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Surgical Strike Day: सर्जिकल स्ट्राइक की चौथी सालगिरह, वो रात जब पाकिस्तान में घुसकर तबाह किए थे आतंकी ठिकाने

Mon, 28 Sep 2020 11:08 AM IST
अमर शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Mon, 28 Sep 2020 11:08 AM IST
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URI Surgical Strike Day surgical strike 2016 The fourth anniversary of the uri surgical strike 2016 the night when Indian army entered Pakistan and destroyed terror launchpad camps
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
भारतीय इतिहास में 28 सितंबर की तारीख उस दिन के तौर पर याद की जाएगी जब मोदी सरकार ने आतंकी ठिकानों को तबाह करने के लिए 'सर्जिकल स्ट्राइक' जैसे कदम उठाए। सरकार सोमवार को सर्जिकल स्ट्राइक की चौथी वर्षगांठ मना रही है। आखिर क्यों मनाया जा रहा है 'सर्जिकल स्ट्राइक दिवस' और क्या हुआ था उस रात जानें इसकी पूरी कहानी। 
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18 सितंबर 2016 को पाकिस्तान से आए आतंकियों ने जम्मू-कश्मीर के उरी सेक्टर में भारतीय सेना के शिविर पर हमला किया था। इस घातक हमले में 18 जवान शहीद हो गए थे। इस आतंकी घटना के बाद देश में आक्रोश था। हमले की प्रतिक्रिया में आतंकवादी समूहों के खिलाफ आज ही के दिन जवाबी हमले किए गए थे। रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को इन हमलों के बारे में याद दिलाया था। 
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45 आतंकी मारे थे
पाकिस्तान आतंकी कैंपों की मौजूदगी को स्वीकार नहीं कर रहा था। भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए ऐसा कदम उठाया कि न सिर्फ पाकिस्तान बल्कि पूरी दुनिया को दिखा दिया कि भारत आतंकी कैंपों का खात्मा कर सकता है। भारत ने 28-29 सितंबर की दरम्यानी रात को भारतीय सेना के विशेष बलों ने नियंत्रण रेखा (एलओसी) पार कर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी लॉन्च पैड्स पर सर्जिकल स्ट्राइक की और उन्हें तबाह कर दिया। इस हमले में भारतीय सेना ने पाकिस्तानी आतंकवादियों के छह लॉन्चपैड को तबाह कर दिया था और करीब 45 आतंकी इस कार्रवाई में मारे गए थे।
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इस हमले के दो साल बाद 2018 में भारत सरकार ने सर्जिकल स्ट्राइक दिवस मनाना शुरू किया। इस सर्जिकल स्ट्राइक को सबसे बेहतरीन सैन्य ऑपरेशन के रूप में भी याद किया जाता है क्योंकि दुश्मन ठिकानों को तहस-नहस करने के दौरान भारतीय सेना के किसी जवान को मामूली खरोंच तक नहीं आई थी। 

पीएम ने ऐसे किया याद
'मन की बात' में पीएम मोदी ने कहा, "चार साल पहले, इस समय के दौरान, दुनिया ने सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान हमारे सैनिकों के साहस, बहादुरी और पराक्रम को देखा। हमारे बहादुर सैनिकों का बस एक ही मिशन और लक्ष्य था - किसी भी कीमत पर 'भारत माता की जय' और सम्मान की रक्षा करना। उन्हें अपने जीवन की बिल्कुल भी परवाह नहीं थी। वे कर्तव्य की रेखा पर आगे बढ़ते रहे और हम सभी साक्षी बने कि वे कैसे विजयी होकर लौटे। उन्होंने भारत को गौरवान्वित किया था।''

पीएम मोदी ने कहा था कि हमलावर बेखौफ नहीं जाएंगे और उन्हें माफ नहीं किया जाएगा। 18 जवानों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा।

उरी का बदला
भारत ने पाकिस्तान को सबक सिखाने की योजना बनाई। पहली बार आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई को लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) पार कर अंजाम दिया गया।  28-29 सितंबर की रात भारतीय सेना के विशेष बलों के 150 कमांडोज की मदद से सर्जिकल स्ट्राइक ऑपरेशन किया गया। भारतीय सेना आधी रात पीओके में 3 किलोमीटर अंदर घुसे और आतंकियों के ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया। 

खास हथियार हुए इस्तेमाल
28 सितंबर की आधी रात 12 बज MI 17 हेलिकॉप्टरों के जरिए 150 कमांडो को एलओसी के पास उतारा गया। यहां से 4 और 9 पैरा के 25 कमांडो ने एलओसी पार की और पाक अधिकृत कश्मीर में सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया। 

इस स्ट्राइक के लिए सेना ने अपनी तैयारी 24 सितंबर से शुरू कर दी थी। स्पेशल कमांडोज को नाइट-विजन डिवाइस, Tavor 21 और AK-47 असॉल्ट राइफल, रॉकेट-प्रोपेल्ड ग्रेनेड, शोल्डर-फाइबल मिसाइल, हेकलर और कोच पिस्तौल, उच्च विस्फोटक ग्रेनेड और प्लास्टिक विस्फोटक से लैस किया गया था। टीम में 30 भारतीय जवान शामिल थे।

कमांडोज ने बिना मौका गंवाए आतंकियों पर ग्रेनेड फेंके। अफरा-तफरी फैलते ही स्मोक ग्रेनेड के साथ ताबड़तोड़ गोलियां बरसाईं। हमले में आतंकियों के साथ पाकिस्तानी सेना के कुछ जवान भी मारे गए। ये ऑपरेशन रात साढ़े 12 बजे शुरू हुआ था और सुबह साढ़े 4 बजे तक चला। पूरे अभियान पर दिल्ली में सेना मुख्यालय से रात भर नजर रखी गई थी। 


इन आतंकी शिविरों को भारत में आतंकवादियों को भेजने के लिए लॉन्चपैड के रूप में इस्तेमाल किया जाता था। सैनिकों के अंदर जाने और लगभग पांच घंटे तक चलने वाले ऑपरेशन को पूरा करने से पहले इन लॉन्चपैडों पर तैनात पहरेदारों को स्निपर्स ने मार गिराया। इस हमले में पीओके स्थिति आतंकवादियों के ठिकाने  बुरी तरह तबाह हो गए और अतंकियों की कमर टूट गई। 
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