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Supreme Court: नोएडा-ग्रेनो के बिल्डरों को सुप्रीम कोर्ट से झटका, आठ फीसदी ब्याज का आदेश वापस

Mon, 07 Nov 2022 10:55 PM IST
Amit Mandal अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: Amit Mandal Updated Mon, 07 Nov 2022 10:55 PM IST
सार

सुनवाई के दौरान नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरणों ने शीर्ष अदालत को बताया था कि यदि देरी के लिए ब्याज दर को लगभग 8 प्रतिशत पर सीमित करने का आदेश दिया जाता है तो अथॉरिटी को 7500 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान होगा।

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Supreme Court withdrew the order of 8 percent interest limit, blow to builders of Noida-Greno
supreme court - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा के बिल्डरों को झटका देते हुए भूमि की लागत के भुगतान में देरी से संबंधित अपना जून, 2020 का आदेश सोमवार को वापस ले लिया। इसमें नोएडा और ग्रेटर नोएडा के बिल्डरों की भूमि की लागत के भुगतान में देरी के लिए ब्याज दर को 15-23 फीसदी के बजाय 8 फीसदी पर सीमित करने का निर्देश दिया था।

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मुख्य न्यायाधीश जस्टिस यूयू ललित के समक्ष प्राधिकरणों के वरिष्ठ वकील रवींद्र कुमार ने बताया था कि फैसले से 7,500 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान होगा। कुमार ने तर्क दिया था कि यह आदेश तथ्यों पर आधारित नहीं था और यह अथॉरिटी को आर्थिक रूप से बर्बाद कर देगा। प्राधिकरण का तर्क था कि नोएडा में गृहकर नहीं है, फिर भी वह मेट्रो सेवाओं व अच्छे बुनियादी ढांचे को बनाए रखता है।
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आम्रपाली मामले में फैसला टाला
सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली की अधूरी पड़ी परियोजनाओं को पूरा करने की लिए एफएआर की बिक्री की अनुमति वाले आवेदन पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला टाल दिया है। मुख्य न्यायाधीश ललित ने कहा कि अब दूसरी पीठ इस पर विचार करेगी। दो नवंबर को पीठ ने इस मामले पर अपना फैसला सुरक्षित रखा था। मुख्य न्यायाधीश का सोमवार को आखिरी कार्य दिवस था। वह मंगलवार को अपने पद से सेवानिवृत हो रहे हैं।
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भूमि की लागत के भुगतान में देरी
वहीं, भूमि की लागत मामले में प्राधिकरण ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष यह दलील भी रखी कि आवंटन के बाद एक भी बिल्डर अदालत में नहीं आया कि ब्याज की दर बहुत अधिक है।  पिछले साल सितंबर में अथॉरिटी ने शीर्ष अदालत से अपने आदेश को वापस लेने का आग्रह किया था। कहा गया था कि बिल्डरों ने अपना एक पैसा बकाया जमा नहीं किया है। 

40 हजार फ्लैटों की रजिस्ट्री का रास्ता साफ
बिल्डर और प्राधिकरण के बीच बकाया भुगतान को लेकर चल रहे विवाद पर विराम लग गया है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अपने अगस्त 2020 के आदेश को वापस ले लिया, जिसमें मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लैंडिंग रेट (एमसीएलआर) के हिसाब से ब्याज दर वसूलने के आदेश थे। अब बिल्डरों को प्राधिकरण द्वारा निर्धारित बढ़ी दरों पर देय राशि का भुगतान करना होगा। शीर्ष अदालत के इस फैसले के बाद नोएडा और ग्रेटर नोएडा की ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं में फंसे 40 हजार फ्लैट खरीदारों की रजिस्ट्री का रास्ता साफ हो गया है। साथ ही, दोनों प्राधिकरणों का बिल्डरों पर बकाया 55 हजार करोड़ रुपए मिलने से विकास कार्यों में तेजी आने की उम्मीद बंधी है।
 
एसीई ग्रुप ऑफ कंपनीज की तरफ से 2020 में याचिका दायर की गई थी। इस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा और ग्रेनो प्राधिकरण में ग्रुप हाउसिंग की परियोजनाओं की देयताओं की गणना रजिस्ट्री की शर्तों के स्थान पर एक जनवरी 2010 से एसबीआई की एमसीएलआर दरों के आधार पर बिना दंडात्मक ब्याज व बिना कंपाउंडिंग करने के आदेश दिए थे। बिल्डरों को 25 प्रतिशत राशि तीन माह में और शेष 75 प्रतिशत एक वर्ष के अंदर जमा कराने के निर्देश दिए थे। वित्तीय हानि को देखते हुए नोएडा और ग्रेनो प्राधिकरण ने 26 अक्तूबर 2020 को पुनर्विचार याचिका दाखिल की।
 
प्राधिकरण की तरफ से पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्वे, पूर्व अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी और वरिष्ठ अधिवक्ता रविंद्र कुमार पैरवी कर रहे थे। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद कोर्ट ने 13 नवंबर 2021 को निर्णय सुरक्षित किया था। 

19301 करोड़ के नुकसान से बचे दोनों प्राधिकरण
अगस्त 2020 को कोर्ट के आदेश के प्रभाव से नोएडा प्राधिकरण की ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं के बकाए पर 12,776 करोड़ और ग्रेटर नोएडा की परियोजनाओं के सापेक्ष बकाए पर 6,525 करोड़ रुपये की वित्तीय हानि की संभावना थी। पुराने आदेश वापस लिए जाने के बाद दोनों प्राधिकरण 19,301 करोड़ रुपये के नुकसान से बच गए हैं। हालांकि, न्यायालय में विचाराधीन यूनिटेक व अन्य परियोजनाओं की देयताओं को छोड़कर दोनों प्राधिकरणों के 9,698 करोड़ रुपये के वित्तीय हित सोमवार के फैसले से सुरक्षित हो गए।


भुगतान नहीं करने पर प्राधिकरण करेगा सख्त कार्रवाई
प्राधिकरण ने बिल्डरों से बकाया राशि वसूलने के लिए तीन बिंदुओं पर एक्शन प्लान तैयार करना शुरू कर दिया है। कोर्ट के आदेश के बाद भी भुगतान नहीं करने वाले बिल्डरों की लीज डीड कैंसिल की जाएगी। रिकवरी सर्टिफिकेट (आरसी) जारी कर प्रॉपर्टी जब्त की जाएगी।

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