फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Sushma Swaraj passes away: Won the hearts of everyone, by her Work Culture and Speeches

सुषमा स्वराज: संसद से सड़क तक अपने भाषणों से हर आम और खास का दिल जीता 

Wed, 07 Aug 2019 12:08 AM IST
Nilesh Kumar विनोद अग्निहोत्री, नई दिल्ली
विनोद अग्निहोत्री, नई दिल्ली Published by: Nilesh Kumar Updated Wed, 07 Aug 2019 12:08 AM IST
विज्ञापन
Sushma Swaraj passes away:  Won the hearts of everyone, by her Work Culture and Speeches
Sushma Swaraj - फोटो : PTI

पहले शीला और अब सुषमा। बड़ा ही अजीब दुर्योग है कि करीब 15 दिन पहले दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित अचानक चल बसीं और अब दिल्ली की ही एक और पूर्व मुख्यमंत्री सुषमा स्वराज हमारे बीच नहीं रहीं। शीला का निधन भी अचानक हृदयगति रुकने से हुई तो सुषमा भी अचानक दिल के दौरे से दुनिया छोड़ गईं। 

विज्ञापन


जहां शीला दीक्षित तीन बार लगातार दिल्ली की मुख्यमंत्री बनी और 15 साल तक हुकूमत में रहीं, वहीं सुषमा स्वराज महज दो महीने ही 1998 में तब मुख्यमंत्री बनाई गईं थीं जब भाजपा नेतृत्व ने एकाएक साहिब सिंह वर्मा को हटाकर एन चुनाव के वक्त उन्हें दिल्ली की कमान सौंपी थी। और महज इन्हीं दो महीनों में सुषमा ने दिल्ली वालों का दिल जीत लिया था। 
विज्ञापन


यह अलग बात है कि पार्टी की कमजोरी से भाजपा चुनाव हार गई लेकिन जब सुषमा की ताजपोशी हुई थी तो दिल्ली कांग्रेस के बड़े बड़े दिग्गज भी हिल गए थे। अपने इन दो महीनों के छोटे से कार्यकाल में सुषमा स्वराज ने हर बस्ती, हर कालोनी घूम घूम कर, रातों में पुलिस थानों में जाकर शहर की समस्याओं और सुरक्षा प्रणाली का जायजा लेते हुए नारा दिया था कि मैं रातों को जागूंगी ताकि दिल्ली वाले चैन से सो सकें।

विज्ञापन
विज्ञापन

हरियाणा से राजनीतिक पारी की शुरुआत

यूं तो सुषमा स्वराज ने लंबी राजनीतिक पारी खेली है। हरियाणा से अपनी राजनीति शुरु करने वाली सुषमा स्वराज 1977 में जनता पार्टी की राज्य सरकार में जब सबसे युवा मंत्री बनीं तो उनकी उम्र महज 26 साल थी। तब वह जनता पार्टी में थीं और उनका रुझान समाजवादी विचारधारा की तरफ था।जनता पार्टी के विभाजन के बाद भी वह चंद्रशेखर की अध्यक्षता वाली जनता पार्टी में ही बनी रहीं। लेकिन बाद में वह भाजपा में शामिल हो गईं। 

उनके पति स्वराज कौशल पेशे से वकील हैं और मिजोरम के राज्यपाल रहे हैं। भाजपा में सुषमा स्वराज की योग्यता और नेतृत्व क्षमता पहचानते हुए जल्दी ही उन्हें पार्टी प्रवक्ता बनाया गया। फिर महासचिव बनीं। मुखर और प्रखर वक्ता रहीं सुषमा ने संसद से सड़क तक अपने भाषणों से हर आम खास का दिल जीता। वह 1996 से लेकर 2014 तक बनी भाजपा की सभी सरकारों में मंत्री रहीं।

1996 में जब अटल बिहारी वाजपेयी की 13 दिन की सरकार बनी, सुषमा उसमें भी मंत्री बनाईं गईं। उन्हें भाजपा के तत्कालीन शिखर नेताओं अटल बिहारी वाजपेयी, लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी का समान विश्वास प्राप्त था। वह स्वास्थ्य मंत्री, सूचना प्रसारण मंत्री और विदेश मंत्री रहीं।

2004 में भाजपा की हार के बावजूद सुषमा का राजनीतिक कद और महत्व कम नहीं हुआ। 2009 के लोकसभा चुनावों के बाद भाजपा ने उन्हें लोकसभा में अपना नेता बनाया और इस नाते सुषमा स्वाराज नेता विपक्ष बनीं। वह संसद के दोनों सदनों की सदस्य रहीं।

वाजपेयी की तरह अजातशत्रु रहीं सुषमा

Sushma Swaraj passes away:  Won the hearts of everyone, by her Work Culture and Speeches
sushma swaraj

अपने नेता अटल बिहारी वाजपेयी की तरह ही सुषमा स्वराज भी राजनीति में अजातशत्रु मानी जाती रहीं। हर दल में उनकी स्वीकार्यता थी। दलगत राजनीति से ऊपर उठकर उनके कांग्रेस, वाम दलों समेत सभी दलों के शीर्ष नेताओं से बेहद अच्छे रिश्ते रहे। हमेशा मुस्कुराती रहने वाली सुषमा स्वराज भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ साथ हर दल के राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच सम्मानित नेता थीं।मीडिया में भी उनके मित्रों की कमी नहीं थीं। 

एक समय उनका नाम भाजपा के अध्यक्ष के लिए भी चला था, लेकिन बाद में यह जिम्मेदारी राजनाथ सिंह को मिली। मूल रूप से गैर भाजपा राजनीति से भाजपा में आईं सुषमा स्वराज को राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के नेताओं का भी भरोसा और विश्वास प्राप्त था। पूर्व सर संघचालक के.एस.सुदर्शन भी सुषमा को बेहद योग्य नेता मानते थे।

2018 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों के दौरान ही सुषमा स्वराज ने स्वंय अगला लोकसभा चुनाव न लड़ने की घोषणा के साथ ही राजनीति से संन्यास का इरादा जाहिर कर दिया था। सुषमा स्वराज का अचानक चले जाना भाजपा ही नहीं भारतीय राजनीति की एक बड़ी क्षति है। देश और दिल्ली वाले अपनी इस मुखर और प्रखर नेता को हमेशा याद रखेंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed