सुप्रीम कोर्ट से महिला वकीलों को बड़ी राहत: SCAORA चुनाव में ये अहम पद किए आरक्षित, बढ़ेगी महिलाओं की ताकत
सुप्रीम कोर्ट ने एससीएओआरए चुनाव में महिला वकीलों के लिए सचिव, संयुक्त कोषाध्यक्ष और दो कार्यकारी पद आरक्षित करने का आदेश दिया है। यह फैसला महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए लिया गया है। याचिका में 33 प्रतिशत आरक्षण की मांग की गई थी।
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने महिला वकीलों के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। इससे न्याय व्यवस्था में उनकी भागीदारी बढ़ने की उम्मीद है। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन यानी एससीएओआरए के आगामी चुनाव में कुछ प्रमुख पद महिलाओं के लिए आरक्षित कर दिए हैं। इस फैसले को महिला प्रतिनिधित्व की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है और इससे लंबे समय से चली आ रही असमानता को कम करने की कोशिश की गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल करते हुए यह आदेश दिया है। अदालत ने साफ किया कि न्याय सुनिश्चित करने के लिए उसे यह अधिकार है कि वह जरूरी कदम उठा सके। कोर्ट ने सचिव, संयुक्त कोषाध्यक्ष और दो कार्यकारी पद महिलाओं के लिए आरक्षित कर दिए हैं। यह फैसला उस याचिका पर आया जिसमें महिला वकीलों के लिए कम से कम 33 प्रतिशत आरक्षण की मांग की गई थी।
ये भी पढ़ें- India Diplomacy: पश्चिम एशिया तनाव के बीच भारत की कूटनीति सफल, राजनाथ सिंह ने कहा- हमने निभाई मजबूत भूमिका
क्या था मामला और किसने उठाई थी मांग?
यह याचिका एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड विव्या नागपाल ने दायर की थी। उन्होंने कहा था कि एससीएओआरए के चुनाव के लिए जारी नोटिस में महिलाओं के लिए कोई आरक्षण नहीं रखा गया है। याचिका में यह भी कहा गया कि यह व्यवस्था महिलाओं को नेतृत्व से दूर रखती है और उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती है।
क्या पहले महिलाओं का प्रतिनिधित्व कम रहा है?
याचिका में बताया गया कि एससीएओआरए में करीब 3000 वकील हैं, लेकिन नेतृत्व पदों पर महिलाओं की संख्या बेहद कम रही है। मौजूदा कार्यकारिणी पूरी तरह पुरुषों की है। इससे यह साफ होता है कि लंबे समय से महिलाओं को बराबरी का मौका नहीं मिल रहा था और इसी कारण अदालत को हस्तक्षेप करना पड़ा।
क्या चुनाव प्रक्रिया पर भी उठे थे सवाल?
याचिका में 8 अप्रैल को जारी चुनाव नोटिस को भी चुनौती दी गई थी। इसमें कहा गया था कि बिना आरक्षण के चुनाव कराना संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 का उल्लंघन है। याचिकाकर्ता ने चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगाने या आरक्षण के साथ चुनाव कराने की मांग भी की थी।
क्या पहले भी कोर्ट ने दिए हैं ऐसे आदेश?
सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले दिसंबर 2023 में राज्य बार काउंसिल में महिलाओं को 30 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देने का आदेश दिया था। साथ ही यह भी कहा गया था कि अगर पर्याप्त महिलाएं नहीं चुनी जाती हैं तो को-ऑप्शन के जरिए सीटें भरी जा सकती हैं।
इस फैसले से यह उम्मीद जताई जा रही है कि अब न्याय व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और उन्हें नेतृत्व में जगह मिलेगी। यह कदम आने वाले समय में अन्य संस्थाओं के लिए भी मिसाल बन सकता है। अदालत का यह फैसला साफ संदेश देता है कि समानता और न्याय को लेकर अब ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
अन्य वीडियो-
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.