फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   suspense ends on sunday over himachal pradesh new CM

कौन बनेगा हिमाचल का सीएम? रविवार को खत्म होगा सस्पेंस

Sat, 23 Dec 2017 06:15 PM IST
डिजिटल ब्यूरो
डिजिटल ब्यूरो Updated Sat, 23 Dec 2017 06:15 PM IST
विज्ञापन
suspense ends on sunday over himachal pradesh new CM
- फोटो : G. pal

हिमाचल प्रदेश में चुनाव जीतने के बाद भी मुख्यमंत्री पद को लेकर भाजपा में सस्पेंस बरकरार है। सूत्र बताते हैं कि मुख्यमंत्री के चेहरे से पार्टी अपना सस्पेंस रविवार को दूर करेगी। रविवार 11 बजे के बाद पार्टी पर्यवेक्षकों के दोबारा से शिमला जाने के आसार हैं। 

विज्ञापन


राज्य पर्यवेक्षक नरेंद्र सिंह तोमर के करीबियों के अनुसार रविवार 11 बजे के बाद तोमर के शिमला जाने के आसार हैं।
विज्ञापन


पहले इस बात की चर्चा थी कि तोमर और उनके साथ पर्यवेक्षक बनीं निर्मला सीतारमन शनिवार को ही शिमला जाएंगे। मगर मुख्यमंत्री पद की गुत्थी न सुलझ पाने की वजह से तोमर और निर्मला ने अपना दौरा रविवार को बनाया है। इस बीच भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने प्रदेश के कुछ वरिष्ठ नेताओं समेत संघ के वरिष्ठ अधिकारियों से हिमाचल के मुख्यमंत्री के नाम पर चर्चा की है।
विज्ञापन
विज्ञापन


पढ़ें: हिमाचल में इस वजह से चुनाव हारे भाजपा के दिग्‍गज, सत्ती ने किया खुलासा

शुक्रवार को केंद्रीय पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में जयराम ठाकुर और धूमल समर्थकों के बीच हुई नारेबाजी भाजपा आलाकमान को रास नहीं आई है, इसलिए केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा का नाम भी शनिवार को दोबारा से चर्चा में शामिल हो गया। लेकिन भाजपा के सामने मुश्किल यह है कि उसके मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार प्रेम कुमार धूमल के चुनाव हारने के बावजूद भी अधिकांश विधायकों ने उनके पक्ष में राय दी है।

संघ और प्रदेश संगठन ने जय राम ठाकुर के नाम पर मुहर लगा दी है, जबकि मुख्यमंत्री चयन में पार्टी की नजर लोकसभा चुनाव 2019 की चुनौती भी है। नड्डा को कमान देने से सूबे में प्रभावशाली ठाकुर बिरादरी की नाराजगी भाजपा को झेलनी पड़ सकती है। यही वजह है कि पर्यवेक्षकों की राय जानने के बाद भी पार्टी अध्यक्ष अमित शाह शनिवार को तमाम सियासी नफे-नुकसान का हिसाब लगाते नजर आए।

संघ की उत्तर क्षेत्र कार्यकारिणी की बैठक हमीरपुर में

suspense ends on sunday over himachal pradesh new CM

सूत्र बताते हैं कि शनिवार को पर्यवेक्षकों के शिमला जाने का मामला संघ की इस बैठक की वजह से टल गया। रविवार से हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर में संघ की उत्तर क्षेत्र कार्यकारिणी की दो दिवसीय बैठक होनी है। इस बैठक से भी हिमाचल के अगले मुख्यमंत्री के संकेत मिलने की संभावना है।

बैठक में करीब दर्जन भर अधिकारी उपस्थित रहेंगे। हालांकि प्रदेश के संघ ने जयराम ठाकुर के नाम पर मुहर लगा दी है, मगर लोकसभा चुनाव 2019 को ध्यान में रखते हुए सूबे की कमान भाजपा आलाकमान किसी मजबूत और बड़े कद वाले नेता को देना चाहती है। यही वजह है कि चुनाव हारने के बावजूद भी प्रेम कुमार धूमल का नाम दौड़ से अभी बाहर नहीं हुआ है।

एक तो चुनाव जीतने वाले करीब 22 विधायकों ने मुख्यमंत्री पद के लिए उनका नाम सुझाया है, तो दूसरा वे सूबे के सबसे कद्दावर नेता हैं। जयराम ठाकुर उनके कद के आगे हलके नजर आ रहे हैं। एक तर्क यह भी दिया जा रहा है कि धूमल को कमान देने के साथ संघ और विद्यार्थी परिषद से जुड़े अधिकांश लोगों को मंत्री पद पर बैठा दिया जाए, ताकि उनके कद का लाभ उठाते हुए पार्टी लोकसभा का चुनाव जीत सके और इस बीच नए चेहरों को भी अनुभव मिल जाएगा। 

राणा-विक्रमादित्य का बढ़ता कद बना मुसीबत

suspense ends on sunday over himachal pradesh new CM

विधानसभा चुनाव में धूमल को चुनाव हराने वाले राजेंद्र सिंह राणा का बढ़ता कद भी भाजपा के लिए मुसीबत बनता जा रहा है। वे लोकसभा चुनाव 2014 में भी हमीरपुर से अनुराग ठाकुर के सामने चुनाव लड़े थे। अब विधानसभा चुनाव में धूमल को पटखनी देने के बाद राणा ने 2019 की तैयारी शुरू कर दी है।

यदि धूमल मुख्यमंत्री नहीं बने तो अनुराग को हमीरपुर की सांसदी बचानी भारी पड़ सकती है। इस बीच मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के पुत्र विक्रमादित्य के चुनाव जीतने से उनका कद बढ़ गया है। उम्मीद जताई जा रही है कि विक्रमादित्य कांग्रेस के टिकट पर मंडी से अगले लोकसभा का चुनाव लड़ेंगे। यदि वे चुनाव लड़े तो मंडी में सांसद राम स्वरूप शर्मा की स्थिति खराब हो सकती है।

इसके इतर पर्यवेक्षकों के सामने हंगामे के बाद यह तस्वीर भी स्पष्ट हो चुकी है कि सूबे का भाजपा संगठन एकजुट नहीं है। यदि पार्टी नेताओं के बीच एकजुटता नहीं बनी तो लोकसभा चुनाव में शांता कुमार और वीरेंद्र कश्यप की सीट जीतनी भी भारी पड़ सकती है।

अधिक उम्र की वजह से शांता का टिकट कटना वैसे भी तय माना जा रहा है। उनकी अनुपस्थिति में नए चेहरे पर दांव कितना कारगर होगा, यह तय कर पाना भी मुश्किल हो रहा है। यही वजह है कि भाजपा आलाकमान मुख्यमंत्री चेहरे के चयन से पहले सभी पहलुओं को आजमा लेना चाहता है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed