इसकी रैंकिंग गिरकर 14वें स्थान पर पहुंच गई। 2020 में सूरत फिर से दूसरे स्थान पर पहुंच गया और यह सिलसिला 2022 तक जारी रहा। अब यह स्वच्छता का सिरमौर है।
शहर ने यह उपलब्धि कैसे हासिल की?
कहा जाता है कि कभी-कभी हम अपनी गलतियों से सीखते हैं। हीरे के व्यापार के लिए दुनिया में मशहूर सूरत की सूरत बदलने की स्वच्छता की कहानी भी यही प्रेरणा देती है। दरअसल, 1994 में शहर को प्लेग महामारी ने बुरी तरह जकड़ लिया। बाढ़ के दौरान सीवरों में उफान आया जिसके कारण मरे हुए चूहे सड़कों पर फैल गए। महामारी बनी इस घटना में लगभग 50 लोगों की मौत हुई और बड़े पैमाने पर लोगों ने पलायन कर लिया।
2006 में शहर को फिर से बाढ़ का सामना करना पड़ा। इस बार शहर के गलत नियोजन के कारण लोगों ने मुसीबत झेली। कहा जाता है कि वर्ष 1994 में सूरत में प्लेग का प्रसार स्थानीय प्रशासन में सुधार की वजह बन गया। 1990 के दशक के मध्य और उत्तरार्ध में सूरत के दो नगर आयुक्तों एसआर राव और एस जगदीशन के प्रयासों से कचरा संग्रह और सड़कों की सफाई में आमूलचूल परिवर्तन आया, होटलों में स्वच्छता मानक को लागू किया गया और मलिन बस्तियों में पक्की सड़कों और शौचालयों की व्यवस्था की गई।
ऐसे ही दूसरे बदलावों के चलते एक गंदा, बाढ़ प्रभावित और बीमारी से ग्रस्त शहर सूरत आज देश का सबसे स्वच्छ शहर बन गया है। जनसंख्या में तेज वृद्धि के बावजूद मलेरिया जैसे मच्छर जनित परजीवी रोगों के मामले सूरत में तेजी से घटे हैं।
अधिकारियों के अनुसार, सूरत ऐसा शहर है जो हर घर से कचरा इकट्ठा करता है। यहां रिहायशी सोसाइटियों को कचरा निपटान के लिए प्रोत्साहन भी दिया जाता है। यहां सड़कों की रात में सफाई की जाती है।
कहा जाता है कि कभी-कभी हम अपनी गलतियों से सीखते हैं। हीरे के व्यापार के लिए दुनिया में मशहूर सूरत की सूरत बदलने की स्वच्छता की कहानी भी यही प्रेरणा देती है। दरअसल, 1994 में शहर को प्लेग महामारी ने बुरी तरह जकड़ लिया। बाढ़ के दौरान सीवरों में उफान आया जिसके कारण मरे हुए चूहे सड़कों पर फैल गए। महामारी बनी इस घटना में लगभग 50 लोगों की मौत हुई और बड़े पैमाने पर लोगों ने पलायन कर लिया।
2006 में शहर को फिर से बाढ़ का सामना करना पड़ा। इस बार शहर के गलत नियोजन के कारण लोगों ने मुसीबत झेली। कहा जाता है कि वर्ष 1994 में सूरत में प्लेग का प्रसार स्थानीय प्रशासन में सुधार की वजह बन गया। 1990 के दशक के मध्य और उत्तरार्ध में सूरत के दो नगर आयुक्तों एसआर राव और एस जगदीशन के प्रयासों से कचरा संग्रह और सड़कों की सफाई में आमूलचूल परिवर्तन आया, होटलों में स्वच्छता मानक को लागू किया गया और मलिन बस्तियों में पक्की सड़कों और शौचालयों की व्यवस्था की गई।
ऐसे ही दूसरे बदलावों के चलते एक गंदा, बाढ़ प्रभावित और बीमारी से ग्रस्त शहर सूरत आज देश का सबसे स्वच्छ शहर बन गया है। जनसंख्या में तेज वृद्धि के बावजूद मलेरिया जैसे मच्छर जनित परजीवी रोगों के मामले सूरत में तेजी से घटे हैं।
अधिकारियों के अनुसार, सूरत ऐसा शहर है जो हर घर से कचरा इकट्ठा करता है। यहां रिहायशी सोसाइटियों को कचरा निपटान के लिए प्रोत्साहन भी दिया जाता है। यहां सड़कों की रात में सफाई की जाती है।
लोगों की भूमिका क्या रही?
आम लोगों की भागीदारी के बिना कोई उद्देश्य सफल नहीं होता, ऐसा सूरतवासियों ने करके दिखाया है। यहां के लोग न केवल विभिन्न मुहिम में भाग लेते हैं बल्कि उनके लिए पैसे भी इकट्ठा करते हैं। पूरे शहर में निगरानी कैमरे स्थापित करने के लिए लोगों ने पैसे दान किये।
आम लोगों की भागीदारी के बिना कोई उद्देश्य सफल नहीं होता, ऐसा सूरतवासियों ने करके दिखाया है। यहां के लोग न केवल विभिन्न मुहिम में भाग लेते हैं बल्कि उनके लिए पैसे भी इकट्ठा करते हैं। पूरे शहर में निगरानी कैमरे स्थापित करने के लिए लोगों ने पैसे दान किये।