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Sutlej: 'बांधों के निर्माण से जलधारा बनकर रह गई है सतलुज नदी', सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश ने जताई चिंता

Sat, 13 Jul 2024 02:01 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नितिन गौतम Updated Sat, 13 Jul 2024 02:01 PM IST
सार

सतलुज नदी पर बांधों के निर्माण की वजह से ये एक छोटी से जलधारा बनकर रह गई है। जस्टिस संजय करोल ने कहा कि इससे पूरा पारिस्थितिकी तंत्र बदल गया है।

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sutlej river turned into rivulet by construction of dams on it says supreme court judge sanjay karol
नदी पर बना बांध - फोटो : एएनआई

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश संजय करोल ने जलवायु परिवर्तन पर चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि सतलुज नदी पर बांधों के निर्माण की वजह से ये एक छोटी से जलधारा बनकर रह गई है। जस्टिस संजय करोल ने कहा कि इससे पूरा पारिस्थितिकी तंत्र बदल गया है।
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'नदियां सूख रही हैं'
सुप्रीम कोर्ट जज ने कहा कि 'बढ़ते तापमान और मानवीय गतिविधियों के कारण कुछ नदियों के हिस्से सूख रहे हैं। भारत की एकमात्र ट्रांस-हिमालयी नदी सतलुज कई बांधों के निर्माण के कारण एक छोटी से जलधारा बनकर रह गई है।' जस्टिस करोल ने कहा कि 'विभिन्न सरकारों ने गंगा की सफाई पर 30,000 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। हम मौजूदा स्थिति को जानते हैं। इस मुद्दे पर बहुत कुछ करने की आवश्यकता है। दुर्भाग्य से, प्रसिद्ध गंगा नदी डॉल्फ़िन कहीं नहीं दिखती हैं।' उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में जलवायु परिवर्तन की वजह से खेती को नुकसान हुआ है। 
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'जलवायु परिवर्तन से कृषि उपज में आ रही कमी'
जस्टिस करोल ने कहा, 'भारत की लगभग 58 प्रतिशत आबादी अपनी आजीविका के लिए कृषि और उससे जुड़ी गतिविधियों पर निर्भर है। कई क्षेत्रों में जबरदस्त वृद्धि देखी गई है लेकिन कृषि ने अपना प्रभुत्व बनाए रखा है। भारत ने 1970 के दशक में हरित क्रांति के साथ खाद्य क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल की और अब हम अपनी पूरी आबादी के लिए पर्याप्त मात्रा में खाद्यान्न का उत्पादन करते हैं, लेकिन अब जलवायु परिवर्तन के कारण भारत की कृषि उपज में कमी आई है। खेती की स्थिति और भारी रासायनिक उर्वरकों के उपयोग से कृषि उपज में कमी आई है। हमने देखा है कि पंजाब में क्या हो रहा है - अत्यधिक सिंचाई से भूजल का स्तर लगातार कम हो रहा है।
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जस्टिस करोल ने इस बात पर जोर दिया कि भारत में कृषि क्षेत्र देश की नदियों से जुड़ा हुआ है, लेकिन हाल के वर्षों में मानसून के पैटर्न में बदलाव के कारण, नदियाँ और वनस्पतियों, जीवों और समुदायों का विशाल नेटवर्क प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा, 'यह समय की मांग है कि सभी को पर्यावरण कानूनों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और इससे बचाव के आधुनिक तरीकों के बारे में लोगों को जागरुक किया जाए।' इसी कार्यक्रम में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति के वी विश्वनाथन ने भी कहा कि 'जलवायु परिवर्तन अस्तित्व के लिए एक गंभीर खतरा है और उन्होंने इस समस्या का व्यापक समाधान खोजने के लिए नीति आयोग की तरह भारत में एक स्थायी आयोग की स्थापना का आह्वान किया।'
 
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