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संसद: निलंबन को अदालत में नहीं दी जा सकती चुनौती, राज्यसभा-लोकसभा के इन नियमों के तहत सदस्य होते हैं निलंबित

Tue, 19 Dec 2023 06:22 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जलज मिश्रा Updated Tue, 19 Dec 2023 06:22 AM IST
सार

निलंबित सदस्यों को किसी भी तरह की संसदीय कार्यवाही में हिस्सा लेने अधिकार नहीं होता। बहरहाल, सांसद के अपने कृत्य पर माफी मांगने पर सभापति और लोकसभा स्पीकर अपने विवेक का प्रयोग करके निलंबन रद्द कर सकते हैं।

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Suspension of Parliament Members cannot be challenged in court
Parliament. - फोटो : Social Media

विस्तार

लोकसभा और राज्यसभा में सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई के लिए नियम-कायदे बने हुए हैं। निलंबन की कार्रवाई कार्य संचालन संबंधी दोनों सदन की नियमावली पुस्तिका से संचालित होती हैं। संविधान में प्रावधान किया गया है कि संसद के व्यवहार किसी न्यायालय के प्रति उत्तरदायी नहीं हैं।

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सदन के वक्तव्यों को न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती है। सांसदों को दोनों सदनों की नियमावली के अनुसार व्यवहार करना होता है। उन्हें केवल सदन में शामिल होने वाले भत्तों से हाथ धोना पड़ता है। बाकी सुविधा यथावत रहती हैं। राज्यसभा में सभापति और लोकसभा में अध्यक्ष के पास यह अधिकार होता है कि वह सांसदों पर कार्रवाई कर सके। राज्यसभा में नियम 255 के तहत सभापति सदस्यों को पूरे सत्र के लिए निलंबित कर सकते हैं। जबकि नियम 256 के तहत सभापति किसी सांसद को सत्र की शेष समय से अधिक समय के लिए निलंबित कर सकते हैं। लोकसभा में नियम 374 के तहत निलंबन तय समय से लेकर शेष सत्र तक हो सकता है।

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माफी देना विवेकाधिकार
निलंबित सदस्यों को किसी भी तरह की संसदीय कार्यवाही में हिस्सा लेने अधिकार नहीं होता। बहरहाल, सांसद के अपने कृत्य पर माफी मांगने पर सभापति और लोकसभा स्पीकर अपने विवेक का प्रयोग करके निलंबन रद्द कर सकते हैं।

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इन पर होती है कार्रवाई
उन सदस्यों के निलंबन किया जा सकता है जो सदन में जानबूझकर व्यवधान डालते हैं, नारे लगाते हैं, तख्तियां दिखाते हैं, आसन के करीब आते हैं, अमर्यादित आचरण करते हैं। जो नियमों का पालन नहीं करते संसदीय अनुशासन की अवमानना करते हैं। उनके व्यवहार और कृत्य से संवैधानिक परंपराओं को ठेस पहुंचती है। संसदीय परंपराएं प्रभावित होती है।

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