निलंबित आईपीएस अमिताभ ठाकुर को सुप्रीम कोर्ट से राहत
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सुप्रीम कोर्ट ने विभागीय कार्यवाही झेल रहे उत्तर प्रदेश कैडर के निलंबित आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर को जरूरी दस्तावेज मुहैया कराने केलिए कहा है। अमिताभ ठाकुर केखिलाफ विभागीय कार्यवाही चल रही है। हालांकि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कार्यवाही पर रोक लगाई हुई है।
न्यायमूर्ति एफएमआई कलीफुल्लाह और न्यायमूर्ति एसए बोबडे की पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार केयाचिका को खारिज कर दिया है जिसमें उसने निलंबित आईपीएस अधिकारी को दस्तावेजों की प्रति मुहैया करने केनिर्देश पर एतराज जताया था। यूपी सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने कहा कि उनकेखिलाफ जांच चल रही है।
11 मामलों में उन्हें दोषी पाया गया है। उन्होंने बताया कि सूचना के अधिकार केतहत अमिताभ ठाकुर ने न्यायाधिकरण का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन आरटीआई के तहत उन्हें दस्तावेज मुहैया कराने से इनकार कर दिया। उन्होंने बताया कि गत वर्ष एक दिसंबर को उन्होंने आरटीआई के तहत दस्तावेज मुहैया कराने की गुहार की गई थी लेकिन 30 दिसंबर को उनकी याचिक खारिज हो गई थी।
इसके बाद उन्होंने खंडपीठ का दरवाजा खटखटाया था। वरिष्ठ वकील ने बताया कि हमनें उन्हें सभी दस्तावेज मुहैया करार दिया है। उन्होंने यह भी कि जांच जारी है उन्हें दस्तावेज नहीं मुहैया कराया जा सकता। उन्होने बताया कि अमिताभ ठाकुर के कई खिलाफ आरोपों की जांच हो रही है। लेकिन पीठ ने यूपी सरकार की दलीलो को खारिज कर दिया है और अमिताभ ठाकुर को जरूरी दस्तावेज मुहैया कराने का निर्देश दिया है।
इसके बाद वरिष्ठ वकील ने पीठ से याचिका वापस करने की इजाजत मांगी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। वास्तव में अमिताभ ठाकुर का कहना है कि उन्हें प्रभावी तरीके से बचाव के लिए कई दस्तावेज की दरकार है और सरकार उन्हें वे दस्तावेज मुहैया नहीं करा रही है। उन्हें 67 दस्तावेजों का जिक्र किया है, जिनकी उन्हें दरकार है। मालूम हो कि अमिताभ ठाकुर पर कदाचार, धरना-प्रदर्शन में हिस्सा लेने, जनहित याचिकाएं दाखिल करने के आरोप हैं।
ठाकुर आए दिन पीआईएल दाखिल करते हैं, जो ठीक नहीं: यूपी सरकार
सुनवाई केदौरान यूपी सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने कहा कि निलंबित आईपीएस अधिकारी आए दिन जनहित याचिकाएं दाखिल करते हैं। अब तक वे कई जनहित याचिकाएं दाखिल कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी नौकर होने केनाते सरकार केविरुद्ध याचिका दाखिल नहीं कर सकते।
हालांकि अदालत ने कहा कि जनहित याचिका दाखिल करने से किसी को कैसे रोका जा सकता है। मालूम हो कि सितंबर, 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले के जरिए कहा था कि कोई सरकारी नौकरी याचिकाएं दाखिल कर सकता है।
फैसले में कहा गया था कि अगर किसी सरकारी अधिकारी को ऐसा लगता है कि सरकार अपने संवैधानिक दायित्व का सही से निर्वहन नहीं कर रही है तो वह याचिकाएं दाखिल कर सकता है। ऐसा करने पर कोई पाबंदी नहीं है।